शेयर बाजार की शुरुआत आज मिली-जुली रही, जहां निवेशकों की नजरें वैश्विक आर्थिक संकेतकों और जियोलिटिकल घटनाक्रम पर टिकी हैं। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही संकेत दिए।
बीएसई का 30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स शुरुआती मिनटों में 240 अंक की बढ़ोतरी के साथ 74,596 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई का 50 स्टॉक्स वाला सूचकांक निफ्टी शुरुआती कारोबार में 16 अंक नीचे गिरकर 23,330 के स्तर पर खुला। हालांकि, तेजी का सिलसिला कुछ ही मिनटों में दिखा, जब सेंसेक्स 301 अंक ऊपर पहुंचकर 74,596 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 12 अंक ऊपर 23,358 के स्तर पर ट्रेड करने लगा।
आज की बाजार की शुरुआत में मिली-जुली रफ्तार
हालांकि, बाजार की शुरुआत के तुरंत बाद ही मिले-जुले संकेत मिले। बीएसई सेंसेक्स ने तेजी का रुख अपनाते हुए 301 अंक की बढ़त दर्ज की, वहीं एनएसई निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिली। इस शुरुआती रुझान का मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां हैं। ग्लोबल मार्केट्स में मिलेजुले संकेत देखने को मिल रहे हैं, जिसमें एशियाई बाजारों में कारोबार मिश्रित रहा, जबकि अमेरिकी फ्यूचर मार्केट्स में मामूली तेजी का माहौल बना रहा।
ग्लोबल संकेत और बाज़ार पर प्रभाव
एशियाई बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। दक्षिण कोरियाई कॉस्पी सूचकांक 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था, वहीं ताइवान का TAIEX भी 0.54 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार कर रहा था। इस बीच, दक्षिण कोरियाई प्रमुख टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को समर्थन दिया। वहीं, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक भी हरे निशान पर बंद हुए।
अमेरिकी बाजारों में भी हालात कुछ बेहतर नजर आए। डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज तीसरे सप्ताह लगातार गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसमें करीब 1.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। एसएंडपी 500 सूचकांक मामूली गिरावट के साथ 0.1 फीसदी नीचे रहा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.7 फीसदी ऊपर रहा। अमेरिकी वायदा बाजार में सोमवार शाम को मामूली तेजी देखी गई, जिसमें एसएंडपी 500 और नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में क्रमशः 0.23 फीसदी और 0.27 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
मध्य पूर्व में तनाव के बावजूद, सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में शुरुआती गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.78 फीसदी गिरकर 103.06 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, वहीं WTI क्रूड भी 0.89 फीसदी गिरकर 99.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह नरमी बाजार की नजरों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऊर्जा कीमतें महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर असर डालती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर साबित हो सकती हैं। अगर तेल की कीमतें ऊंची स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ने और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत हो सकता है।
घरेलू बाजार का हाल और निवेशकों का रुख
पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति के संकेतों ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ाई। सेंसेक्स ने सप्ताहभर में 0.65 फीसदी की गिरावट के साथ 74,294 अंक पर बंद किया, जबकि निफ्टी 50 में 0.22 फीसदी की गिरावट के साथ 23,346 अंक रहा। यह निफ्टी 50 का लगातार छठा सप्ताह गिरावट का रहा, जो 2020 के बाद सबसे लंबी गिरावट का दौर माना जा रहा है।

हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में बाजार में कुछ रिकवरी जरूर देखने को मिली, लेकिन निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क है। मौजूदा हालात में, निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतकों और जियोलिटिकल घटनाओं पर नजरें गढ़े हुए हैं, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
आगामी सप्ताह के लिए बाजार का रुख
आगे के दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक डेटा, कच्चे तेल की कीमतें, और मध्य पूर्व की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें ऊंची स्तर पर बनी रहती हैं और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रहती है, तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं।
साथ ही, घरेलू आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंक की नीति पर भी निवेशकों की नजरें टिकी हैं। यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं रहता है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ सकती है, जो बाजार की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।

























