A human walking on Mars, just an illusion or reality: अंतरिक्ष के अनंत और अंधेरे रहस्यों को सुलझाने के लिए मानव का सफर आज भी जारी है। जब भी बात बाहरी ग्रहों और एलियन लाइफ की आती है, तो लोगों के मन में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। खासकर लाल ग्रह यानी मंगल (Mars) को लेकर दुनियाभर में लोगों की फैन्सी बहुत ज्यादा है। हालिया दौर में सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक तस्वीर तेजी से आग लगा रही है, जिसे देखकर लोगों के पसीने छूट गए। इस तस्वीर में दावा किया जा रहा है कि मंगल ग्रह पर कोई रहस्यमयी इंसानी आकृति टहल रही है। आइए जानते हैं कि यह तस्वीर क्या है और इसके पीछे की असलियत क्या है।
इंटरनेट पर मचा भूचाल
दरअसल, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) द्वारा भेजे गए एक रोवर ने जो खींची थी, वह अब इंटरनेट पर छा गई है। इस फोटो में मंगल की लाल धूल भरी जमीन पर एक ऐसी आकृति नजर आ रही है, जिसके दोनों हाथ खुले हुए हैं और एक पैर आगे की तरफ बढ़ा हुआ है। पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे कोई शख्स सुबह की सैर पर निकला हो। यूफओ और एलियन के शौकीनों ने इस तस्वीर को खूब पसंद किया और उन्होंने इस रहस्यमयी परछाई को ‘मार्स बिगफुट’ (Mars Bigfoot) का नाम दे दिया।
यह तस्वीर आई कहां से?
यह वायरल तस्वीर कोई नई नहीं है। यह नवंबर 2007 की है। नासा का ‘स्पिरिट रोवर’ (Spirit Rover) जब मंगल ग्रह पर गुसेव क्रेटर (Gusev Crater) के अंदर एक जगह ‘होम प्लेट’ (Home Plate) पर पहुंचा था, तब उसने यह तस्वीर कैप्चर की थी। लेकिन हाल ही में जब इसे दोबारा सोशल मीडिया पर डाला गया, तो लोगों ने इसे अलग ही नजरिए से देखा। कुछ लोगों का मानना था कि धरती से तंग आकर कोई एलियन या अज्ञात प्राणी मंगल पर बसने चला गया है, जबकि कुछ ने इसे मात्र एक भ्रम करार दिया।
वैज्ञानिकों ने उड़ाए तोड़ दिखाए
जब इस मामले में भारी पड़ता हुआ दबाव और लोगों की बढ़ती उत्सुकता को देखते हुए वैज्ञानिकों ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी। विशेषज्ञों ने साफ तौर पर बताया कि इस फोटो में कोई जादू या एलियन नहीं है। दरअसल, यह कोई विशालकाय इंसान नहीं, बल्कि मात्र 2 इंच यानी लगभग 6 सेंटीमीटर ऊंची एक छोटी सी चट्टान (Rock) है।
जब इस मूल चित्र को जूम इन करके क्रॉप (Crop) किया गया, तो फोटो का स्केल (Scale) पूरी तरह से बिगड़ गया। जब हम किसी चीज को बहुत ज्यादा बड़ा करके देखते हैं, तो उसका आसपास का वातावरण छिप जाता है और हमारी नजर केवल उस वस्तु पर टिक जाती है। ऐसे में यह छोटा सा पत्थर एक विशाल इंसान के रूप में नजर आने लगता है।
दिमाग का धोखा: पैरिडोलिया
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस पूरे मामले के पीछे हमारा अपना दिमाग काम कर रहा है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘पैरिडोलिया’ कहा जाता है। यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें हमारा दिमाग किसी भी बेतरतीब, अनियमित चीज या पैटर्न में इंसानी चेहरे और शरीर की आकृतियां खोजने लगता है। इसका सबसे आम उदाहरण बादलों का है। हम अक्सर आसमान में तैरते बादलों में जानवरों या इंसानों के चेहरे ढूंढ लेते हैं। यही हाल मंगल के इस पत्थर का भी है।
करोड़ों सालों की घिसाई ने दिया यह रूप
तो आखिर यह पत्थर ऐसा क्यों दिख रहा है? वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह पर बहुत तेज हवाएं और धूल भरी भयंकर आंधियां चलती रहती हैं। करोड़ों-अरबों सालों तक इन तेज हवाओं का सीधा सामना करने से यह चट्टान घिसी और इसका आकार ऐसा बन गया, जो दूर से देखने पर इंसान जैसा लगता है।
क्या मंगल पर इंसान रह सकता है?
इंसान या जीवन की बात करें तो आज का मंगल ग्रह पूरी तरह से निर्जीव और जानलेवा एक मरुस्थल बन चुका है। यहां का तापमान औसतन शून्य से 62 डिग्री सेल्सियस नीचे (-62°C) रहता है, जबकि ध्रुवीय क्षेत्रों (Poles) में यह ठंडा -140 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।
इसके अलावा, मंगल का वातावरण पृथ्वी से बिल्कुल अलग है। वहां की हवा बहुत ही पतली है और उसमें 95 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) का है। सांस लेने लायक ऑक्सीजन का तो नामोनिशान तक नहीं है। ऐसे कठोर और जहरीले माहौल में बिना किसी विशेष अंतरिक्ष सूट (Space Suit) के कोई भी जीव या इंसान पल्ला झाड़ने की गुंजाइश तक नहीं रखता।

























