मुंबई में स्टेट इलेक्शन कमीशन के कार्यालय के बाहर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने आयोग के कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड पर स्याही और कालिख लगाने की कोशिश की। पुलिस ने मौके पर सुरक्षा बढ़ाई और प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR में गड़बड़ियां हुई हैं। उनका यह भी दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग में मनमाने ढंग से फैसले ले रहे हैं और अन्य चुनाव आयुक्तों की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। ये आरोप मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद सामने आए हैं। हालांकि, आरोपों और रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
स्टेट इलेक्शन कमीशन कार्यालय के बाहर जुटे कार्यकर्ता
मुंबई यूथ कांग्रेस की अगुवाई में कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर स्टेट इलेक्शन कमीशन के कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। वहां उन्होंने नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड पर स्याही और कालिख पोतने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। कार्रवाई के दौरान कार्यालय के बाहर कुछ समय तक हलचल बनी रही। पुलिस की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या या आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर उपलब्ध जानकारी में विस्तृत विवरण नहीं है।
SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के SIR में अनियमितताएं हुई हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना होता है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं के विवरण की पुष्टि की जाती है और सूची में बदलाव किए जा सकते हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों की जांच संबंधित प्राधिकरणों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जानी चाहिए। इस मामले में कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं; उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर क्या है दावा?
प्रदर्शन के पीछे एक मीडिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया जा रहा है। *द इंडियन एक्सप्रेस* की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर दो अन्य चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने 14 बार आपत्ति जताई। रिपोर्ट के हवाले से कांग्रेस का आरोप है कि आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे।
इन दावों पर चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है। इसलिए रिपोर्ट में सामने आए विवरण और कांग्रेस की प्रतिक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है। आयोग के कामकाज को लेकर उठे सवालों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण या दस्तावेज सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
बोर्ड पर स्याही और कालिख लगाने की कोशिश के बाद पुलिस ने कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बोर्ड और परिसर के पास जाने से रोकने की कोशिश की। इसके बाद कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के दौरान किसी के घायल होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
प्रदर्शन के कारण स्टेट इलेक्शन कमीशन कार्यालय के बाहर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल रहा। पुलिस की मौजूदगी बढ़ने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को बाद में छोड़ा गया या उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज किया गया।
इस्तीफे की मांग के साथ राजनीतिक विरोध
मुंबई यूथ कांग्रेस का यह प्रदर्शन मतदाता सूची के SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक विरोध का हिस्सा है। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी के जरिए अपनी मांगें सामने रखीं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर जोर दिया। वहीं, बोर्ड पर कालिख पोतने की कोशिश के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
इस घटनाक्रम में दो पहलू प्रमुख हैं—एक ओर SIR प्रक्रिया और आयोग के फैसलों को लेकर कांग्रेस के आरोप, और दूसरी ओर विरोध प्रदर्शन के दौरान बोर्ड पर स्याही लगाने की कोशिश तथा पुलिस की कार्रवाई। आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और स्वतंत्र जांच का इंतजार रहेगा। फिलहाल मुंबई में स्टेट इलेक्शन कमीशन कार्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी राजनीतिक बहस को फिर सामने लाता है।






















