बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से चुनाव कराने पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए तथा मतदाता का वोट उसी उम्मीदवार को मिलना चाहिए, जिसे उसने चुना है। मायावती ने बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वोटों की गिनती और मतदान प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए।
28 सितंबर को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में मायावती ने यह बात कही। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी EVM की विश्वसनीयता और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की जरूरत पर अपनी राय रख चुके हैं। मायावती ने कहा कि बसपा लंबे समय से EVM के इस्तेमाल का विरोध करती रही है और पार्टी की मांग है कि चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाए।

‘मतदाता के वोट पर संदेह नहीं होना चाहिए’
मायावती के मुताबिक, भारतीय संविधान नागरिकों को मतदान का अधिकार देता है और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जाएं। उन्होंने कहा कि मतदाता का वोट उसी प्रत्याशी के पक्ष में दर्ज होना चाहिए, जिसे उसने वोट दिया है। मतदान के नतीजे या प्रक्रिया पर संदेह पैदा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर बात है।
बसपा प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर लोगों को यह भरोसा नहीं रहेगा कि उनका वोट सही जगह दर्ज हुआ है, तो लोकतंत्र में उनका विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मतदाता को अपने मत के इस्तेमाल और उसके परिणाम को लेकर भरोसा रहे।
बसपा की मांग: EVM की जगह बैलेट पेपर
मायावती ने कहा कि बसपा की ओर से EVM के इस्तेमाल पर पहले भी आपत्ति जताई जाती रही है। पार्टी की मांग है कि मशीन से मतदान बंद कर बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराए जाएं। उनके अनुसार, मतपत्र से मतदान कराने पर मतदाता अपने वोट को लेकर अधिक स्पष्टता महसूस कर सकता है।
हालांकि, EVM को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से बहस चलती रही है। कुछ दल मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं, जबकि चुनाव आयोग और EVM का समर्थन करने वाले पक्ष चुनाव प्रक्रिया में मशीनों के इस्तेमाल को सुरक्षित और प्रभावी बताते हैं। मायावती ने अपने बयान में चुनाव आयोग की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।
बीजेपी और कांग्रेस के पुराने रुख का किया जिक्र
प्रेस वार्ता में मायावती ने EVM को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के पुराने रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में कई दशकों तक बैलेट पेपर से चुनाव होते रहे। बाद में मतदान के लिए EVM का इस्तेमाल शुरू हुआ। मायावती के अनुसार, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब बीजेपी ने EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे और मशीनों के हैक होने की आशंका जताई थी।
उन्होंने कहा कि उस समय बीजेपी की ओर से यह आरोप लगाया जाता था कि EVM का दुरुपयोग हो सकता है और चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सकता है। मायावती ने दावा किया कि बीजेपी ने EVM के खिलाफ अभियान चलाया था और इसे हटाने की मांग भी की थी। उनके मुताबिक, सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने मशीनों के इस्तेमाल को जारी रखा।
मायावती का यह बयान राजनीतिक दलों के पुराने आरोपों और बदलते रुख पर बहस को फिर से सामने लाता है। हालांकि, उनके बयान में उठाए गए आरोपों और दावों को संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा चुनाव आयोग के आधिकारिक पक्ष के साथ देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मांग से जुड़ा बयान
राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने भी अलग-अलग मौकों पर मतदान प्रणाली और EVM को लेकर सवाल उठाए हैं। मायावती का बैलेट पेपर के समर्थन में आया बयान इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच समानता दिखाता है। फिर भी, अलग-अलग दलों की मांगों और उनके तर्कों में अंतर हो सकता है। मायावती ने अपने बयान में बसपा का पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि पार्टी शुरू से ही EVM के इस्तेमाल के खिलाफ रही है।
यह मुद्दा आगामी चुनावों के संदर्भ में भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकता है। उत्तर प्रदेश में बसपा, सपा और कांग्रेस की चुनावी रणनीतियों के बीच EVM और बैलेट पेपर पर नेताओं के बयान मतदाताओं और राजनीतिक दलों का ध्यान खींच रहे हैं। फिलहाल मायावती की मुख्य मांग यही है कि मतदान प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखने के लिए बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर विचार किया जाए।























