Indian stock market: आज गुरुवार को एशियाई बाजारों में भारी गिरावट के बाद भारतीय घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की है। बीएसई का सेंसेक्स 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक 202 अंकों की बढ़त के साथ 77,388 के स्तर पर खुला है, जो निवेशकों की भरोसेमंद शुरुआत का संकेत है। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 ने 63 अंकों की तेजी के साथ 24,142 के स्तर से अपनी कारोबारी यात्रा शुरू की। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
गिरावट और अस्थिरता का माहौल
एशियाई बाजार आज भारी गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 6% से अधिक गिरावट के साथ पहुंच गया, जबकि एमएससीआई एशिया पैसिफिक इंडेक्स में भी 1.7% की गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई 225 2.4% टूट गया, और टॉपिक्स इंडेक्स में भी 0.9% की गिरावट दर्ज हुई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक लगभग स्थिर रहा और फ्लैट नोट पर खुला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स का फ्यूचर्स भी बढ़त के साथ 24,829 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो बुधवार के बंद भाव 24,681.1 से ऊपर है।
इन गिरावट का मुख्य कारण सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारी बिकवाली है, जिसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से प्रेरित तेजी के ट्रेंड में अस्थिरता ला दी है। सेमीकंडक्टर कंपनियों में बिकवाली ने निवेशकों की मनोदशा को प्रभावित किया है, जिससे यह संकेत मिला है कि AI आधारित तकनीकी क्षेत्रों में तेजी की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक ने जनवरी 2023 के बाद पहली बार अपनी बेंचमार्क पॉलिसी रेट में वृद्धि की है। जून में देश का मुख्य मुद्रास्फीति 3.2% पर पहुंच गई, जो 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है।
मुद्रास्फीति और ब्याज दरें
दक्षिण कोरियाई केंद्रीय बैंक की यह नीति बदलाव मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इससे पहले, बैंक ऑफ कोरिया ने कहा था कि भारी बोनस और वेतन वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था में मजदूरी बढ़ेगी, जिससे मुद्रास्फीति पर और दबाव बढ़ सकता है। इस तरह के संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है कि वैश्विक आर्थिक स्थिति में अनिश्चितता बनी रहेगी, खासकर जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला कर रहे हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से ऊपर की ओर धकेला है। अमेरिका ने ईरान पर नए हमले किए हैं, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और भड़क गया है। इससे ऊर्जा आपूर्ति की आशंकाएं बढ़ गई हैं, और ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। लगातार चौथे सत्र में इस फ्यूल की कीमतें बढ़ रही हैं, जो वैश्विक बाजार में ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
उम्मीदों के साथ स्थिरता
अमेरिकी बाजार की बात करें तो, बुधवार की रात वॉल स्ट्रीट के फ्यूचर्स लगभग स्थिर रहे। डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज के फ्यूचर्स 15 अंकों (0.03%) की मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं, एसएंडपी 500 के फ्यूचर्स 0.05% ऊपर और नैस्डैक 100 के फ्यूचर्स 0.11% प्रगति पर थे। ट्रेडिंग के दौरान, डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 150.91 अंक (0.3%) बढ़कर 52,659.18 के स्तर पर पहुंच गया। एसएंडपी 500 में 0.4% की मजबूती आई और यह 7,572.43 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट ने भी 0.6% की बढ़त दर्ज की और 26,269.23 के स्तर पर समाप्त हुआ। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिकी बाजार में सूक्ष्म सुधार हुआ है, जो वैश्विक आर्थिक आशंकाओं के बावजूद निवेशकों का भरोसा दिखाता है।
मौजूदा माहौल में, बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, ऊर्जा कीमतों में उछाल और मुद्रास्फीति के दबाव के चलते निवेशकों को सतर्क रहना जरूरी है। भारतीय बाजार भी अभी इन वैश्विक संकेतकों से प्रभावित हो सकता है, लेकिन घरेलू आर्थिक आंकड़ों और नीतियों पर निवेशकों की निगाहें टिकी हैं। फंडामेंटल स्टॉक्स और दीर्घकालिक निवेश के पक्षधर इन उतार-चढ़ाव को अवसर के रूप में देख सकते हैं। साथ ही, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, वैश्विक ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाओं पर नजर बनाना जरूरी है।

























