धरती से डायनासोरों के सफाये को लगभग 6.5 करोड़ साल बीत चुके हैं, लेकिन उसी विनाशकारी दौर के बाद उभरी एक हस्ती आज भी जीवित है। चीन के युन्नान प्रांत के घने जंगलों से वैज्ञानिकों को विशाल फंगस डायनजुनस रेक्स (Dianjunus rex) की खोज हुई है, जिसका कद आधा मीटर और वजन सवा दो किलोग्राम तक दर्ज किया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रजाति का वंश उसी कालखंड से शुरू हुआ, जब डायनासोर धरती से हमेशा के लिए गायब हो रहे थे। यह खोज फंगस के बारे में अब तक मानी जाने वाली वैज्ञानिक सीमाओं को चुनौती दे रही है।
डायनासोर के खात्मे के बीच उबरी नई जिंदगी
करीब 6.5 करोड़ साल पहले धरती पर ऐसी तबाही मची थी, जिसने अपने दौर के सबसे ताकतवर जीवों—डायनासोरों—का वजूद हमेशा के लिए मिटा दिया। महाविनाश के बाद जंगलों की बनावट बदल गई और पर्यावरण में आए बड़े उतार-चढ़ाव ने नई प्रजातियों को जन्म दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार,डायनजुनस रेक्स (Dianjunus rex) की उत्पत्ति भी उसी युग से जुड़ी मानी जा रही है।
माना जाता है कि घने जंगलों में अपने बीजाणु (स्पोर्स) को ज्यादा से ज्यादा दूरी तक फैलाने की जरूरत ने ही इस फंगस को इतना विशाल आकार दिया। यानी इसका दबंग कद सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि टिकने की रणनीति का नतीजा है।
कितना बड़ा है यह ‘रेक्स’? जो थ्योरी पलट गई
युन्नान के दुर्गम जंगलों से मिला यह फंगस लगभग 50 सेंटीमीटर लंबा है और इसका वजन 2.2 किलोग्राम तक पाया गया है। खास बात यह है कि यह ‘एस्कोमाइकोटा’ (Ascomycota) समूह का अब तक ज्ञात सबसे विशाल प्रतिनिधि है।
विज्ञान जगत में अब तक यही माना जाता था कि इस समूह के फंगस का आकार सीमित रहता है—जैसे गुच्छी जैसे छोटे फंगस। लेकिन इतना विशालकाय फलने वाला भाग (fruiting body) पहले कभी दर्ज नहीं हुआ था। दरअसल, इस खोज ने यह पुरानी मान्यता तोड़ दी है कि कोई फंगस कितना बड़ा हो सकता है। जमीन के नीचे छिपे रहने वाला यह महाबली वैज्ञानिकों के लिए एक तरह से जीवविज्ञान की किताबों का अध्याय ही फिर से लिखने वाला साबित हो रहा है।
ओक के पेड़ों की जड़ों में इतने साल कैसे छिपा रहा?
इस सफेद रंग के फंगस को खोजना शोधकर्ताओं के लिए किसी खजाने की तलाश से कम नहीं था। यह ज्यादातर समय ओक के पेड़ों की जड़ों के पास जमीन के अंदर छिपा रहता है और केवल खास मौसम में ही ऊपर दिखाई देता है। ऊपर से युन्नान के जंगलों के बेहद दुर्गम रास्तों ने इस तक पहुंच को और मुश्किल बना दिया।
यही वजह है कि यह विशालकाय फंगस इतने लंबे समय तक इंसानों की नजरों से दूर रहा। वैज्ञानिकों ने इसके सेल्स की बनावट और डीएनए जांच के बाद ही इसे दुनिया के सामने रखा।
DNA जांच से खुला नया फंगल परिवार
जब शोधकर्ताओं ने इसके आनुवंशिकीय (genetic) विश्लेषण और कोशिकीय संरचना की गहराई से जांच की, तो नतीजा चौंकाने वाला निकला—यह फंगस किसी मौजूदा श्रेणी में फिट नहीं बैठता। इस खोज के साथ ही विज्ञान जगत में एक नया परिवार ‘Dianjunaceae’ दर्ज हो गया है।
कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी के डॉ. इंदुनिल सी. सेनानायके के मुताबिक, यह खोज फंगस के क्रमिक विकास को समझने का एक दुर्लभ मौका देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्रजातियां बताती हैं कि धरती पर जीवन कितने रूपों में खुद को ढाल सकता है।
एशिया के जंगलों में अब भी दफन हैं न जाने कितने रहस्य
यह खोज सिर्फ एक फंगस तक सीमित नहीं है। इसने यह भी साबित कर दिया है कि एशिया के घने जंगल अब भी विज्ञान के लिए अनगिनत रहस्यों के खजाने हैं। दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी प्रजातियां मौजूद हो सकती हैं, जिन्हें अब तक किसी ने देखा या दर्ज नहीं किया। वैज्ञानिक इस खोज को जैव विविधता संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने वाला कदम भी मान रहे हैं, क्योंकि जंगलों के सफाये का मतलब होगा कई अनजानी प्रजातियों का हमेशा के लिए खो जाना।



























