संध्या समय न्यूज
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य की सियासत में गरमाहट बढ़ गई है। वर्तमान में इन पांच सीटों में से तीन सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास हैं, जबकि दो सीटें विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के खाते में हैं। हालांकि, इस बार अंकगणित और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सभी की नज़र पांचवीं सीट पर टिकी है, जहां एक ‘बड़ा खेल’ होने की संभावना बनी हुई है।
जीत का गणित और NDA का दबदबा
बिहार विधानसभा के मौजूदा अंकगणित के मुताबिक, एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। NDA के पास वर्तमान में 202 विधायक हैं। इस ताकत के साथ NDA आसानी से चार सीटों पर कब्जा जमा सकता है। चार सीटों के लिए आवश्यक 164 वोटों के बाद NDA के पास 38 विधायक बचते हैं। इस हिसाब से, पांचवीं सीट जीतने के लिए उन्हें महज 3 विधायकों की जरूरत है।
वहीं, दूसरी तरफ महागठबंधन की स्थिति कमजोर नजर आ रही है। RJD के पास केवल 25 विधायक हैं, जबकि पूरे महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए महागठबंधन को 6 विधायकों की और जरूरत है। ऐसे में, NDA की सफलता का आसान रास्ता नजर आ रहा है।
AIMIM और BSP की निर्णायक भूमिका
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पांचवीं सीट की जंग में ‘किंगमेकर’ की भूमिका असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और मायावती की BSP निभा सकती हैं। बिहार में AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक हैं। अगर NDA को AIMIM का समर्थन मिल जाता है, तो पांचवीं सीट पर उनकी जीत पक्की हो सकती है। वहीं, महागठबंधन के लिए भी AIMIM का समर्थन ही एकमात्र उम्मीद है, लेकिन अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सीटों का बंटवारा: JDU और BJP का दबदबा
पांच सीटों में से दो-दो सीटों पर JDU और BJP अपना दावा पक्का मान रहे हैं। JDU की दो सीटें खाली हो रही हैं—एक केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र) और दूसरी राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की। चर्चा है कि रामनाथ ठाकुर को दोबारा टिकट मिल सकता है, लेकिन हरिवंश नारायण सिंह के साथ पार्टी नए चेहरे को मौका दे सकती है। इसके लिए मनीष वर्मा का नाम सबसे ऊपर चर्चा में है। BJP के लिए भी दो सीटें आरक्षित मानी जा रही हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ-साथ भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और पार्टी के नेता पवन सिंह को राज्यसभा भेजने की चर्चा तेज है।
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पांचवीं सीट: ‘एक अनार सौ बीमार’
सबसे दिलचस्प मोड़ पांचवीं सीट के लिए है, जहां NDA के भीतर ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली स्थिति है। NDA के छोटे-बड़े सहयोगी इस सीट के लिए हाथ पैर मार रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने साफ शब्दों में कह दिया है कि लोकसभा चुनाव के समय BJP ने उन्हें राज्यसभा सीट देने का वादा किया था। चिराग पासवान भी इस सीट के दावेदार हैं। उनके दावे के पीछे तर्क है कि उनके पास 19 विधायकों का समर्थन है, जो गणित के मुताबिक उन्हें मजबूत पक्ष बनाता है। तीसरा दावेदार उपेन्द्र कुशवाहा हैं, जो लंबे समय से इस मौके का इंतजार कर रहे हैं। JDU की मानसिकता यह भी है कि अगर स्थिति अनुकूल रही तो वह पांचों सीटें NDA के खाते में देखना चाहती है, जिससे सहयोगियों के बीच संतुलन बनाने का काम भी मुश्किल हो गया है।
महागठबंधन के लिए चुनौती
महागठबंधन के लिए स्थिति भारी है। RJD की दो सीटें (अमरेंद्रधारी सिंह और प्रेमचन्द्र गुप्ता) खाली हो रही हैं। विधायकों की कमी के चलते इस बार उनके लिए एक भी सीट जीतना आसान नहीं है। उन्हें बाहरी समर्थन के लिए तरसना पड़ सकता है।
























