ईरान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में इन दिनों एक ऐसा सनसनीखेज सवाल छाया हुआ है जिसका जवाब शायद ही किसी के पास हो—आखिरकार ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई कहां हैं? पिता अली खामेनेई के निधन के बाद सत्ता की कमान संभालने वाले मोजतबा लगातार पर्दे के पीछे ही रहे हैं। इसी गहरे रहस्य के बीच, इजरायली मीडिया द्वारा उनकी मौत या बेहद नाजुक स्वास्थ्य को लेकर लगातार दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, तेहरान का प्रचार मशीन अब इन अफवाहों को कुचलने के लिए एक नई रणनीति पर उतरा है, जिसका केंद्र ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ एक बंद कमरे में हुई ‘इमरजेंसी मीटिंग’ है।
इमरजेंसी मीटिंग में क्या हुई चर्चा?
जब सोशल मीडिया पर मोजतबा खामेनेई की गैर-मौजूदगी के सवाल उठने लगे और इजरायली अखबारों ने उनके निधन की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित कीं, तब ईरान के सरकारी प्रसारण माध्यमों और मोजतबा के आधिकारिक ट्विटर (X) हैंडल से एक बयान जारी किया गया। इस बयान में दावा किया गया कि मोजतबा ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ एक अहम बैठक की है।
सूत्रों के अनुसार, इस गुप्त मीटिंग का एजेंडा काफी गंभीर था। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच अमेरिका और इजरायल की बढ़ती सैन्य चुनौतियों का जवाब देने के लिए ईरानी सशस्त्र बलों की वर्तमान तैयारी और आगामी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन सिर्फ सैन्य मामलों तक ही बात सीमित नहीं रही; युद्ध के बादलों के कारण ईरान की डगमगाती अर्थव्यवस्था भी इस मीटिंग का प्रमुख हिस्सा रही।
समझा जाता है कि मोजतबा ने पेजेशकियन सरकार को निर्देश दिए हैं कि युद्ध-जैसे हालात में आम ईरानी नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा नहीं रखा जाना चाहिए। खासकर रोजमर्रा की जरूरतमंद चीजों की आपूर्ति लाइन, खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और लोगों की आजीविका को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
अपने पिता के जनाजे में भी शामिल नहीं हुए मोजतबा
मोजतबा खामेनेई को लेकर अटकलों की शुरुआत तब हुई, जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई। पिता के जाने के बाद मोजतबा को ईरान का अगला सर्वोच्च नेता घोषित किया गया, लेकिन तब से लेकर आज तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा नहीं दिखाया है।
यह वो पद है जहां नेता की दृश्यता देश के मनोबल से सीधे जुड़ी होती है, लेकिन मोजतबा ने अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शिरकत नहीं की, जो ईरानी राजनीति में एक अभूतपूर्व और हैरान करने वाला कदम माना गया। हालांकि, उन्होंने कुछ लिखित फरमान और बयान जरूर जारी किए हैं, जिससे सरकारी तंत्र चलाने की कोशिश की जा रही है।
इजरायली मीडिया के दावे और चोट की अफवाहें
मोजतबा की इस ‘अदृश्यता’ का फायदा ईरान के विरोधी खेमों को मिला। इजरायली मीडिया ने लगातार दावा किया कि 28 फरवरी के उसी हमले में मोजतबा खामेनेई भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सोशल मीडिया और विदेशी खुफिया एजेंसियों से जुड़े अनौपचारिक सूत्रों ने तरह-तरह की कहानियां फैलाईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हमले में उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया था और वे प्लास्टिक सर्जरी करा रहे हैं। वहीं, कुछ अन्य खबरों में यहां तक कहा गया कि उनका एक पैर कट गया है और उन्हें प्रोस्थेटिक (कृत्रिम) पैर लगवाना पड़ा है। बीते सप्ताह इजरायली अखबारों ने इन अफवाहों को आगे बढ़ाते हुए सीधा दावा कर दिया कि मोजतबा या तो कोमा में हैं या उनकी मौत हो चुकी है।
ईरान का डैमेज कंट्रोल: अब तक क्या कदम उठाए?
अपने सुप्रीम लीडर को लेकर चल रहे इस वैश्विक दबाव के बीच ईरान का प्रचार तंत्र बैकफुट पर नजर आ रहा है। इजरायली खबरों को खारिज करने के लिए ईरान ने जो पहला कदम उठाया, वह एक तस्वीर को सामने लाना था। हाल ही में तेहरान से एक तस्वीर सर्कुलेट की गई, जिसमें मोजतबा बिल्कुल स्वस्थ और सामान्य नजर आ रहे थे। हालांकि, इस तस्वीर को लेकर भी इंटरनेट पर सवाल उठे क्योंकि इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना मुश्किल हो रहा था।
अब राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ मीटिंग की खबरें उड़ाना ईरान का दूसरा रणनीतिक कदम है। तेहरान इस खबर के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि मोजतबा पूरी तरह सक्रिय हैं और देश की बागडोर उनके हाथ में ही है।
सियासी गलियारों में ‘अनबन’ की भी चर्चा
दिलचस्प बात यह है कि इस इमरजेंसी मीटिंग की खबरों के पीछे एक और पहलू भी सामने आया है। सूत्रों का मानना है कि सुप्रीम लीडर बनने से पहले से ही मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच सियासी तौर पर ठन रही थी। पेजेशकियन एक मध्यमार्गी और सुधारवादी छवि के नेता माने जाते हैं, जबकि मोजतबा कट्टरपंथी धड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में दोनों के बीच इस तरह की उच्च-स्तरीय बैठक को ईरान के आंतरिक राजनीतिक मैदान में ‘जरूरत के मजबूरन कदम’ के तौर पर भी देखा जा रहा है, जहां देश की बदहाल अर्थव्यवस्था ने दोनों नेताओं को एक मंच पर लाने पर मजबूर कर दिया है।

























