ओरिएंट केबल्स इंडिया लिमिटेड के शेयरों ने बाजार में मजबूत शुरुआत की। कंपनी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 450 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो 272 रुपये के इश्यू प्राइस से 65.44% अधिक है। वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर 448.10 रुपये पर लिस्ट हुआ। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले 64.74% का प्रीमियम है।
लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में शेयर को लेकर सकारात्मक रुझान था। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल अनौपचारिक संकेत होता है और इसे शेयर के प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जा सकता। निवेशकों के लिए लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत बाजार की मांग, कंपनी के प्रदर्शन और अन्य कारकों के आधार पर बदल सकती है।

Orient Cables का शेयर 272 रुपये के इश्यू प्राइस पर जारी
ओरिएंट केबल्स आईपीओ का प्राइस बैंड 272 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। एक लॉट में 55 शेयर रखे गए थे। इस हिसाब से खुदरा निवेशकों को आवेदन के लिए कम से कम 14,960 रुपये लगाने थे। आईपीओ 25 सितंबर से 29 सितंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था।
कंपनी ने आईपीओ के जरिए कुल 552 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। इसमें नए शेयरों का इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS), दोनों शामिल थे। फ्रेश इश्यू से कंपनी ने 320 करोड़ रुपये के शेयर जारी किए, जबकि ओएफएस के तहत मौजूदा निवेशकों ने 85.29 लाख शेयर बेचे। ओएफएस से मिली रकम कंपनी के बजाय शेयर बेचने वाले निवेशकों को जाती है।
आईपीओ को मिला 97 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन
ओरिएंट केबल्स आईपीओ को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इश्यू कुल मिलाकर 97.28 गुना सब्सक्राइब हुआ। अलग-अलग श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन का स्तर भी ऊंचा रहा:

- रिटेल निवेशक: 32.21 गुना
- क्यूआईबी (QIB): 192.68 गुना
- एनआईआई (NII): 121.90 गुना
कंपनी ने एंकर निवेशकों के लिए आईपीओ 24 सितंबर को खोला था। इस श्रेणी से कंपनी को 165.60 करोड़ रुपये मिले। एंकर निवेशकों की भागीदारी और विभिन्न निवेशक श्रेणियों में मिले सब्सक्रिप्शन ने इश्यू के प्रति बाजार की रुचि को दिखाया। हालांकि, सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा अपने आप में भविष्य के शेयर प्रदर्शन का संकेत नहीं है।
लिस्टिंग से पहले GMP में दिखी मजबूती
आईपीओ की लिस्टिंग से पहले ओरिएंट केबल्स का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) चर्चा में था। लिस्टिंग से पहले उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शेयर करीब 110 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा था। इससे इश्यू प्राइस के मुकाबले लगभग 40% की संभावित बढ़त का संकेत मिल रहा था। इससे एक दिन पहले जीएमपी 121 रुपये बताया गया था, जबकि 22 सितंबर को यह 34 रुपये था।
ग्रे मार्केट आधिकारिक शेयर बाजार का हिस्सा नहीं है। वहां के भाव अनौपचारिक होते हैं और तेजी से बदल सकते हैं। इसलिए निवेश के फैसले केवल जीएमपी या लिस्टिंग के शुरुआती प्रदर्शन के आधार पर नहीं लेने चाहिए।
आईपीओ से जुटाई रकम का कहां होगा इस्तेमाल?
कंपनी ने आईपीओ से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल के लिए कई उद्देश्य बताए थे। इनमें कारोबार की कार्यशील पूंजी की जरूरतें, कर्ज का भुगतान और सामान्य कॉरपोरेट खर्च शामिल हैं।
कार्यशील पूंजी के लिए 91.50 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। कंपनी के मुताबिक, इस राशि का उपयोग नई मशीनों और उपकरणों की खरीद तथा सिविल कार्यों सहित कारोबार से जुड़ी जरूरतों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, मौजूदा कर्ज के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए 155.50 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए 48.34 करोड़ रुपये का उपयोग प्रस्तावित है। इश्यू से जुड़े खर्चों के लिए भी इसी मद से 42.53 करोड़ रुपये लिए जाने की जानकारी दी गई है। ओएफएस के तहत शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलने वाली रकम कंपनी के परिचालन या विस्तार के लिए उपलब्ध नहीं होगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है लिस्टिंग?
NSE और BSE पर मजबूत प्रीमियम के साथ शुरुआत से आईपीओ में आवेदन करने वाले निवेशकों को पहले दिन अच्छा लिस्टिंग गेन मिला। फिर भी, शुरुआती बढ़त को आगे भी जारी रहने की गारंटी नहीं माना जा सकता। लिस्टिंग के बाद शेयर में उतार-चढ़ाव संभव है और इसका प्रदर्शन कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं तथा बाजार के रुझान पर निर्भर करेगा।
निवेशकों को कंपनी के आईपीओ दस्तावेजों, वित्तीय आंकड़ों और जोखिमों का अध्ययन करके ही कोई फैसला लेना चाहिए। यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं।























