World’s Most Toxic Algae: समुद्र की लहरों और इनके किनारे फैली रेत को आमतौर पर सुकून और सुंदरता का पर्याय माना जाता है। लेकिन, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के तटीय क्षेत्रों में इन दिनों जो नजारा सामने आ रहा है, वह किसी डरावनी साइ-फाई फिल्म से कम नहीं है। यहां के समुद्री किनारे एक अजीब और खौफनाक सफेद झाग की चादर ओढ़े हुए हैं। यह कोई साधारण झाग नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे जहरीले और खतरनाक माइक्रोएल्गी का विनाशकारी रूप है, जिसके संपर्क में आने मात्र से ही जलचर जीवों की तादाद में भारी कमी आ रही है और इंसान भी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
वेटपिंगा बीच पर क्या हुआ?
पिछले साल मार्च महीने में जब ऑस्ट्रेलिया के ‘विक्टर हार्बर’ से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित वेटपिंगा बीच पर इस असामान्य सफेद झाग को देखा गया था, तभी से वहां मौत का सिलसिला शुरू हो गया। इस जहरीले पानी ने समुद्री घोड़ों, ऑक्टोपस और अनगिनत मछलियों को मौत के घाट उतार दिया। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह कोई सामान्य प्रदूषण है, लेकिन जैसे-जैसे मौतें बढ़ीं, वैज्ञानिकों को इसके पीछे के असली कारण का पता चला तो हर किसी के होश उड़ गए।
दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए गहन शोध और प्रतिष्ठित जर्नल ‘नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन’ (Nature Ecology and Evolution) में प्रकाशित एक शोध पत्र ने इस तबाही की असली वजह को सामने रखा है। शोध के अनुसार, यह सब ‘कैरेनिया क्रिस्टाटा’ नामक एक माइक्रोएल्गी की देन है।
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी की शोधकर्ता और इस स्टडी की मुख्य लेखिका डॉ. शौना मरे के मुताबिक, जब उन्होंने लैब में इस एल्गी के सैंपल्स की जांच की, तो नतीजे रोंगटे खड़े करने वाले थे। उन्होंने बताया कि लेबोरेटरी के बेहद कम और नियंत्रित माहौल में मौजूद इस एल्गी की थोड़ी सी मात्रा भी जानलेवा साबित हुई।
10 गुना ज्यादा जहरीला: न्यूरोटॉक्सिन का खतरा
‘कैरेनिया क्रिस्टाटा’ इसलिए इतना खतरनाक है क्योंकि यह ‘न्यूरोटॉक्सिन’ नामक एक घातक जहर का उत्सर्जन करता है। यह जहर सीधा जीवों के तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है और उसे पूरी तरह से ध्वस्त कर देता है।
अब तक दुनिया में ‘कैरेनिया ब्रेविस’ नामक एल्गी को सबसे विनाशकारी माना जाता था, जो अमेरिका के गर्म तटीय पानियों में पाया जाता है। लेकिन डॉ. मरे के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में मिला यह नया एल्गी उससे 10 गुना ज्यादा जहरीला है। इसका सीधा असर दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के पारिस्थितिक तंत्र और वहां की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है।
इंसानों को भी हो रहा नुकसान
यह मामला सिर्फ समुद्री जीवों तक सीमित नहीं है। जब यह जहरीला झाग समुद्र की लहरों के साथ तट की ओर आता है, तो यह हवा में मिक्स हो जाता है। सर्फिंग करने वाले लोग और तट पर घूमने वाले स्थानीय निवासी इस जहरीले पानी और हवा के संपर्क में आ रहे हैं। इसके चलते लोगों में लगातार खांसी, गले में भयंकर दर्द और आंखों में जलन के साथ धुंधलापन जैसे लक्षण देखे गए हैं। यह एक एयरबोर्न खतरा बनकर सामने आया है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस विनाशकारी एल्गी का खतरा सिर्फ ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के तटीय इलाकों के लिए एक चेतावनी जारी की है। शोध से एक और डरावना सच सामने आया है—यह एल्गी ठंडे पानी में तेजी से पनपता है।
इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया के किसी भी ऐसे तटीय इलाके जहां का पानी ठंडा है, वहां यह एल्गी कभी भी अपनी जहरीली पैर फैला सकता है। डॉ. मरे ने चिंता जताते हुए कहा कि दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में इस एल्गी का हमला पिछले 15 महीनों से जारी है और अभी तक इसे पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सका है।



























