जानिए ऑर्गन ट्रांसप्लांट में अंग मिलने की पूरी सटीक प्रक्रिया

अंग का आवंटन तय करने के लिए कई मानदंड अपनाए जाते हैं, जिनमें सबसे पहले रक्त समूह का मिलान किया जाता है। इसके बाद मरीज की बीमारी की गंभीरता यानी मेडिकल अर्जेंसी का ध्यान रखा जाता है। वेटिंग लिस्ट में मरीज कितने समय से इंतजार कर रहा है, अंग का आकार और उम्र का भी परीक्षण किया जाता है।

जाने अंगदान में प्राथमिकता कैसे तय की जाती है

HIGHLIGHTS

  • भारत में अंग आवंटन की अनूठी प्रक्रिया क्या है
  • अंगदान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया और नियम
  • कैसे तय होता है अंग का सही मरीज को चयन
  • दिल्ली सरकार का नया कदम, अंगदान को बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO) प्लेटफार्म का शुभारंभ किया।

इस दौरान उन्होंने स्वयं भी अपने अंगदान का संकल्प लिया, जिसमें दिल, लिवर, किडनी, आंखें समेत कुल 14 अंग और टिश्यू शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य देशभर में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों की जान बचाई जा सके।

लेकिन सवाल यह उठता है कि जब किसी की मौत के बाद उसके अंग दान होते हैं, तो यह तय कौन करता है कि कौन सा अंग किस मरीज को मिलेगा? आइए, इस प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं।

अंगों का आवंटन और निर्णय लेने वाली संस्था

भारत में अंगों और टिश्यू का आवंटन का पूरा सिस्टम ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (OTTO) के माध्यम से चलता है। यह केंद्रिय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसके तहत रीजनल और स्टेट स्तर पर रोटो (Regional Organ and Tissue Transplant Organization) और SOTTO जैसी संस्थाएं काम करती हैं।

ये संस्थाएं देशभर के अस्पतालों, मरीजों की वेटिंग लिस्ट, उपलब्ध अंगों और उनकी आवश्यकताओं का समन्वय करती हैं। इनकी मदद से अंग का सही और त्वरित उपयोग सुनिश्चित किया जाता है, ताकि किसी भी अंग का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।

मरीज को अंग किस आधार पर मिलेगा?

अंग का आवंटन तय करने के लिए कई मानदंड अपनाए जाते हैं, जिनमें सबसे पहले रक्त समूह का मिलान किया जाता है। इसके बाद मरीज की बीमारी की गंभीरता यानी मेडिकल अर्जेंसी का ध्यान रखा जाता है। वेटिंग लिस्ट में मरीज कितने समय से इंतजार कर रहा है, अंग का आकार और उम्र का भी परीक्षण किया जाता है।

इसके अलावा, दानकर्ता और मरीज के शरीर का साइज भी मेल खाता हो, यह भी जरूरी है। खासतौर पर बच्चे (18 साल से कम उम्र के मरीज) के मामले में अलग नियम लागू होते हैं। यदि किसी बच्चे का अंग दान किया जाता है, तो उसे पहले बच्चे मरीज को ही प्राथमिकता दी जाती है।

अंग आवंटन का शहर, राज्य और राष्ट्रीय स्तर

अंग का प्रभावी ट्रांसप्लांट तभी संभव है जब उसे समय पर प्राप्त किया जाए। इसलिए, आवंटन प्रक्रिया में पहले उस शहर की वेटिंग लिस्ट देखी जाती है, जहां से अंग दान हुआ है। यदि वहां कोई मरीज नहीं मिल पाता, तो अगला कदम राज्य स्तर पर खोज होती है।

उसके बाद यदि जरूरत पूरी न हो, तो रीजनल और अंत में पूरे देश के मरीजों की तलाश की जाती है। कभी-कभी अंग को तेज़ी से पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर शहर से दूसरे शहर तक तेजी से भेजा जाता है।

महिलाओं और डोनर परिवार को प्राथमिकता

हाल ही में, सरकार ने अपने अंग आवंटन नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इसके तहत वेटिंग लिस्ट में मौजूद महिला मरीजों और डोनर के करीबी रिश्तेदारों को अतिरिक्त प्राथमिकता दी जाती है। इसका उद्देश्य अंगदान में जेंडर गैप को कम करना और अधिक लोगों को प्रोत्साहित करना है।

इसके अलावा, एक सुपर अर्जेंट कैटेगरी भी होती है, जिसमें मरीज की स्थिति इतनी नाजुक होती है कि उसे तुरंत अंग की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में, अंग को तुरंत उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

अंगदान और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया

अंगदान की प्रक्रिया बहुत ही संवेदनशील और जटिल होती है। सबसे पहले, जब किसी की मृत्यु होती है या उसे जीवन के अंतिम समय में अंगदान के लिए अनुमति मिलती है, तो मेडिकल टीम मृतक के अंगों का परीक्षण करती है। यदि अंग स्वस्थ और उपयोग योग्य हो, तो उसे तुरंत संबंधित ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन को सूचित किया जाता है।

इसके बाद, अंगों का आवंटन तय मानदंडों के आधार पर किया जाता है। निर्णय लेने वाली संस्था मरीज की मेडिकल स्थिति, अंग का साइज, रक्त समूह, और उसकी आवश्यकतानुसार सबसे उपयुक्त मरीज का चयन करती है। इस प्रक्रिया में तेज़ी और सटीकता बेहद जरूरी होती है ताकि अंग का सदुपयोग हो सके और मरीज की जान बचाई जा सके।

Sandhya Samay News

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