सीएम रेखा गुप्ता का प्लान: दिल्ली का कचरा बदलेगा धन

दिल्ली जैसे महानगर में प्रतिदिन हजारों टन कचरा निकलता है। वर्तमान में शहर के कई हिस्सों में कचरे के विशाल पर्वत लग चुके हैं। ये कचरे के ढेर सिर्फ शहर की सौंदर्यता को ही नहीं खराब करते, बल्कि आसपास के इलाकों में जहरीली गैसों के रिसाव और भयंकर बदबू का कारण बनते हैं।

कचरे से अब बनेगा खजाना: दिल्ली में लगेंगे बायोगैस प्लांट

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली के कचरे के पहाड़ों का अब मिलेगा स्थायी समाधान!
  • ओखला तेहखंड में लगेंगे प्लांट, कचरे के पहाड़ होंगे खत्म
  • एमसीडी और ऑयल इंडिया करार: कचरे से बनेगी अब ऊर्जा
  • कचरे से अब बनेगी स्वच्छ CNG, दिल्ली की बदलेगी तस्वीर

Delhi News: दिल्ली में कचरे के ढेर और लैंडफिल साइट्स की समस्या को लेकर लंबे समय से चिंता जाहिर की जाती रही है। लेकिन, अब इस समस्या को समाधान की ओर मोड़ने का एक बेहद मजबूत और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में दिल्ली नगर निगम (MCD) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस अनुबंध का उद्देश्य ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से धन) की अवधारणा को वास्तविकता का रूप देना है। इसके तहत दिल्ली के तेहखंड और ओखला औद्योगिक क्षेत्रों में अत्याधुनिक कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) संयंत्रों की स्थापना की जाएगी।

क्यों जरूरी था यह कदम?

दिल्ली जैसे महानगर में प्रतिदिन हजारों टन कचरा निकलता है। वर्तमान में शहर के कई हिस्सों में कचरे के विशाल पर्वत लग चुके हैं। ये कचरे के ढेर सिर्फ शहर की सौंदर्यता को ही नहीं खराब करते, बल्कि आसपास के इलाकों में जहरीली गैसों के रिसाव और भयंकर बदबू का कारण बनते हैं। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा साबित हो रही थी। इसी चुनौती को देखते हुए यह नई पहल शुरू की गई है, जो कचरे को जमीन पर फेलने से रोककर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करेगी।

परियोजना की क्षमता और कार्यप्रणाली

इस भव्य परियोजना के तहत स्थापित किए जाने वाले बायोगैस प्लांटों की कुल प्रसंस्करण क्षमता 800 टीपीडी (Tonnes Per Day/प्रतिदिन टन) निर्धारित की गई है। इसका मतलब है कि यह प्लांट रोजाना दिल्ली शहर के अलग-अलग हिस्सों से एकत्रित होने वाले 800 टन गीले और जैविक कचरे को खत्म करने में सक्षम होंगे। इस प्रक्रिया में घरों, होटलों, रेस्तरांओं और मंडियों से निकलने वाले सेग्रीगेटेड (अलग किए गए) कचरे को सीधे प्लांट लाया जाएगा, जहां उसे रिसाइकल के बजाय ऊर्जा में बदला जाएगा।

सर्कुलर इकोनॉमी का बेजोड़ उदाहरण: दोहरा लाभ

इस पूरी योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (चक्रीय अर्थव्यवस्था) मॉडल है। इन प्लांटों से दो अत्यंत महत्वपूर्ण चीजें तैयार होंगी:

  1. बायो-सीएनजी (स्वच्छ ऊर्जा): जैविक कचरे के जैविक विघटन (Anaerobic Digestion) से उच्च गुणवत्ता वाली कंप्रेस्ड बायो-गैस बनेगी। यह गैस पारंपरिक पेट्रोल, डीजल और सीएनजी का एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प साबित होगी। इसका इस्तेमाल दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन (बसों) और औद्योगिक इकाइयों में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
  2. जैविक खाद (फर्टिलाइजर): गैस बनने के बाद जो अवशेष (Slurry) बचता है, उसे प्रोसेस करके उच्च कोटि की ऑर्गेनिक खाद बनाई जाएगी। इस खाद का इस्तेमाल दिल्ली के पार्कों, गार्डनों और आसपास के कृषि क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल पर लगाम लगेगी।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव

तेहखंड और ओखला में इन संयंत्रों के चालू होने से लैंडफिल साइट्स पर बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। जब कचरा खुले में नहीं सड़ेगा, तो मीथेन और अन्य जहरीली गैसों का उत्सर्जन रुक जाएगा। इसका सीधा फायदा दिल्ली की वायु गुणवत्ता (Air Quality Index) को मिलेगा। साथ ही, कचरे की बदबू से राहत पाकर आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को सांस लेने वाली बीमारियों और संक्रमण से बचाव हो सकेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का ‘क्लीन एंड ग्रीन’ संकल्प

इस समझौते के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण देने का संकल्प दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब दिल्ली सरकार कचरे को किसी भार के रूप में नहीं देखती, बल्कि इसे एक अमूल्य संसाधन मान रही है। उनका मानना है कि ये CBG प्लांट्स कचरा प्रबंधन के पुराने ढांचे को पूरी तरह बदल देंगे। धीरे-धीरे दिल्ली के कचरे के पहाड़ों को वैज्ञानिक तरीके से समाप्त किया जाएगा और शहर स्वच्छ ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा।

कागजों पर समझौता होने के बाद अब इस परियोजना को जमीनी स्तर पर उतारने की बारी है। नगर निगम और ऑयल इंडिया लिमिटेड की संयुक्त टीमें अब तेजी से काम करेंगी। इसके अंतर्गत तेहखंड और ओखला में प्लांट लगाने के लिए जमीन का चयन और औपचारिक आवंटन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद तकनीकी डिजाइन (Technical Blueprint) तैयार किया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू होगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now