Global Stock Market Crash: दुनियाभर के शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स की नींद उड़ा दी है। अमेरिका से लेकर जापान और हांगकांग तक मार्केट में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दामों में भी आग लग गई है और यह $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। ग्लोबल सेंटीमेंट के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार (Sensex-Nifty) में भी भारी गिरावट के साथ खुलने के संकेत हैं।
अमेरिकी बाजारों से शुरू हुआ डर का दौर
मंगलवार रात को अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि डाओ जोंस (Dow Jones) 340 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ, लेकिन निवेशकों की नजरें फ्यूचर्स मार्केट पर थीं। डाओ फ्यूचर्स (Dow Futures) में 323 अंक की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, S&P 500 इंडेक्स भी लाल निशान (Red Zone) के साथ बंद हुआ, जिसने एशियाई बाजारों के लिए नकारात्मक वातावरण तैयार कर दिया।
एशियाई बाजारों में खून-खराबा
अमेरिकी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर गुरुवार को एशियाई बाजारों पर बेहद भयावह रूप में देखने को मिला। जापान का निक्केई (Nikkei) सूचकांक खुलते ही धड़ाम से गिर गया और 650 से अधिक अंक लुढ़ककर 58,952 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग का हैंगसेंग (Hang Seng) इंडेक्स भी करीब 300 अंक की गिरावट के साथ 25,889 पर ट्रेड कर रहा था। साउथ कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 1 प्रतिशत से अधिक टूटा। यूरोपीय बाजारों के प्रमुख सूचकांक जैसे CAC, DAX और FTSE-100 भी बुरी तरह प्रभावित नजर आ रहे हैं।
भारतीय बाजार का रुख कैसा रहेगा?
भारतीय शेयर बाजार ने बीते कारोबारी दिन (बुधवार) को भी निवेशकों की परेशानी बढ़ाई थी। दिनभर लगातार बिकवाली के दबाव में बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) 756 अंक की भारी गिरावट लेकर 78,516 के स्तर पर बंद हुआ (पिछले बंद स्तर 79,273)। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 198 अंक फिसलकर 24,378 पर क्लोज हुआ।
गुरुवार को भारतीय बाजार के लिए तस्वीर और भी मुश्किल नजर आ रही है। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख संकेतक माने जाने वाला ‘गिफ्ट निफ्टी’ (Gift Nifty) ओपनिंग के साथ ही लाल निशान पर कारोबार कर रहा है। खबर लिखे जाने तक गिफ्ट निफ्टी 170 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था, जो सेंसेक्स और निफ्टी में गुरुवार को तेजी से गिरावट (Gap-down opening) का साफ संकेत दे रहा है।
क्रूड ऑयल का $100 पार होना भारत के लिए ‘डबल व्हामी’
मार्केट की चिंता को और बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल का तेजी से $100 प्रति बैरल के पार पहुंचना है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, यह स्थिति परेशान करने वाली है। क्रूड ऑयल महंगा होने से भारत का व्यापार घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने का खतरा है, साथ ही महंगाई (Inflation) भी बढ़ सकती है। इस स्थिति में आरबीआई (RBI) ब्याज दरों में कटौती करने से पहले कई बार सोचेगा, जो शेयर बाजार के लिए किसी बुरी खबर से कम नहीं है।


























