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छोटा लड़का, बड़ा विवाद: महमूद ने दिखाया ‘राजनीतिक जादू’

Nigeria Child Scam: नाइजीरिया की सत्तारूढ़ पार्टी एपीसी की तरफ से सांसद पद के टिकट के लिए महमूद का एक इंटरव्यू वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में महमूद बेहद ही विनम्र और सीधा दिख रहा था।

फेसबुक और ट्विटर का हीरो: लेकिन दस्तावेजों ने खोली पोल

HIGHLIGHTS

  • नाइजीरिया का नया मसीहा या दस्तावेजों का धोखा?
  • बौनेपन की वजह से बच्चा या बड़ा राजनैतिक छल?
  • बुज़ुर्ग नेताओं के सामने नाबालिग की चालाकी
  • बच्चा या धोखेबाज? महमूद की राजनीति की सच्चाई
  • सोशल मीडिया से संसद तक: जारिया का अजूबा महमूद

Nigeria Child Scam: क्या कोई 16 साल का बच्चा किसी देश की संसद का चुनाव लड़ सकता है? कानूनन तो यह बिल्कुल नामुमकिन है, लेकिन नाइजीरिया में एक 16 साल का बच्चे ने ऐसा दिमाग लगाया कि वहां की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के बड़े-बड़े धुरंधर नेता भी उसके चक्कर में पड़ गए। देश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से ‘अबिन अल-अजाबिन जजौ’ (जारिया का अजूबा) के नाम से मशहूर हुए महमूद सादिस बुबा ने अचानक देश भर में तहलका मचा दिया। महमूद ने अपनी बातों का जादू ऐसा चलाया कि लोग उसे बदलाव का मसीहा मानने लगे, लेकिन असली सच कुछ और ही था।

बौनेपन का बहाना और झूठ

यह पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ, जब नाइजीरिया की सत्तारूढ़ पार्टी एपीसी (ऑल प्रोग्रेसिव कांग्रेस) की तरफ से सांसद पद के टिकट के लिए महमूद का एक इंटरव्यू वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में महमूद बेहद ही विनम्र और सीधा दिख रहा था। उसने दावा किया कि वह गाड़ियों का ड्राइवर रह चुका है और उसका जन्म 2 अगस्त 1995 को हुआ था, यानी वह 30 साल का है।

अपनी बातों को सच दिखाने के लिए उसने बौनेपन का हवाला दिया। उसने कहा कि उसे बौनेपन की बीमारी है, जिसकी वजह से वह बच्चें जैसा दिखता है, लेकिन उम्र में वह पक्का 30 साल का है। महमूद ने नेताओं से बेहद सादगी से कहा कि यह चुनाव मैं अपनी मर्जी से नहीं लड़ रहा, बल्कि जनता मुझसे कह रही है कि मैं उनकी सेवा करूं। उसका यह डायलॉग और उसका अनूठा अंदाज नाइजीरिया के फेसबुक और ट्विटर पर इस कदर वायरल हुआ कि लोग उसे बदलाव का नया मसीहा मानने लगे। लेकिन यह प्रेरणादायक कहानी बहुत जल्द देश के सबसे बड़े राजनीतिक घोटालों में से एक बन गई।

दस्तावेजों ने खोला पोल

नाइजीरिया के कानून के मुताबिक, संसद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 25 साल होनी जरूरी है। महमूद ने खुद को कागजों पर 30 साल का दिखाकर पार्टी से टिकट भी लगभग पक्का करवा लिया था। लेकिन जैसे ही वह सोशल मीडिया पर स्टार बना, कुछ अज्ञात लोगों ने उसके असली दस्तावेज इंटरनेट पर लीक कर दिए।

यहीं पर पूरे खेल की पोल खुल गई और महमूद का इंटरनेशनल पासपोर्ट, बर्थ सर्टिफिकेट, नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (NIN) और स्कूल के पुराने रिकॉर्ड्स जैसे ही सामने आए, पूरी पार्टी के पैरों तले जमीन खिसक गई। इन सभी आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, महमूद का जन्म साल 2010 में हुआ था, यानी वह 30 साल का कोई परिपक्व आदमी नहीं, बल्कि महज 16 साल का एक नाबालिग बच्चा था, जो अभी स्कूल में पढ़ता है।

टीचर ने किया पर्दाफाश

मामले को ज्यादा हवा तब मिली, जब महमूद के स्कूल के एक पूर्व शिक्षक ने खुलकर मीडिया के सामने बयान दे दिया। टीचर ने साफ कहा कि उसने कुछ ही साल पहले महमूद को जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाया था और वह अभी सिर्फ 16 साल का एक टीनएजर है। टीचर के इस खुलासे ने पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी, क्योंकि अब यह साबित हो चुका था कि उनके स्टार उम्मीदवार की उम्र झूठी है।

पार्टी ने साधी चुप्पी

शुरुआत में तो महमूद की राजनीतिक पार्टी ने उसका बचाव किया और इसे विरोधियों की साजिश बताया, लेकिन जब सबूतों का अंबार सामने आया तो मीडिया में शर्मिंदगी का माहौल बना, तो पार्टी ने अपना रुख बदल लिया। पार्टी ने उसे उम्र की जालसाजी और दस्तावेजों में छेड़छाड़ के आरोप में तुरंत सस्पेंड और अयोग्य घोषित कर दिया।

इज्जत बचाने के लिए महमूद ने भी बौखलाहट में पार्टी अध्यक्ष को एक चिट्ठी लिखकर तुरंत चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया। हालांकि, अब नाइजीरिया की जनता और वहां के राजनीतिक विश्लेषक यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर पार्टी के बड़े नेताओं ने स्क्रीनिंग के दौरान इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई? एक नाबालिग बच्चा देश की सबसे बड़ी पार्टी को कैसे चकमा दे सकता है? यह न केवल उस लड़के की बुद्धि को दर्शाता है, बल्कि नाइजीरिया की राजनीतिक व्यवस्था की जड़ों में पड़ी सड़ांध को भी उजागर करता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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