संध्या समय न्यूज
डिजिटल युग में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे विकसित देशों की तर्ज पर अब भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लागू होने की संभावना है। केंद्रीय सरकार बच्चों की उम्र के आधार पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक की पहुंच को सीमित करने का प्लान बना रही है।
केंद्रीय मंत्री ने किया ऐलान
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार (17 फरवरी) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस ओर संकेत दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार उम्र के आधार पर पाबंदियों को लेकर अलग-अलग सोशल मीडिया कंपनियों के साथ विचार-विमर्श कर रही है। यह चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि किस उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति दी जाए और किस उम्र पर प्रतिबंध लगाया जाए।
क्यों उठ रहा है यह मुद्दा?
सरकार का मुख्य उद्देश्य बच्चों और नाबालिगों को ऑनलाइन दुनिया में एक सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल फोन और सस्ते इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण बहुत कम उम्र के बच्चे भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों और सरकार को इस बात की चिंता है कि अनियंत्रित सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों पर गंभीर असर डाल रहा है। इसके प्रमुख खतरों में शामिल हैं:
- गलत कंटेंट का असर: बच्चों की मानसिकता पर अनुपयुक्त सामग्री का गलत प्रभाव।
- साइबर बुलिंग: ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकी के मामलों में वृद्धि।
- ऑनलाइन लत: बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत अधिक होना और उनका शारीरिक गतिविधियों से विमुख होना।
वैश्विक परिदृश्य: दूसरे देशों में क्या हैं नियम?
भारत इस मुद्दे पर अकेला नहीं है। दुनिया के कई विकसित देशों ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं। सरकार इन देशों के मॉडल से सीख ले रही है:
- ऑस्ट्रेलिया: यहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों की उपस्थिति को लेकर काफी सख्त कानून हैं। कंपनियों पर यह जिम्मेदारी होती है कि वे सुनिश्चित करें कि बच्चे उनके प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित हैं।
- फ्रांस: फ्रांस ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया की उम्र सीमा को लेकर स्पष्ट नियम बनाए हैं और प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय की गई है।
भारत भी इन अनुभवों को ध्यान में रखते हुए अपने यहां ऐसे नियम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है ताकि बच्चों को डिजिटल दुनिया के नुकसान से बचाया जा सके।
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क्या होगा आगे का रास्ता?
केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल यह प्रक्रिया विचार के चरण में है। सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत बातचीत चल रही है। आने वाले समय में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक नई गाइडलाइन या नीति लाई जा सकती है। सरकार का प्रयास है कि सोशल मीडिया के फायदे को बरकरार रखते हुए, बच्चों को इसके दुष्प्रभावों से बचाने के लिए एक संतुलित रास्ता निकाला जाए। अगर यह नियम लागू होता है, तो इसका सीधा असर इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की पहुंच पर पड़ेगा।

























