महाराष्ट्र की सियासत में काफी वक्त से चर्चा का विषय बने NCP विलय के सवाल पर अब पार्टी संस्थापक शरद पवार ने खुद अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सोमवार (28 सितंबर) को मुंबई में कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता ने दो टूक कहा कि उनकी पार्टी सत्ता के लिए किसी अन्य संगठन के साथ विलय नहीं करेगी और अब सारा फोकस संगठन की मजबूती पर होगा। इसी सभा में उन्होंने सूखा राहत की मांगों को लेकर महाराष्ट्र सरकार को दो-चार दिन में सड़क पर उतरने की चेतावनी भी दे दी।
विलय की अटकलों पर ब्रेक
पिछले कुछ समय से राज्य के सियासी गलियारों में यह कयास प्रचलित थे कि NCP (शरदचंद्र पवार) गुट “सत्ता में बैठे लोगों” के साथ हाथ मिला सकता है। इन अटकलों को खारिज करते हुए पवार ने किसी दल का नाम लिए बिना कहा कि हम कहीं नहीं जा रहे हैं। अगर आप चाहें तो हमारे साथ आइए। हमने अपने संगठन को मजबूत करने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि शरद पवार का गुट उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) और कांग्रेस के साथ महा विकास आघाड़ी का हिस्सा है, वहीं उनके भतीजे और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का धड़ महायुति सरकार में शामिल है। यही वजह है कि दोनों धड़ों के एक होने की हर खबर राज्य की राजनीति में भूचाल ला देती है।
जाने एकीकरण की शर्त क्या?
सभा के बाद NCP (SP) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने मीडिया से कहा कि पार्टी प्रमुख ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने बताया कि दोनों गुटों का एकीकरण सिर्फ एक ही सूरत में संभव है — जब अजीत पवार नेतृत्व वाला गुट शरद पवार की पार्टी में विलय कर ले। यानी शरद पवार ने न सिर्फ अटकलों पर पूर्णविराम लगाया, बल्कि आने वाली राजनीति के लिए भी एक लंबी लाइन खींच दी है।
सूखा राहत की मांग न मानी गई तो सड़कों पर उतरेगी पार्टी
इस सभा में विलय से ज्यादा अहम शरद पवार का वो हिस्सा रहा, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार के सामने सूखा राहत का मुद्दा रखा। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि हम लड़ना नहीं चाहते। हम सरकार से आग्रह करेंगे। अगर अगले दो-चार दिनों में हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम सड़कों पर उतरेंगे और लड़ेंगे।
उन्होंने सरकार से सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद करने और राहत योजनाओं के बारे में उन्हें जागरूक करने की अपील भी की।
265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित
राज्य सरकार ने शनिवार को कम बारिश के चलते 358 में से 265 तालुकों यानी लगभग 74 फीसदी हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया। इसके साथ फसल ऋण का पुनर्गठन, भूमि राजस्व में छूट और बिजली बिल पर सब्सिडी जैसी राहतें भी घोषित की गईं।
लेकिन पवार ने इस घोषणा में खामियां गिनाईं। उनका कहना था कि कई ऐसे तालुका हैं, जिन्हें सूखाग्रस्त लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। वहीं केले की फसल उगाने वाले किसान भी मदद के दायरे से बाहर रह गए।
मनमोहन सिंह की बैठक का हवाला देकर दिया तर्क
पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली सूखे संबंधी बैठक का हवाला देते हुए कहा कि तब यह सुझाव दिया गया था कि सांसदों को कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार किए बिना राहत से जुड़े फैसले लेने का अधिकार दिया जाए।
उन्होंने दावा किया कि जालना जिले के दौरे के बाद, जहां मीठे नींबू की खेती बड़े पैमाने पर होती है, केंद्र सरकार ने इस फसल के लिए 25,000 रुपये की सहायता घोषित की थी। उन्होंने बकाया कर्ज वाले किसानों को यह भी सचेत किया कि उन्हें नया ऋण लेने में दिक्कत आ सकती है।
यही है आगे की रणनीति
NCP विलय के सवाल को दरकिनार कर शरद पवार ने पार्टी का अगला मिशन भी बता दिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह तकनीक कई समस्याओं का समाधान कर सकती है और कार्यकर्ताओं को इसका असर समझना चाहिए।
चुनावों में AI के संभावित इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी नेताओं से AI से जुड़ी गतिविधियों और लेखों का अध्ययन करने को कहा है। जाहिर है, पवार अपनी पार्टी को तकनीकी रूप से भी तैयार करना चाहते हैं।
सभा में कौन-कौन रहा शामिल?
बता दें कि इस महत्वपूर्ण बैठक में NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले, प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे, विधायक दल के नेता जितेंद्र आव्हाड, पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख, विधायक रोहित पवार समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।























