Petrol-Diesel Price Hike: आम आदमी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। महंगाई की मार झेल रहे देशवासियों के लिए आज सोमवार, 25 मई 2026 का दिन एक और बुरी खबर लेकर आया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने ईंधन की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी कर दी है। यह कोई आम वृद्धि नहीं है, बल्कि पिछले 15 दिनों के दौरान यह चौथी बार है जब पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा किया गया है। इस लगातार हो रही बढ़ोतरी ने लोगों के रोजमर्रा के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। ताजा इजाफे के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम ने 100 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर महंगाई का बोझ और भारी हो गया है।
ताजा रिवीजन: दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये के पार
सोमवार सुबह ईंधन कीमतों में हुए ताजा संशोधन के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के साथ ही दिल्ली में पेट्रोल का भाव 102.12 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। वहीं, डीजल के दामों में भी 2.71 रुपए प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसके बाद अब दिल्ली वालों को एक लीटर डीजल के लिए 95.20 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। तेल कंपनियों के मुताबिक, पिछले 76 दिनों तक कीमतों को स्थिर रखने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब इस घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में यह इजाफा अनिवार्य हो गया था।
महानगरों में ईंधन के दामों ने रचाया इतिहास
दिल्ली से लेकर मुंबई और कोलकाता तक, देश के सभी प्रमुख महानगरों में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। वैट (VAT) और अन्य टैक्स के चलते इन शहरों में दाम अलग-अलग हैं, लेकिन महंगाई का दर्द एक जैसा है।
- कोलकाता: पूर्वी भारत की राजधानी कोलकाता में ईंधन सबसे महंगा हो गया है। यहां पेट्रोल में 2.87 रुपए और डीजल में 2.80 रुपए की वृद्धि हुई है। इसके चलते कोलकाता में पेट्रोल का दाम 113.51 रुपए और डीजल का दाम 99.82 रुपए प्रति लीटर हो गया है। यहां भी डीजल 100 रुपये के आंकड़े को छूने वाला है।
- मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी स्थिति खराब है। यहां पेट्रोल की कीमत 2.72 रुपए बढ़कर 111.21 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है। वहीं, डीजल के लिए लोगों को अब 97.83 रुपए प्रति लीटर चुकाने पड़ रहे हैं।
- चेन्नई: दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में भी राहत नहीं है। यहां पेट्रोल 107.77 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।
Strait of Hormuz संकट: वैश्विक बाजार में हाहाकार
ईंधन की कीमतों में इस अचानक आई तेजी के पीछे सबसे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव को माना जा रहा है। पश्चिम एशिया (West Asia) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के तेल बाजार में खलबली मचा दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। यह जलडमरूमध्य विश्व के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। अगर यह मार्ग बंद हुआ तो वैश्विक तेल आपूर्ति भारी तौर पर प्रभावित होगी, जिसका असर सीधे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। इस भय के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसका असर अब भारतीय पंप पर दिखाई दे रहा है।
तेल कंपनियों का दर्द: रोज़ 1000 करोड़ का घाटा
तेल विपणन कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी को उनकी मजबूरी करार दिया है। कंपनियों का दावा है कि जब वे पिछले 76 दिनों तक कीमतें स्थिर रख रही थीं, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे थे। इस दौरान उन्हें घरेलू बाजार में भाव नहीं बढ़ाने के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ा।
आंकड़ों के मुताबिक, तेल कंपनियां हर दिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही थीं। इतना बड़ा वित्तीय भार किसी भी कंपनी के लिए लंबे समय तक सहन करना मुश्किल था। इसलिए, अब यह बढ़ती लागत का भार सीधे आम उपभोक्ताओं के कंधों पर डाला जा रहा है। इसे ‘अंडर-रिकवरी’ की स्थिति से बाहर निकलने का तरीका बताया जा रहा है।

आम जनजीवन पर प्रभाव
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर महंगाई दर पर पड़ता है। परिवहन बढ़ने का मतलब है कि सब्जी, फल, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई महंगी होगी, जो आगे चलकर आम बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी का रूप लेगी। इसके अलावा, जो लोग प्राइवेट वाहनों से दफ्तर जाते हैं, उनका मासिक बजट भी बिगड़ जाएगा। ऐसे में लोगों को अपनी बचत पर गौर करने और खर्च पर लगाम लगाने की मजबूरी होगी।
भविष्य क्या है? क्या और बढ़ेंगे रेट?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अभी और बढ़ोतरी होगी? विशेषज्ञों की राय में, अगर अंतरराष्ट्रीय हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो कीमतों में और इजाफा देखने को मिल सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच के तनाव के समाधान के कोई आसार अभी तक नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकती हैं, जिससे भारत में ईंधन के दाम 110-115 रुपये के पार भी जा सकते हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से केंद्र और राज्यों द्वारा ईंधन पर लगने वाले टैक्स (एक्साइज ड्यूटी और वैट) में कटौती की मांग भी उठ रही है। अगर सरकार टैक्स घटाती है, तो इस महंगाई पर कुछ हद तक लगाम लगाई जा सकती है। लेकिन अभी तक किसी भी ठोस राहत उपाय की घोषणा नहीं की गई है।





















