चक्कर, सिरदर्द या दौरा? जानें असली वजह

क्या चमकती रोशनी से सिरदर्द, चक्कर या मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं? जानें फोटोफोबिया के लक्षण, ज्यादा खतरा किसे है और बचाव के आसान उपाय।

टिमटिमाती रोशनी दिमाग पर करती है हमला

HIGHLIGHTS

  • तेज रोशनी से पड़ सकता है दौरा?
  • चमकती रोशनी किसे पहुंचा सकती है खतरा?
  • आपकी स्क्रीन की चमक बन रही जानलेवा?
  • रोशनी से सिरदर्द, फिर कहीं दौरे तक?

स्मार्टफोन, टीवी, वीडियो गेम, कॉन्सर्ट की स्ट्रोब लाइट्स और सोशल मीडिया के करंट वीडियो — आज की डिजिटल जिंदगी में हमारी आंखें दिनभर चमकते विजुअल के संपर्क में रहती हैं। ज्यादातर लोगों को इनसे कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों में तेज रोशनी से सिरदर्द, जी मिचलाना, चक्कर आना और बेहद कम मामलों में मिर्गी के दौरे तक हो सकते हैं।

वडोदरा के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और मूवमेंट डिसऑर्डर स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने बताते हैं कि रोशनी के प्रति संवेदनशीलता कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि अलग-अलग स्थितियों का लक्षण हो सकती है। सही जानकारी रखना इसलिए जरूरी है कि बिना वजह की घबराहट से बचा जा सके और उन लोगों की समय पर पहचान हो सके जिन्हें वास्तव में इलाज की दरकार है।

तेज रोशनी से सिरदर्द क्यों होता है? जानें फोटोफोबिया के बारे में

रोशनी के प्रति असामान्य संवेदनशीलता को मेडिकल भाषा में **फोटोफोबिया** कहा जाता है। इस स्थिति में सामान्य या मध्यम रोशनी भी आंखों में जलन, सिरदर्द और बेचैनी पैदा कर देती है।

डॉक्टर के अनुसार, फोटोफोबिया माइग्रेन के मरीजों में सबसे ज्यादा देखा जाता है। आंकड़ों के हिसाब से, माइग्रेन से जूझ रहे 85 से 90 प्रतिशत लोगों में रोशनी के प्रति संवेदनशीलता पाई जाती है। चमकदार या टिमटिमाती रोशनी न सिर्फ माइग्रेन के दौरे को भड़का सकती है, बल्कि इसके साथ नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:

  • आंखों में जकोहनी या दर्द
  • जी मिचलाना
  • आवाज के प्रति बढ़ी हुई संवेदनशीलता
  • चक्कर आना या धुंधला दिखना

यानी अगर तेज रोशनी के संपर्क में आने पर सिरदर्द हो, तो यह अक्सर माइग्रेन का असर होता है — यह हर बार मिर्गी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

दिमाग और आंखों पर चमकती रोशनी का असर कैसे पड़ता है?

जब लाइट बेहद तेजी से चमकती है या विजुअल पैटर्न सेकंड-दर-सेकंड बदलते हैं, तो आंखों से दिमाग पहुंचने वाली जानकारी असंगत हो जाती है। यही असंगति (sensory mismatch) कई लोगों में रोशनी से चक्कर आने की शिकायत की जड़ होती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह असर उन लोगों पर ज्यादा साफ दिखता है जिनका शरीर संतुलन बनाए रखने वाला सिस्टम या आंखें अत्यधिक संवेदनशील हों। ऐसी स्थिति में दिमाग आंखों और संतुलन तंत्र से मिलने वाले संकेतों को आपस में मिला नहीं पाता, जिससे धुंधलापन, अस्थिरता और बेचैनी महसूस होती है।

फोटोसेंसिटिव एपिलेप्सी

अब बात उस दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति की, जिसे फोटोसेंसिटिव एपिलेप्सी कहा जाता है। इसमें बार-बार चमकने वाली रोशनी दिमाग की बिजली की गतिविधि को असामान्य तरीके से अपने तालमेल में खींच लेती है, और यही तालमेल दौरे को ट्रिगर कर देता है।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  • मिर्गी के मरीजों में से केवल लगभग 3 प्रतिशत लोगों को ही फोटोसेंसिटिविटी होती है।
  • यह स्थिति बच्चों और किशोरों में अधिक पाई जाती है।
  • जुवेनाइल मायोक्लोनिक एपिलेप्सी और आईलिड मायोक्लोनिया जैसे विशेष प्रकार की मिर्गी वाले मरीजों के लिए यह खास चिंता का विषय है।

क्या हर चमकती लाइट खतरनाक होती है?

