कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर विपक्ष का विरोध तेज हो गया है। इसी सिलसिले में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज मंगलवार को अपने आवास पर इंडिया गठबंधन के नेताओं, विपक्षी सांसदों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को चाय पर बुलाया। बैठक का मकसद आंदोलन को आगे बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर साझा रणनीति बनाने पर चर्चा करना था।
बता दें कि बैठक के बाद विपक्षी नेताओं ने मीडिया से बातचीत की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बीते चार दिनों में इंडिया गठबंधन की पहलों को व्यापक समर्थन मिला है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने जनता से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाया है और दिल्ली में युवाओं तथा नागरिकों का इस तरह अपनी पहल पर जुटना खास बात है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि अब लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित वोट चोरी की योजना को उजागर करने के लिए तैयार हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?
राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर हुई बैठक में कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और मनोज झा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक, आनंद भदौरिया और मोहिबुल्लाह नदवी शामिल थे।
बैठक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एम. ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा और पी. संतोष कुमार, सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की प्रमुख नेहा बोरा भी मौजूद थीं।

कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के अलावा के. सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, शशि थरूर और पवन खेड़ा ने बैठक में हिस्सा लिया। अलग-अलग विपक्षी दलों और संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को आंदोलन के लिए साझा मंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
बैठक से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर हिंदी में पोस्ट कर नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों को चाय पर आमंत्रित करने की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए चल रहे जन-आंदोलन में सभी साथ हैं और यह आंदोलन जारी रहेगा।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि चाय पर चर्चा के बाद सभी लोग मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे। उन्होंने अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों को एक साझा आंदोलन का हिस्सा बताया। बैठक के एजेंडे में कथित वोट चोरी के खिलाफ आगे के कदम और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर संयुक्त रणनीति पर चर्चा शामिल होने की बात कही गई।
लोकतंत्र मार्च और सुप्रीम कोर्ट में याचिका
यह बैठक ऐसे समय हुई जब वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर को लेकर विपक्ष के विरोध ने न्यायिक प्रक्रिया का रुख किया है। इससे एक दिन पहले विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों ने दिल्ली में लोकतंत्र मार्च निकाला था। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई।
मार्च में लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, डी. राजा, एम. ए. बेबी, तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले सहित कई नेता शामिल हुए। बड़ी संख्या में लोग झंडे और पोस्टर लेकर सेंट्रल दिल्ली के कनॉट प्लेस में जुटे।
प्रदर्शनकारियों ने भगवान दास रोड पर लगाए गए एक बैरिकेड को पार किया, लेकिन आगे दूसरे बैरिकेड पर उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद इंडिया गठबंधन के वरिष्ठ नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर की।
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और इससे मतदाता सूची की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। हालांकि, ये विपक्षी दलों के आरोप हैं; मामले पर अदालत और संबंधित संस्थाओं की प्रक्रिया आगे जारी है।
मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात का अनुरोध क्यों ठुकराया?
इस घटनाक्रम से पहले विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का अनुरोध किया था। मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए अनुरोध स्वीकार नहीं किया कि मामला अदालत में विचाराधीन है। न्यायिक प्रक्रिया के बीच विपक्षी दल अब सार्वजनिक अभियान और अदालत में दायर याचिका—दोनों के जरिए अपनी मांग उठा रहे हैं।
विपक्ष की आगे की रणनीति पर नजर
राहुल गांधी के आवास पर हुई चाय बैठक को विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने आंदोलन को राजनीतिक दलों से आगे व्यापक नागरिक मंच देने का संकेत भी दिया।
विपक्ष के सामने अब दो प्रमुख मुद्दे हैं—एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों का समाधान और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग। गठबंधन के नेता इन मुद्दों पर संयुक्त रूप से आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विपक्ष आंदोलन को किन कार्यक्रमों के जरिए जारी रखता है और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
फिलहाल, राहुल गांधी की चाय पर चर्चा और दिल्ली में हुए लोकतंत्र मार्च ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियों को फिर से केंद्र में ला दिया है। विपक्षी दल निष्पक्ष मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि इस विवाद का अगला अहम पड़ाव अदालत में होने वाली सुनवाई और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया होगी।


























