ऋषि तिवारी
दक्षता वर्ग के सप्तम दिवस के तृतीय सत्र में विद्या भारती के सक्रिय सदस्य डॉ. विशेष कुमार गुप्ता जी ने बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलाव, संयुक्त परिवार के महत्व और पंचपदी शिक्षा की उपयोगिता पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के व्यवहार में बदलाव के पीछे कई सामाजिक कारण हैं, जिनमें एकल परिवार व्यवस्था भी एक प्रमुख कारण है।
डॉ. विशेष कुमार गुप्ता ने विभिन्न कालखंडों में बच्चों के व्यवहार में आए परिवर्तन को समझाते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों को परिवार के बुजुर्गों से मिलने वाला अनुभव और ज्ञान सीमित हो गया है। संयुक्त परिवार में बच्चे दादा-दादी, चाचा-चाची और माता-पिता के सान्निध्य में रहकर जीवन के अनेक अनुभव एवं संस्कार सहज रूप से प्राप्त करते थे। इससे उनके ज्ञान और व्यवहारिक समझ का विकास होता था।
बच्चों से संवाद करना आवश्यक
उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उनके साथ नियमित रूप से संवाद करना अत्यंत आवश्यक है। बच्चों की जिज्ञासाओं को समझना, उनके प्रश्नों का उत्तर देना और उनके विचारों को सुनना शिक्षक एवं अभिभावक दोनों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि पंचपदी शिक्षा के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी देना शिक्षक का परम कर्तव्य है। शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से हटकर भी कुछ नया सीखने और करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
शिक्षा में रचनात्मकता और संवाद पर जोर
डॉ. गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों के बीच चर्चा, संवाद और सामूहिक गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए। इससे उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामाजिक भावना का विकास होता है। भैया-बहिनों के साथ विचारों का आदान-प्रदान भी सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाता है।
उन्होंने Learning to Learn, Learning to Do और Learning to Live Together जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशलों के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों को सीखने, कार्य करने, रचनात्मक सोच विकसित करने और समाज के साथ मिलकर रहने के लिए सक्षम बनाना भी है।
























