सांसद राउत के पत्र से हिल गई FDA

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर विभाग के अधिकारियों पर लाइसेंस निलंबन की धमकी देकर होटल और क्विक-कॉमर्स कंपनियों से वसूली करने का आरोप लगाया है। जानिए राउत की 5 बड़ी मांगें।

संजय राउत ने खोला FDA का वसूली रैकेट

HIGHLIGHTS

  • होटलियों से वसूली का अड्डा बना FDA मुख्यालय
  • 17 लाख में बिका क्विक-कॉमर्स कंपनी का लाइसेंस
  • तुकाराम मुंढे का डर बना वसूली का हथियार
  • लाइसेंस की धमकी देकर वसूल रहे मोटा पैसा

महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को तीन पेज का एक पत्र लिखा है, जिसमें विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर होटल, रेस्तरां और क्विक-कॉमर्स कंपनियों को धमकाकर पैसे वसूलने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

राउत ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि जिन प्रतिष्ठानों में मिलावटी सामान बिकता है या साफ-सफाई की पूरी तरह कमी है, उनके खिलाफ विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई सराहनीय है। लेकिन उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर एक चौंकाने वाला दावा भी किया है — कि विभाग के कुछ ही अधिकारी इस अभियान का इस्तेमाल वसूली का हथियार बनाकर करोबारियों से मोटी रकम हासिल कर रहे हैं।

FDA के अधिकारियों पर लगाए गए मुख्य आरोप क्या हैं?

सांसद संजय राउत के पत्र के मुताबिक, FDA के पदनिर्देशित अधिकारी (DO), सहायक आयुक्त और खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) खुलेआम होटल और रेस्तरां संचालकों को लाइसेंस निलंबित करने की धमकी दे रहे हैं और उनसे बड़े पैमाने पर पैसे की मांग कर रहे हैं।

राउत का आरोप है कि ब्लैकमेलिंग करके वसूली करने का यह रैकेट पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ चुका है। पत्र में लिखा गया है — “ऐसा कहा जाता है कि मुंढे के FDA कमिश्नर बनने से पहले क्लोजिंग नोटिस की दर 10 से 12 हजार रुपये थी, लेकिन अब मुंढे का नाम और डर दिखाकर यही रेट 75 हजार से लेकर 2 लाख रुपये प्रति नोटिस तक पहुंच गया है।” राउत ने इसे ‘दोहरी मार’ करार दिया है, जिसकी वजह से महाराष्ट्र के हजारों होटल व्यवसायी परेशान हैं।

बांद्रा मुख्यालय और ठाणे कार्यालय बना ‘वसूली का अड्डा’?

पत्र में सबसे बड़ा दावा यह किया गया है कि FDA का बांद्रा स्थित मुख्यालय और ठाणे कार्यालय की तीसरी मंजिल अब वसूली का मुख्य केंद्र बन चुकी है। राउत के अनुसार, वहां बैठे अधिकारी बिना किसी डर के खुलेआम करोबारियों से पैसे ले रहे हैं।

यह सिलसिला सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है। राउत ने बताया कि नागपुर, पुणे, सोलापुर, वर्धा और छत्रपति संभाजीनगर से भी कई व्यवसायी उनके पास शिकायतें लेकर पहुंचे हैं। इन शिकायतों में बढ़ी हुई क्लोजिंग नोटिस की संख्या और कथित वसूली का जिक्र मिलता है।

कानून को किया जा रहा है बायपास — राउत का दावा

सांसद ने अपने पत्र में FDA से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि नियमानुसार ‘नोटिस-हियरिंग-सस्पेंशन’ की पूरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए, लेकिन अधिकारी सीधे लाइसेंस रद्द करने की धमकी देकर पैसे की मांग कर रहे हैं।

पत्र में ठाणे की एक क्विक-कॉमर्स कंपनी का भी उल्लेख किया गया है। राउत ने दावा किया कि इस कंपनी को अपना लाइसेंस वापस दिलाने के लिए करीब 17 से 18 लाख रुपये देने पड़े। इसके अलावा उन्होंने ठाणे के DO की ‘कपल’ के जरिए हो रही कथित वसूली की बात भी उठाई है।

संजय राउत की FDA से 5 बड़ी मांगें

वसूली के इन आरोपों पर त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए राउत ने कमिश्नर तुकाराम मुंढे के सामने 5 अहम सुझाव रखे हैं:

  1. निष्पक्ष जांच — बांद्रा, ठाणे और अन्य विभागीय कार्यालयों में ‘क्लोजिंग नोटिस रेट कार्ड’ से जुड़े आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की जाए।
  2. छापेमारी का सत्यापन — ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर होने वाली हर छापेमारी से पहले उसकी पुष्टि अनिवार्य हो और फर्जी शिकायतें दर्ज करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो।
  3. डिसिप्लिनरी एक्शन — जो अधिकारी नोटिस-सुनवाई-निलंबन की कानूनी प्रक्रिया को बायपास करते हैं, उनके खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की जाए।
  4. स्वतंत्र जांच — ठाणे DO से जुड़े आरोपों और क्विक-कॉमर्स कंपनी से कथित 17-18 लाख रुपये वसूली की मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  5.  पारदर्शिता — हर लाइसेंस निलंबन और बहाली का पूरा विवरण — कारण, तारीख और सुनवाई की जानकारी — सार्वजनिक डोमेन पर प्रकाशित किया जाए।

क्या है पूरा बैकग्राउंड?

पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र FDA राज्यभर में मिलावट और गंदगी फैलाने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ जबरदस्त अभियान चला रहा है। मुंबई समेत कई शहरों में सैकड़ों होटलों, जूस सेंटर और फूड जॉइंट्स के लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए हैं। जहां एक ओर यह अभियान उपभोक्ताओं की सेहत के लिए उठाया गया कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यवसायियों की ओर से उत्पीड़न की शिकायतें भी उठ रही हैं। संजय राउत का यह पत्र अब इस बहस को सीधे राजनीतिक अखाड़े में ले गया है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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