स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी पार्टी पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर कांग्रेस में थोड़ी भी शर्म बची है, तो उसे देश की जनता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से माफी मांगनी चाहिए। अमित शाह का यह बयान राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आया, जहां उन्होंने कांग्रेस को ‘वोट बैंक की राजनीति’ का आरोपित करते हुए इस मुद्दे को देशभक्ति से जोड़ दिया।
कांग्रेस मुख्यालय में क्या हुआ था?
दरअसल, 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय (AICC) पर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद जब पूरा वंदे मातरम गाया जा रहा था, तभी एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में सोनिया गांधी कुछ इशारे करते हुए नजर आ रही थीं।
भाजपा के नेताओं और सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम गाने को बीच में ही रोकने का इशारा किया था। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए सफाई दी कि गान पूरा गाया गया था और सोनिया जी का इशारा कुछ और था। लेकिन इस सफाई के बावजूद भाजपा ने इस मुद्दे को जबरदस्त तरीके से उठाया।
अमित शाह का चित्तौड़गढ़ से काड़ा हमला
इसी पृष्ठभूमि में अमित शाह ने चित्तौड़गढ़ की जनसभा में कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था। गान के बीच में ही कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री सोनिया गांधी ने अध्यक्ष खरगे को गाना बंद करने का इशारा किया। पूरा देश टीवी पर यह दृश्य देखता रह गया।” शाह ने आगे कहा, “80 साल बाद जब बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का यह अमर गान फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, तब भी यह गान सोनिया गांधी को रास नहीं आता।”
‘शर्म बची है तो माफी मांगें कांग्रेस’
अमित शाह ने अपने संबोधन में भावनात्मक लहजा अपनाते हुए कहा, “सोनिया जी, 140 करोड़ जनता आपको देख रही है। आपके द्वारा किया गया यह पाप इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई स्वप्न में भी कैसे सोच सकता है कि वंदे मातरम का गान अधूरा छोड़ दिया जाए?” गृहमंत्री ने सीधे तौर पर माफी की मांग उठाई—”कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए और अगर उनमें थोड़ी भी शर्म बची है, तो उन्हें दोनों हाथ जोड़कर बंकिम बाबू और देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।”
वोट बैंक की राजनीति और वंदे मातरम का इतिहास
अमित शाह ने अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए ऐतिहासिक संदर्भों को सामने रखा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने सिर्फ अपने वोट बैंक के लालच में वंदे मातरम को भुला दिया था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की उस अमर कृति के दो शब्द—’वंदे मातरम’ कहते हुए इस देश के हजारों-लाखों क्रांतिकारी फांसी के फंदे पर झूल गए थे।”
उन्होंने यह भी बताया कि वंदे मातरम के प्रकाश का यह 150वां वर्ष है। शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने इस गान को फिर से एक नया आयुष्य देने का काम किया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कांग्रेस का पक्ष
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस का स्टैंड साफ है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि भाजपा नीत सरकार की विफलताओं—जैसे बेरोजगारी, महंगाई और सीमा पर सुरक्षा के मुद्दों—से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बेहूदा मुद्दे उठा रही है। कांग्रेस का दावा है कि सोनिया गांधी ने गाना रोकने का कोई इशारा नहीं किया था, बल्कि गान समाप्त होने पर उन्होंने माइक बंद करने या आगे की प्रक्रिया के लिए इशारा किया था।
हालांकि, राजनीति के अखाड़े में तथ्यों से ज्यादा अहमियत ‘नैरेटिव’ होती है। भाजपा के लिए ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे उसकी विचारधारा का केंद्र बिंदु रहे हैं। अमित शाह के इस तीखे हमले से साफ है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा कांग्रेस को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर घेरने का कोई मौका नहीं चूकना चाहती। वहीं, कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह इस तरह के आरोपों से खुद को बचाते हुए जनता के मुद्दों पर बात को वापस लाए।

























