इंटेरियो बाई गोदरेज ने लॉन्च किया ‘वर्कस्केप्स’

इंटेरियो बाई गोदरेज ने मॉड्यूलर वर्कप्लेस सॉल्यूशंस श्रेणी 'वर्कस्केप्स' लॉन्च की है। जानें कैसे यह फ्लेक्सिबल ऑफिस फर्नीचर सॉल्यूशन FY27 में B2B बिजनेस में 10% हिस्सेदारी हासिल करने को तैयार है।

गोदरेज लाया ऑफिस का नया गेमचेंजर

HIGHLIGHTS

  • वर्कस्केप्स से बदलेगा ऑफिस का अंदाज
  • ऑफिस फर्नीचर में आया बड़ा बदलाव
  • अब ऑफिस होगा ज्यादा फ्लेक्सिबल
  • गोदरेज के नए वर्कस्केप्स की एंट्री

देश के अग्रणी ऑफिस फर्नीचर ब्रांड इंटेरियो बाई गोदरेज ने भारतीय कार्यस्थलों के लिए एक बड़ी पहल करते हुए अपनी नवीनतम श्रेणी ‘वर्कस्केप्स’ (WorkscapeS) लॉन्च की है। यह मॉड्यूलर वर्कप्लेस सॉल्यूशंस की ऐसी रेंज है, जो आज के बदलते कॉर्पोरेट माहौल में संगठनों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। खास बात यह है कि कंपनी को वित्त वर्ष 2027 तक अपने बी2बी और संस्थागत कारोबार में वर्कस्केप्स से 10% योगदान की उम्मीद है।

वर्कस्केप्स क्या है और क्यों है खास?

आज जब हाइब्रिड वर्किंग और फ्लेक्सिबल ऑफिस कल्चर तेजी से अपनाया जा रहा है, तब पारंपरिक स्थायी लेआउट वाले ऑफिस अब संगठनों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे। इसी कमी को दूर करने के लिए वर्कस्केप्स को तैयार किया गया है।

इस श्रेणी में शामिल फर्नीचर और सहायक तत्व आसानी से एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित किए जा सकते हैं और आपस में पूरी तरह अनुकूल (कंपैटिबल) हैं। यानी जब भी टीम का आकार बदले, काम का तरीका बदले या जगह की जरूरत बदले, तो ऑफिस के पूरे लेआउट को बिना किसी बड़े रीनोवेशन के दोबारा व्यवस्थित किया जा सकता है।

वर्कस्केप्स पोर्टफोलियो में क्या-क्या शामिल है?

वर्कस्केप्स की प्रोडक्ट रेंज को विभिन्न कार्यशैलियों को कवर करने के लिए सोचा-समझकर बनाया गया है, जिसमें प्रमुख हैं:

  • कोलैबोरेशन टेबल्स – टीम वर्क और समूह चर्चाओं के लिए
  • प्राइवेसी सॉल्यूशंस– एकाग्रता से काम करने के लिए
  • मोबाइल मार्करबोर्ड्स और स्पेस डिवाइडर्स – जगह को स्मार्ट तरीके से बांटने के लिए
  • पावर सॉल्यूशंस – लगातार कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए
  • स्टोरेज और सपोर्ट एलिमेंट्स– व्यवस्थित कार्यक्षेत्र के लिए
  • मीटिंग और प्रेजेंटेशन टूल्स– हाइब्रिड मीटिंग्स और कॉन्फ्रेंस के लिए
  • सीटिंग एलिमेंट्स – अनौपचारिक बातचीत और आरामदायक माहौल के लिए

इन सभी उत्पादों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इन्हें जरूरत के हिसाब से बढ़ाया, हटाया या नए रूप में व्यवस्थित किया जा सके। इसका सरल और आकर्षक डिजाइन न केवल उपयोगिता बढ़ाता है, बल्कि ऑफिस में एक सहज और स्वागतपूर्ण वातावरण भी बनाता है।

कंपनी की ओर से क्या कहा?

इंटेरियो बाई गोदरेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, सेल्स एंड मार्केटिंग, समीर जोशी ने इस लॉन्च पर कहा, “आज कार्यस्थल तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में संगठन ऐसे समाधान चाहते हैं, जो ऑफिस की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अधिक फ्लेक्सिबिलिटी भी दें। वर्कस्केप्स में ऑफिस डिजाइन, उपयोगिता और जरूरत के अनुसार बदलाव की हमारी समझ को एक साथ जोड़ा गया है।”

उन्होंने आगे बताया कि यह श्रेणी भारत में डिजाइन और विकसित की गई है और इसे विशेष रूप से भारतीय कारोबारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि कार्यस्थल भविष्य की बदलती कार्यशैली के अनुरूप आसानी से ढल सकें।

बिजनेस टारगेट: FY27 में 10% योगदान

इंटेरियो बाई गोदरेज की रणनीति में वर्कस्केप्स एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होने वाला है। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 तक यह नई श्रेणी उसके बी2बी और संस्थागत फर्नीचर बिजनेस में 10% हिस्सेदारी हासिल कर लेगी। यह टारगेट इस बात का संकेत है कि भारत में मॉड्यूलर और फ्लेक्सिबल ऑफिस सॉल्यूशंस की मांग आने वाले समय में तेजी से बढ़ने वाली है।

मॉड्यूलर ऑफिस फर्नीचर क्यों बन रहा है जरूरी?

पोस्ट-पैंडेमिक दौर में कंपनियों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। हाइब्रिड वर्क मॉडल, हॉट-डेस्किंग और कॉस्ट-ऑप्टिमाइजेशन की ओर रुझान के चलते संगठन ऐसे वर्कप्लेस चाहते हैं, जो कम निवेश में बार-बार री-कॉन्फ़िगर किए जा सकें। मॉड्यूलर सॉल्यूशंस सिर्फ खर्च बचाते हैं, बल्कि स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के लिहाज से भी फायदेमंद हैं, क्योंकि इन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। वर्कस्केप्स इसी क्षेत्र में इंटेरियो बाई गोदरेज की मजबूत एंट्री है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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