मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोध शुक्रवार को राजधानी देहरादून की सड़कों पर दिखाई दिया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय की ओर कूच किया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत सचिवालय से पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठ गए और केंद्र सरकार, भाजपा तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारे लगाने लगे। इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा और दोनों पक्षों के बीच देर तक तीखी बहस होती रही। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध के दौरान पुतला दहन भी किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
सचिवालय से पहले रोके गए प्रदर्शनकारी
कांग्रेस का कार्यक्रम सचिवालय कूच और घेराव के रूप में आयोजित किया गया था। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का जत्था सचिवालय की ओर बढ़ा, लेकिन पुलिस ने निर्धारित सुरक्षा घेरे के पास बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आगे जाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसी दौरान नारेबाजी तेज हुई और कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए।
पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई नोकझोंक के बावजूद प्रदर्शनकारी मौके पर डटे रहे। बाद में कार्यकर्ता सड़क पर धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के कारण इलाके में कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल
इस विरोध-प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, करन मेहरा, गोविंद सिंह कुंजवाल, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक विक्रम सिंह नेगी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, चुनाव से जुड़ी संवैधानिक संस्था को निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से काम करना चाहिए। नेताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को नुकसान पहुंच रहा है।
ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग
धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यदि उन्हें तत्काल बर्खास्त नहीं किया गया तो पार्टी अपना आंदोलन और व्यापक करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेश के कोने-कोने तक ले जाएगी और आगे भी विरोध-प्रदर्शन जारी रखेगी।
गोदियाल के मुताबिक, कांग्रेस इस मामले को केवल राजधानी तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी कार्यकर्ता जिलों और अन्य क्षेत्रों में भी लोगों के बीच जाकर अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़े सवालों पर पीछे नहीं हटेगी। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार और भाजपा से भी इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की।

केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारे लगाए। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से निष्पक्षता और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थाओं की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस ने अपने विरोध को लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया गया प्रदर्शन बताया। नेताओं ने कहा कि पार्टी अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहती है, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। वहीं, पुलिस ने सचिवालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग के आगे जाने से रोककर स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश की।
आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी
देहरादून में हुआ यह प्रदर्शन उत्तराखंड कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी की मांग को लेकर आयोजित विरोध कार्यक्रम था। पार्टी नेताओं ने साफ किया कि मांग पूरी न होने की स्थिति में आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। प्रदर्शन के दौरान हुई नारेबाजी, पुतला दहन और बैरिकेडिंग पर चढ़े कार्यकर्ताओं के कारण राजनीतिक माहौल गर्म रहा।
कांग्रेस की ओर से आगे के कार्यक्रमों की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष की चेतावनी से संकेत मिलता है कि पार्टी इस मुद्दे पर दबाव बनाए रखने की तैयारी में है। फिलहाल, देहरादून में सचिवालय कूच के दौरान पुलिस की बैरिकेडिंग के सामने धरना देकर कांग्रेस ने अपनी मांग दोहराई और आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया।

























