संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की अस्थायी सदस्यता के लिए हो रही दावेदारी पर अब चीन की प्रतिक्रिया सामने आई है। चीन ने अपने बयान में कहा है कि वह भारत की उम्मीदवारी से संबंधित खबरों पर नजर बनाए हुए है। इस बीच, भारत ने अपने इस अभियान की शुरुआत कर दी है, जबकि इससे पहले ही अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे प्रमुख सदस्य देशों ने भारत के समर्थन की बात कही है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
भारत की यूएनएससी (UNSC) में दावेदारी और महत्वाकांक्षा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की भूमिका सदियों पुरानी है और यह देश समय-समय पर अपने महत्वाकांक्षी मिशनों के साथ विश्व मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करता रहा है। भारत 2028-29 के लिए यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए जोरशोर से प्रयास कर रहा है। इस पद के लिए चुनाव अगले साल जून में तय हैं, जिसमें भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा।
पिछले वर्षों में भारत पहले भी कई बार UNSC का सदस्य रह चुका है, जैसे 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में। भारत का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान संरचना में सुधार की आवश्यकता है, ताकि विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़े।
चीन का दृष्टिकोण और उसकी प्रतिक्रिया
चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो अधिकार भी है, लेकिन उसने भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन अब तक सार्वजनिक रूप से व्यक्त नहीं किया है। चीन का कहना है कि उसने भारत की उम्मीदवारी को लेकर खबरों पर नजर रखी है, लेकिन उसने अभी तक इस मसले पर कोई स्पष्ट समर्थन या विरोध जाहिर नहीं किया है।
यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन का रुख भारत के साथ संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति का संकेत भी हो सकता है। चीन का मानना है कि यूएनएससी में सुधार की प्रक्रिया में सभी पक्षों का संतुलित और उचित विचार-विमर्श होना चाहिए और इसमें किसी भी सदस्य की एकतरफा भागीदारी नहीं होनी चाहिए।
भारत का दृष्टिकोण और वैश्विक समर्थन
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत के यूएनएससी चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि भारत का दृष्टिकोण शांति, विश्वास, नियमों का सम्मान और ईमानदारी पर आधारित है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भारत चुना जाता है, तो वह सुरक्षा परिषद में अपने प्राथमिकताओं पर काम करेगा, जिनमें वैश्विक स्थिरता, विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व, और वैश्विक चुनौतियों का सामना करना शामिल है। भारत का मानना है कि उसकी दावेदारी इस बात का संकेत है कि वह वैश्विक मंच पर जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है और वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक विश्वसनीय भागीदार है।
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय समर्थन और मुकाबला
भारत के पक्ष में अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश पहले ही अपने समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। इन देशों का मानना है कि भारत का अनुभव, उसकी स्थिरता, और वैश्विक भूमिका उसे यूएनएससी में एक उपयुक्त सदस्य बनाती है।
दूसरी ओर, भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा, जो एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए अपनी दावेदारी कर रहा है। यह चुनाव न केवल भारत के लिए बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें जीत या हार का असर विश्व के समीकरणों पर पड़ेगा।
यूएनएससी में सुधार और भारत का लगातार आग्रह
भारत लंबे समय से यूएनएससी में सुधार की वकालत करता रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद की संरचना लगभग 80 वर्षों पुरानी है और यह आज के वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप नहीं है। भारत का दावा है कि विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि विश्व की जटिल समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
भारत का कहना है कि वर्तमान में सुरक्षा परिषद प्रभावी भूमिका निभाने में असमर्थ है, विशेषकर संघर्षों के दौरान। इसलिए, भारत का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र और इसकी संस्थाओं में सुधार आवश्यक है ताकि वे अधिक प्रभावी और समावेशी बन सकें।
भारत की कोशिशें इस बात का संकेत हैं कि वह वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ यूएनएससी में सुधार की दिशा में भी प्रयासरत है। चीन की प्रतिक्रिया और अन्य देशों का समर्थन इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संयुक्त राष्ट्र का चुनाव प्रक्रिया किस तरह से आगे बढ़ती है और भारत अपनी दावेदारी को मजबूत बनाने में कितनी सफलता हासिल करता है। यह कदम न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, बल्कि विश्व मंच पर उसकी भूमिका को भी मजबूत करने का प्रयास है।


























