India-UK FTA: ब्रिटेन में अब नहीं लगेगा कोई टैक्स

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति और भी रोमांचक है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, साल 2025 में ब्रिटेन ने लगभग 928.9 अरब डॉलर का सामान आयात किया। इसमें भारत की हिस्सेदारी महज 15.2 अरब डॉलर यानी करीब 1.6 प्रतिशत थी।

भारतीय सामान पर जीरो टैक्स, UK में क्या सस्ता होगा?

HIGHLIGHTS

  • UK FTA: इन सेक्टर्स के भारतीय कारोबारियों की चमकेगी किस्मत
  • 110% से 10%: भारत में अब सस्ती होंगी ब्रिटिश कारें
  • शेफ से IT तक, UK समझौते से किन्हें मिलेगा फायदा?
  • ग्लोबल ट्रेड में भारत की बड़ी जीत, UK FTA लागू
  • ड्यूटी फ्री बाजार मिला, पर भारत को लगेगा बड़ा झटका

Free Trade Agreement – FTA: भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय संबंधों में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। वर्षों से चल रही कूटनीतिक और व्यापारिक वार्ताओं के बाद, दोनों राष्ट्रों के बीच का मुक्त व्यापार समझौता आज से औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश बाजारों तक पहुंचने के लिए भारी कर्च (ड्यूटी) देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह कदम वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

99% टैरिफ लाइन पर छूट: किन सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत?

इस समझौते के तहत, भारतीय उत्पादों की लगभग 99 प्रतिशत श्रेणियों (टैरिफ लाइन्स) को ब्रिटेन में बिना किसी शुल्क के प्रवेश की सुविधा मिलेगी। इसका सीधा लाभ उन उद्योगों को होगा जो अधिक श्रम-प्रधान (Labour-Intensive) हैं और जिनमें भारत पहले से मजबूत स्थिति में है।

  • टेक्सटाइल और परिधान: भारतीय कपड़ा उद्योग को ब्रिटिश बाजार में कीमत प्रतिस्पर्धा का बड़ा फायदा मिलेगा।
  • लेदर और फुटवियर: जूते और चमड़े के सामान अब ज्यादा सस्ते होकर यूके पहुंचेंगे।
  •  खाद्य प्रसंस्करण और समुद्री उत्पाद: सीफूड और प्रोसेस्ड फूड के निर्यातकों के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है।
  • इंजीनियरिंग और केमिकल्स: मशीनरी और रासायनिक उत्पादों की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है।

विशाल बाजार में छिपे हैं अनलीवर्ड मौके

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति और भी रोमांचक है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, साल 2025 में ब्रिटेन ने लगभग 928.9 अरब डॉलर का सामान आयात किया। इसमें भारत की हिस्सेदारी महज 15.2 अरब डॉलर यानी करीब 1.6 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि गुणवत्ता में सुधार के साथ भारत के लिए विस्तार की अपार गुंजाइश है।

प्रोसेस्ड फूड का उदाहरण लें- पिछले साल यूके ने 33.4 अरब डॉलर का प्रोसेस्ड खाना बाहर से मंगाया, जबकि भारत का निर्यात इसमें सिर्फ 354 मिलियन डॉलर का था। टैक्स की दीवार गिरने के बाद भारतीय कंपनियों के लिए इस 1.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी को बढ़ाना अब आसान हो जाएगा।

सेवा क्षेत्र और प्रोफेशनल्स को मिलेगी राहत

यह समझौता सिर्फ सामानों तक सीमित नहीं है। इसके 30 अध्यायों में डिजिटल ट्रेड, सरकारी खरीद और सप्लाई-चेन जैसे आधुनिक मुद्दे शामिल हैं।

  • आईटी और फाइनेंस: सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की भारतीय कंपनियों को नियामक स्पष्टता मिलेगी।
  • वीजा और मोबिलिटी: एक ही कंपनी में ट्रांसफर होने वाले कर्मचारियों और बिजनेस विजिटर्स के लिए नियमों में ढील दी गई है।
  • विशेषज्ञों के लिए दरवाजे खुले: भारतीय शेफ, योग गुरु और शास्त्रीय संगीतकारों को ब्रिटेन में काम करने की बेहतर सुविधा मिलेगी।
  • सोशल सिक्योरिटी छूट: ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ के तहत, अस्थायी रूप से यूके गए भारतीय कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी में छूट 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। इससे कर्मचारियों और कंपनियों दोनों का खर्चा कम होगा।

ब्रिटिश ऑटो इंडस्ट्री को भारत से मिलेगा रास्ता

इस सौदे में ब्रिटेन को भी फायदा हुआ है। भारत में ब्रिटिश कारों पर लगने वाला भारी आयात शुल्क (जो अभी 110% तक है) अगले पांच सालों में धीरे-धीरे घटकर 10% पर आ जाएगा। हालांकि, इसके लिए एक कोटा सिस्टम लागू किया गया है। शुरुआती 5 साल इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन गाड़ियों (जिनकी कीमत 40,000 पाउंड से ज्यादा है) को इस कटौती से बाहर रखा गया है।

आसमान में उड़ान भरने से पहले ये हैं चुनौतियां

जितना यह समझौता फायदेमंद है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। विशेषज्ञों की मानें तो सिर्फ टैक्स खत्म होने से निर्यात अपने आप नहीं बढ़ेगा।

  • गुणवत्ता की परीक्षा: ब्रिटेन खाद्य सुरक्षा, ट्रेसेबिलिटी (माल की ट्रैकिंग) और तकनीकी मानकों को लेकर बेहद सख्त है। छोटे कारोबारियों (MSMEs) के लिए ये नियम पालना टैक्स से ज्यादा बड़ी बाधा साबित हो सकता है।
  • फार्मा और स्टील सेक्टर की चिंता: दवाइयों और केमिकल्स में टैरिफ से ज्यादा रेगुलेटरी अप्रूवल महत्वपूर्ण है। वहीं, स्टील निर्यात पर ब्रिटेन के सुरक्षात्मक उपायों के चलते कोटा से ज्यादा निर्यात पर 50% ड्यूटी लग सकती है।
  • वीजा सीमाएं: भारत की मांग के अनुसार व्यापक वीजा छूट नहीं मिल पाई है, क्योंकि यूके में घरेलू राजनीति इसमें बाधक बनी।

भारत-यूके FTA वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ बनाने का एक मजबूत कदम है। ब्रेक्जिट के बाद यूके के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक है। हालांकि, इस समझौते की असली सफलता का आकलन अब कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर होगी। भारतीय कंपनियों को अब सिर्फ सस्ता माल बेचने पर नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और बेहतर सर्टिफिकेशन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। जो कंपनियां ब्रिटिश मानकों के साथ अपनी कीमती प्रतिस्पर्धा को साबित करेंगी, वहीं इस ऐतिहासिक डील की सच्ची विजेता बनेंगी।

Sandhya Samay News

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