Bihar Cabinet: बिहार में सम्राट चौधरी की अगुवाई वाले एनडीए सरकार का गुरुवार को दरबारी ढाक के बाद मंत्रिमंडल विस्तार हो गया। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने 32 नए नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस विस्तार के बाद सीएम और दोनों डिप्टी सीएम को मिलाकर कुल मंत्रिमंडल का आकार 35 सदस्यों का हो गया है।
लेकिन इस कैबिनेट विस्तार ने सबसे ज्यादा चर्चा एक खास बात को लेकर जन्म दी है— ‘सन ऑफ सरकार’। जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की कवायद में एनडीए ने ऐसे चेहरों पर दांव लगाया है, जिनके पीछे किसी न किसी राजनीतिक घराने की विरासत खड़ी है।
तीन ऐसे मंत्री जिनके पिता रह चुके हैं बिहार के मुख्यमंत्री
सम्राट कैबिनेट का सबसे चर्चित पहलू यह है कि इसमें तीन ऐसे नेता शामिल हैं, जिनके पिता बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान रह चुके हैं:
- निशांत कुमार: 15 साल तक बिहार के सीएम रहे नीतीश कुमार के पुत्र। उन्होंने पहली बार कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है।
- नीतीश मिश्रा: तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र।
- संतोष कुमार सुमन: पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र। नीतीश सरकार में भी मंत्री रहे संतोष ने इस बार भी अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली है।
सीएम और डिप्टी सीएम भी विरासत के उत्तराधिकारी
सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेताओं की कहानी भी कुछ अलग नहीं है।
- सम्राट चौधरी (मुख्यमंत्री): कांग्रेस से लेकर आरजेडी तक का सफर तय करने वाले दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी के पुत्र। सम्राट ने पिता के रसूख को नई ऊंचाई दी है।
- विजय कुमार चौधरी (डिप्टी सीएम, जेडीयू): पुराने सोशलिस्ट नेता और विधायक रहे जगदीश प्रसाद चौधरी के पुत्र। वे बिहार सरकार में ‘संकटमोचक’ की भूमिका में माने जाते हैं।
मंत्रियों के ‘मंत्री’ पुत्र और पुत्रियां
कैबिनेट में ऐसे चेहरे भी हैं जिनके पिता या परिवार दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं:
- अशोक चौधरी: बिहार कांग्रेस के दिग्गज और कई बार मंत्री रहे महावीर चौधरी के पुत्र। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अशोक एक बार फिर मंत्री बने हैं।
- श्रेयसी सिंह: पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह और पुतुल कुमारी की पुत्री। खेल प्रतियोगिताओं से सियासत में आई श्रेयसी लगातार दूसरी बार मंत्री बनी हैं।
- दीपक प्रकाश: राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र।
- सुनील कुमार: पूर्व मंत्री चंद्रिका राम के पुत्र।
- रमा निषाद: पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद की बहू और पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी।
- लेशी सिंह: पूर्व समता पार्टी नेता भूटान सिंह की पत्नी।
‘सरनेम’ है सियासत का लॉन्चपैड
विपक्ष इसे ‘परिवारवाद’ का नाम दे रहा है, तो समर्थकों का मानना है कि ये नेता केवल अपने पिता के नाम पर नहीं, बल्कि अपनी योग्यता और जनता के वोट से यहां तक पहुंचे हैं।
हालांकि, बिहार की राजनीतिक विश्लेषण करें तो यह साफ है कि यहां कोई भी बड़ा ‘सरनेम’ एक लॉन्चपैड की तरह काम करता है। जहां एक आम कार्यकर्ता को टिकट तक पहुंचने में दशकों का संघर्ष करना पड़ता है, वहीं इन ‘बेटों और बेटियों’ के लिए सत्ता का रास्ता कुछ आसान होता है। सम्राट चौधरी कैबिनेट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बिहार की सियासत में चेहरा भले ही नया हो, लेकिन ‘घराना’ वही पुराना है।


























