Blocked Content Viewing Punishment: हाल ही में लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी का एक विवादित वीडियो चर्चा में रहा। केंद्र सरकार की ग्रीवैंस अपीलीय कमेटी (GAC) के निर्देशों के बाद गूगल ने उस वीडियो को भारतीय जनता के लिए ब्लॉक कर दिया। इस वीडियो पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा था। हालांकि, भौगोलिक सीमाओं के कारण यह वीडियो भारत के बाहर आसानी से देखा जा सकता है, और भारत में भी लोगों ने वीपीएन (VPN) का सहारा लेकर इसे देखा।
इस पूरे मामले ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया है: क्या भारत में सरकार या अदालत के आदेश से ब्लॉक किए गए किसी वेब पेज, वेबसाइट या वीडियो को वीपीएन के जरिए देखना गैर-कानूनी है? क्या इसके लिए आपको जेल हो सकती है? आइए भारतीय साइबर लॉ और नए दंड संहिता (BNS) के नजरिए से इसे समझते हैं।
सामान्य ब्लॉक कंटेंट देखना: क्या हैं नियम?
भारतीय कानूनी ढांचे के अनुसार, किसी आम नागरिक द्वारा अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर किसी ब्लॉक किए गए सामान्य वीडियो या आर्टिकल को सिर्फ देख लेना कोई ऐसा अपराध नहीं है जिसके लिए सीधे जेल भेजा जाए।
दरअसल, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 69A के तहत सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति या लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करवा सकती है। लेकिन यह आदेश सीधे तौर पर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP जैसे जियो, एयरटेल) और टेक प्लेटफॉर्म्स (जैसे गूगल, फेसबुक) पर लागू होता है, न कि आम दर्शक पर। यदि आप वीपीएन लगाकर वह कंटेंट देख रहे हैं, तो कानूनन आप पर कोई सीधा ब्लैकमेल या दंड का प्रावधान नहीं है, बशर्ते कि वह कंटेंट किसी गंभीर श्रेणी में न आता हो।
निजता का अधिकार बनाम अश्लीलता
अक्सर सरकार अश्लील वेबसाइटों को भी ब्लॉक करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ब्लॉक साइट से एडल्ट कंटेंट देखना जुर्म है? सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के मुताबिक, एक वयस्क व्यक्ति का अपने निजी कमरे में अपने डिवाइस पर एडल्ट कंटेंट देखना ‘निजता के अधिकार’ (Right to Privacy) के दायरे में आता है।
लेकिन यहां सीमाएं हैं। अगर आपने उस कंटेंट को किसी ग्रुप में शेयर किया, फॉरवर्ड किया या इंटरनेट पर दोबारा अपलोड किया, तो यह भारी अपराध बन जाता है। IT एक्ट की धारा 67 के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रसारित करने पर पहली बार गिरफ्तार होने पर 3 साल की कैद और 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। वहीं, अगर आपने इसे सार्वजनिक स्थान पर दिखाया, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 के तहत भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सबसे खतरनाक कैटेगरी: चाइल्ड पोर्नोग्राफी (CSAM)
यदि आप वीपीएन के जरिए कोई ऐसा ब्लॉक पेज खोल रहे हैं जिसमें नाबालिग बच्चों से जुड़ा यौन शोषण का कंटेंट है, तो यह सबसे भयानक और गैर-जमानती अपराध है।
इस मामले में सिर्फ ‘देखना’ भी काफी है। चाहे आपने उसे डाउनलोड किया हो या सिर्फ अपने डिवाइस की कैश मेमोरी में स्टोर होने दिया हो, दोनों ही स्थितियों में आप दोषी माने जाएंगे। POCSO एक्ट और IT एक्ट की धारा 67B के तहत इस जुर्म के लिए 5 से 7 साल तक की सख्त कारावास और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है। पुलिस इस मामले में बिना वारंट के आपके डिवाइस जब्त कर सकती है।
पाइरेसी और कॉपीराइट उल्लंघन
कई बार मूवी या वेब सीरीज लीक होने पर सरकार उन पाइरेटेड वेबसाइटों (जैसे टॉरेंट साइट्स) को ब्लॉक कर देती है। एक आम भ्रम यह है कि ब्लॉक साइट से मूवी स्ट्रीम करने पर जेल होगी। तकनीकी रूप से, किसी ब्लॉक साइट पर जाकर फिल्म ऑनलाइन देख लेना (स्ट्रीमिंग) और कानूनी रूप से सफाई देना मुश्किल होता है, लेकिन आम तौर पर इस पर अभियोजन नहीं किया जाता।
हालांकि, अगर आपने टॉरेंट (Torrent) का इस्तेमाल करके उस मूवी को डाउनलोड किया और आपका सिस्टम ‘सीडिंग’ (Seeding) कर रहा है (यानी दूसरे लोग भी आपके कनेक्शन से उसे डाउनलोड कर रहे हैं), तो यह सीधा कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन है। इसके लिए प्लेटफॉर्म आपको नोटिस भेज सकते हैं और कानूनी चेतावनी दी जा सकती है।
राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी कंटेंट
यदि कोई वेबसाइट या वीडियो भारत की संप्रभुता, अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाला है, या फिर वह साइबर आतंकवाद, नफरत फैलाने या सरकार के खिलाफ हिंसा को भड़काने वाला है, तो उसे देखना और उसे आगे बढ़ाना घातक है। BNS के तहत राजद्रोह, साइबर आतंकवाद और देशद्रोह जैसी धाराएं लागू हो सकती हैं। अगर पुलिस यह साबित कर दे कि आप न केवल देख रहे थे, बल्कि उस कंटेंट को जानबूझकर फैलाकर दंगे या आतंकवाद का माहौल बनाने की साजिश का हिस्सा थे, तो आपको कई सालों की जेल हो सकती है।

























