उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों किसानों और आम जनता के मुद्दे गर्मी का रूप लेते नजर आ रहे हैं। ताजा उदाहरण बरेली का है, जहां उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आगमन पर भाजपा के लिए गुलजार वातावरण बनाने के बीच कांग्रेस पार्टी ने सड़कों पर उतरकर सरकार की कलई खोलने का काम किया। बुधवार को बरेली में डिप्टी सीएम के दौरे को लेकर जहां प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से चाक-चौबंद नजर आई, वहीं महानगर कांग्रेस कमेटी ने किसानों के बढ़ते संकट और बिजली विभाग की लूट को लेकर एक जोरदार धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया।
प्रशासनिक चाक-चौबंदी के बीच कांग्रेस ने सड़कों पर दिखाई ताकत
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बरेली दौरे को लेकर पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार मोबाइल पर नजर बनाए हुए थे, लेकिन इस व्यस्त दौर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना प्रदर्शन स्थल तय किया और वहां जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन को महानगर अध्यक्ष एडवोकेट दिनेश दादा और प्रदेश प्रवक्ता राज शर्मा के कुशल नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां और पोस्टर थे, जिनपर योगी सरकार के खिलाफ तीखी नारेबाजी लिखी हुई थी।
कांग्रेस नेताओं ने अपने प्रदर्शन का केंद्रबिंदु किसानों की वर्तमान परेशानी को बनाया। उन्होंने सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि जब पूरे प्रदेश में खरीफ की फसल (विशेषकर धान) की रोपाई और बुवाई का समय चल रहा है, तब किसानों को खाद केंद्रों पर दिन-रात लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि न तो यूरिया और न ही डीएपी (DAP) खाद की उपलब्धता सही ढंग से हो पा रही है। जो थोड़ी खाद आती भी है, वह काले बाजार में चली जाती है या फिर सिफारिश के दम पर वितरित होती है। आम किसान के लिए तो खाद मिलना दूर की बात है, उसकी फसल खराब होने की कगार पर खड़ी है।
स्मार्ट मीटर का बना जनता पर भारी पहाड़
खाद संकट के साथ-साथ कांग्रेस ने ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’ के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार ने बिजली विभाग के आधुनिकीकरण के नाम पर ऐसे मीटर लगवाए, जो आम उपभोक्ताओं के लिए ‘स्मार्ट’ नहीं, बल्कि ‘महंगे’ साबित हो रहे हैं। प्रवक्ता राज शर्मा ने बताया कि शहर और गांवों से लगातार शिकायतें आ रही हैं कि पहले जहां बिजली का बिल 500 से 1000 रुपये का आता था, वहां अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद अचानक से 3000 से 5000 रुपये के बिल आने लगे हैं।
जबकि बिजली की खपत में कोई बदलाव नहीं आया है। आज के दौर में जहां महंगाई आसमान छू रही है, ऐसे में ये बढ़े हुए बिजली के बिल गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों के बजट पर भारी पड़ रहे हैं। कांग्रेस ने इन मीटरों की तकनीकी जांच कराने और गलत बिलों में तुरंत छूट देने की मांग उठाई।
अपनी नाराजगी को आधिकारिक रूप देने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के नाम जिला प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मांग उठाई गई कि तुरंत प्रभाव से सभी ब्लॉकों और केंद्रों पर खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही स्मार्ट मीटरों से जुड़ी शिकायतों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना
इस मौके पर पूर्व विधायक छोटेलाल गंगवार ने कहा कि सरकार अपने ‘डबल इंजन’ के नारों में इतनी व्यस्त है कि उसे धरती पर खड़े किसान की फसल और आम आदमी के घर में चल रही बिजली का बिल नजर नहीं आ रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही इन दोनों जलते मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस पार्टी जनहित के इन मुद्दों को लेकर जिला मुख्यालयों से लेकर लखनऊ तक आंदोलन की आग धधा देगी।
महानगर अध्यक्ष एडवोकेट दिनेश दादा ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस किसानों और आम जनता की आवाज है। जब तक सरकार जमीनी स्तर पर राहत नहीं देती, कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों से नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम जब बरेली आए हैं, तो उन्हें यहां की जमीनी हकीकत भी देख लेनी चाहिए।























