महाराष्ट्र में सूखे और जलवायु परिवर्तन के कारण किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फडणवीस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए किसानों के नाम पर किए गए 31 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का हिसाब मांगा है।
ठाकरे ने कहा कि घोषणाओं का खेल अब खत्म हो चुका है और जमीनी स्तर पर किसानों को राहत पहुंचाने में सरकार पूरी तरह असफल साबित हो रही है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से तुरंत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की है ताकि सूखे की इस भयानक स्थिति का ठोस समाधान निकाला जा सके।
किसानों को धोखा दे रही फडणवीस सरकार?
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने पिछले साल 31 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित किया था, जिसमें प्रति हेक्टेयर 3.5 लाख रुपये मुआवजे का वादा किया गया था। लेकिन, सवाल यह है कि इन पैसों का सही उपयोग और वितरण किस हकीकत में हुआ?
ठाकरे ने पूछा, “मीडिया रिपोर्ट्स और किसानों की शिकायतें दर्शाती हैं कि इस विशाल रकम का कितना हिस्सा किसानों को असल में मिला है? सरकार को इस रकम का स्पष्ट हिसाब महाराष्ट्र की जनता के सामने रखना चाहिए।”
मानसून और सूखे का पूर्वानुमान
आंकड़ों का हवाला देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मानसून की शुरुआत में ही सूखे का पूर्वानुमान लगा दिया था। ऐसे में, सरकार का क्या रवैया था? जब सूखे का खौफ मच रहा था, तो सरकार ने सूखा विरोधी कदमों के लिए क्या तैयारी की? ठाकरे ने पूछा कि मुख्यमंत्री को इस बारे में जवाब देना चाहिए कि सूखे से निपटने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए थे, क्योंकि सूखे का संकट पहले ही स्पष्ट हो चुका था।
किसानों का कर्ज, राहत और पारदर्शिता
उद्धव ठाकरे ने अपने समय में किसानों के लिए की गई कर्जमाफी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने बिना किसी कठिन शर्तों के 15 दिनों में 2 लाख रुपये तक का किसानों का कर्ज माफ किया था। आज के हालात में, नई कर्जमाफी योजना का लाभ कितने किसानों को मिला, इस पर सरकार को पारदर्शी सूची जारी करनी चाहिए।
बर्बाद फसलें और किसानों का दर्द
ठाकरे ने कहा कि सूखे की मार से किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं। उनके खेत सूखे की भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दौरे और तस्वीरें देखकर जनता को भ्रम हो सकता है कि सरकार किसानों की चिंता कर रही है, लेकिन हकीकत में किसानों का दर्द छुपा हुआ है। उन्होंने कहा कि नुकसान का सही आकलन 5 अक्टूबर के बाद ही क्यों किया जाएगा? सूखे का असल आंकड़ा क्यों नहीं दिखाया जा रहा?
राजनीतिक बयानबाजी या जमीनी हकीकत?
उद्धव ठाकरे ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्या फडणवीस सरकार के दौरे सिर्फ काजू-बादाम खाने और तस्वीरें खिंचवाने के लिए हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि कैबिनेट की बैठक क्यों बुलाई जा रही है, यदि सूखे का असली जायजा नहीं लिया जा रहा है? उन्होंने कहा कि अधिकारी, मंत्री और जनप्रतिनिधि यदि किसानों की स्थिति का जायजा 10 मिनट में ही ले लेते हैं, तो फिर यह दिखावा क्यों?
किसानों की पीड़ा और सरकार की प्राथमिकता
ठाकरे ने कहा कि किसानों की पीड़ा को समझने का सबसे सटीक पैमाना उनकी आंखें हैं। यदि स्थिति इतनी खराब है कि फसलें जलकर राख हो चुकी हैं, तो फिर किस पैमाने का इंतजार किया जा रहा है? उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि किसानों का कर्ज माफ हुआ है या नहीं, क्योंकि माफी का नाम तो ‘माफी’ है, लेकिन किसानों को पैसा वास्तव में मिला है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।


























