रूस में 18 से 20 सितंबर तक तीन दिनों तक चले संसदीय चुनावों का परिणाम अब सामने आ रहा है, जिसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रूस प्रमुखता से आगे है। यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद पहला बड़ा चुनाव है, जो रूस की आंतरिक राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल रहा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, यूनाइटेड रूस को भारी समर्थन मिला है, और यह स्पष्ट हो रहा है कि पुतिन का नेतृत्व फिर से मजबूत स्थिति में है।
56.66% मतदान का आंकड़ा दर्ज किया गया
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, 18 से 20 सितंबर तक हुए इस तीन दिवसीय मतदान में कुल 56.66% वोटिंग दर्ज की गई। इस चुनाव में लगभग 11 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान के पात्र थे।
मतदान के अंतिम दिन यूक्रेन की ओर से रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए गए, जिनमें मॉस्को सहित कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी गई। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि इस दौरान उन्होंने 1,110 ड्रोन गिराने में सफलता हासिल की है, जिससे देश में तनाव और अस्थिरता का माहौल बना रहा।
यूनाइटेड रूस की स्पष्ट बढ़त
चुनाव के शुरुआती रुझानों में, यूनाइटेड रूस पार्टी को करीब 58% वोट प्राप्त हुए हैं, जो पार्टी-लिस्ट सीटों के लिए स्पष्ट बहुमत का संकेत है। इसके साथ ही, यह पार्टी अधिकांश सिंगल-सीट सीटों पर भी आगे चल रही है।
कुल 450 सीटों वाली रूस की स्टेट ड्यूमा में, ये आंकड़े दिखाते हैं कि पुतिन की पार्टी ने अपने वर्चस्व को कायम रखा है। चुनाव के दौरान, मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का भी उपयोग किया गया, जिसमें रिमोट वोटिंग की सुविधा प्रदान की गई थी। इस तरह की व्यवस्था से देशभर में मतदान प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया गया।
विपक्ष की भूमिका सीमित
यूनाइटेड रूस के अलावा, कम्युनिस्ट पार्टी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी, ए जस्ट रूस और न्यू पीपल जैसी पार्टियां भी इस चुनाव में भागीदार थीं। ये पार्टियां अक्सर क्रेमलिन की नीति के साथ खड़ी नजर आईं, और अधिकतर बड़े मुद्दों पर सरकार का समर्थन किया। 2021 के चुनाव की तुलना में, इस बार भी यूनाइटेड रूस ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जब उसने 450 में से 324 सीटें जीती थीं। वहीं, युद्ध का विरोध करने वाली याब्लोको पार्टी को अगस्त 2023 में रूस के सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल पार्टी की लिस्ट से हटा दिया था। कई युद्ध-विरोधी नेताओं को गिरफ्तार किया गया या चुनाव लड़ने से रोका गया, जिससे विपक्षी दलों की भूमिका सीमित रह गई है।
ड्रोन हमलों और चुनाव में चुनौतियां
चुनाव के अंतिम दिन, यूक्रेन की ओर से रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया गया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने कहा कि, इस दौरान 1,600 से अधिक ड्रोन को रोकने में सफलता मिली। मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों में इन हमलों में तीन लोगों की मौत हुई और एक तेल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा।
साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमलों की भी शिकायतें मिली हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने कहा है कि इन चुनौतियों के बावजूद मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रही। विपक्षी दलों ने पेपर बैलेट नहीं देने, पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों में प्रवेश न देने और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए, जिनकी स्वतंत्र जांच अभी जारी है।


