नहीं। हर टिमटिमाती रोशनी से दौरे का खतरा एक जैसा नहीं होता। खतरे का स्तर कई कारकों पर निर्भर करता है:

  • चमकने की आवृत्ति: जो लाइटें प्रति सेकंड 5 से 30 बार टिमटिमाती हैं, वे सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया पैदा कर सकती हैं।
  • कंट्रास्ट और रंग: तेजी से बदलते रंग या गहरे-हल्के पैटर्न ज्यादा उत्तेजक होते हैं।
  • दूरी और क्षेत्र: लाइट जितनी पास हो और आंख के फील्ड का जितना बड़ा हिस्सा ढके, खतरा उतना बढ़ता है।
  • अवधि: लंबे समय तक संपर्क में रहना भी संवेदनशीलता बढ़ाता है।

किन लोगों को रहना चाहिए सबसे ज्यादा सतर्क?

चमकती रोशनी से दौरे का खतरा निम्नलिखित लोगों में काफी बढ़ जाता है:

  • पहले से मिर्गी के मरीज
  • मिर्गी के विशेष सिंड्रोम वाले बच्चे और किशोर
  • जिन्हें पहले कभी तेज चमकती रोशनी से दौरा पड़ चुका हो

इसके अलावा, नींद की कमी, अत्यधिक थकान, शराब का सेवन, बीमारी या मिर्गी की दवा छोड़ना — ये सब संवेदनशील लोगों में दौरे की संभावना को और ऊंचा कर देते हैं।

ये लक्षण नजरअंदाज करना पड़ सकता है महंगा

सिरदर्द, चक्कर या जी मिचलाना अक्सर हल्की-फुल्की परेशानी के कारण होते हैं और ये हमेशा गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत नहीं होते। लेकिन नीचे दिए लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • अचानक बेहोश हो जाना या गिर जाना
  • खाली नजरों से घूरना, बुलाने पर कोई प्रतिक्रिया न देना
  • बार-बार झपकियां लेना या शरीर में झटके आना
  • आंखें अचानक ऊपर-नीचे या इधर-उधर घूमना
  •  घटना के बाद काफी देर तक उलझन में रहना

जांच कैसे होती है? EEG और फोटिक स्टिमुलेशन

जब डॉक्टरों को मिर्गी की आशंका होती है, तो वे इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) टेस्ट कराते हैं। इस जांच के दौरान मरीज के सामने तेजी से चमकती स्ट्रोब लाइट रखी जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में फोटिक स्टिमुलेशन कहा जाता है। इससे पता चलता है कि दिमाग चमकती रोशनी पर असामान्य प्रतिक्रिया तो नहीं दे रहा।

ध्यान रहे, EEG के नतीजों को कभी भी अकेले नहीं समझा जाता — इसे मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और क्लिनिकल जांच के साथ मिलाकर ही विश्लेषण किया जाता है।

तेज रोशनी से बचाव के आसान उपाय

स्क्रीन और रोशनी की वजह से होने वाली समस्याओं से बचने के लिए ये उपाय अपनाएं:

  1. स्क्रीन से सही दूरी पर बैठें और ब्राइटनेस-कंट्रास्ट कम रखें।
  2. स्क्रीन देखते समय कमरे में अच्छी रोशनी रखें — अंधेरे में मोबाइल चलाने से बचें।
  3. तेजी से चमकने वाले वीडियो या गेम से परहेज करें और नियमित ब्रेक लें।
  4. अचानक स्ट्रोब लाइट दिखे, तो तुरंत नजर हटा लें।
  5. जरूरत पड़ने पर एक आंख बंद कर लें — इससे दोनों आंखों के बीच तालमेल टूटने की वजह से दौरे का खतरा घट सकता है।

Sandhya Samay News

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