भवेश कुमार
मुजफ्फरपुर । बिहार के मुजफ्फरपुर में करीब 38 साल पुराने 20 हजार रुपये के घोटाले के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मुजफ्फरपुर की विशेष निगरानी कोर्ट ने घोड़ासाहन के त्रिवेणी नहर घोटाला मामले में तत्कालीन सहायक अभियंता और अब 76 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर सुरेंद्रनाथ वर्मा को दोषी करार देते हुए 4 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर उनकी सजा बढ़ सकती है।
मामला वर्ष 1987 का है। घोड़ासाहन स्थित त्रिवेणी नहर की मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि में गड़बड़ी का आरोप लगा था। निगरानी ब्यूरो की जांच में सामने आया कि नहर की मरम्मत के लिए ठेकेदार को वास्तविक काम से काफी अधिक राशि का भुगतान किया गया।
जून 1987 में तत्कालीन निगरानी इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह विनीत ने 20 हजार 925 रुपये के घोटाले के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में तत्कालीन सहायक अभियंता सुरेंद्रनाथ वर्मा समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया था।
निगरानी ब्यूरो की जांच के मुताबिक ठेकेदार समी खान ने त्रिवेणी नहर की मरम्मत में महज 1031 रुपये का काम कराया था। इसके बावजूद कथित तौर पर घूस लेकर उसे 21 हजार 956 रुपये का भुगतान किया गया।
इस तरह सरकारी राशि में 20 हजार 925 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई। मामले की जांच पूरी होने के बाद निगरानी ब्यूरो ने चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
त्रिवेणी नहर घोटाले को लेकर निगरानी ब्यूरो ने अलग-अलग मामलों में 13 एफआईआर दर्ज की थीं। इन्हीं में से एक एफआईआर जून 1987 में 20 हजार 925 रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर दर्ज की गई थी।
इस मामले में सुरेंद्रनाथ वर्मा के अलावा तत्कालीन कार्यपालक अभियंता रामचंद्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन जूनियर इंजीनियर नवल किशोर प्रसाद सिंह और ठेकेदार समी खान को आरोपी बनाया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता रामचंद्र प्रसाद सिंह, जूनियर इंजीनियर नवल किशोर प्रसाद सिंह और ठेकेदार समी खान की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई।
इसके बाद मामले में जीवित बचे तत्कालीन सहायक अभियंता सुरेंद्रनाथ वर्मा के खिलाफ ट्रायल जारी रहा। अब विशेष निगरानी कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई है और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
करीब चार दशक तक चले इस मामले में आखिरकार कोर्ट का फैसला आया है। महज 20 हजार 925 रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में 76 वर्षीय सेवानिवृत्त इंजीनियर को सजा सुनाई गई है। यह मामला लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया और निगरानी जांच के कारण चर्चा में रहा।


























