इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने पार्टी के युवा सम्मेलन में एलान किया है कि सरकार स्कूलों में बुर्का और नकाब पर बैन लगाने के लिए कानून लाएगी। यह घोषणा होते ही चेहरा ढकने वाले कपड़ों को लेकर बहस एक बार फिर पूरी दुनिया में गरमा गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध किन-किन देशों में पहले से लागू है और सबसे पहले किस देश ने ऐसा कदम उठाया था? आइए जानते हैं पूरी डिटेल।
सबसे पहले फ्रांस ने लगाया था बुर्का पर बैन
दुनिया में सबसे पहले फ्रांस ने बुर्का और निकाब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का काम किया. फ्रांस की संसद ने 2010 में कानून पारित किया, जो अप्रैल 2011 से लागू हुआ। इस कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा पूरी तरह ढकना अपराध माना जाता है. उल्लंघन करने पर लगभग 150 यूरो का जुर्माना लग सकता है।
गौर करने वाली बात यह है कि फ्रांस ने 2004 में ही सरकारी स्कूलों में धार्मिक निशानियों पर रोक लगा दी थी, जिसमें हिजाब भी शामिल था। सरकार का तर्क था कि यह फैसला धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने इसका विरोध भी किया।
यूरोप के इन देशों में भी लागू है नकाब पर प्रतिबंध
फ्रांस के बाद नकाब पर प्रतिबंध की लहर पूरे यूरोप में फैल गई। बेल्जियम ने 2011 में इसे अपराध घोषित किया। ऑस्ट्रिया ने 2017, डेनमार्क ने 2018 में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर रोक लगाई। नीदरलैंड ने 2019 में आंशिक रूप से प्रतिबंध लगाया, जो सरकारी भवनों, स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक परिवहन पर लागू है. स्विट्जरलैंड में 2021 के जनमत संग्रह के बाद 2022 से ऐसा बैन लागू हुआ।
इटली में अभी 1975 के एक पुराने कानून के तहत बिना वजह चेहरा ढकने पर रोक है, लेकिन मेलोनी सरकार अब स्कूलों के लिए इसे और सख्त करना चाहती है।
एशियाई देशों में भी है बुर्का पर बैन
यह प्रतिबंध सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं है। कई मुस्लिम-बहुल एशियाई देशों में भी बुर्का पर बैन या सीमाएं लागू हैं:
- कजाकिस्तान — चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर रोक; तर्क चरमपंथ पर लगाम और फेस-रिकग्निशन सिस्टम की सही कार्यक्षमता।
- ताजिकिस्तान — 2024 में हिजाब समेत धार्मिक पोशाक पर सख्त कानून लागू।
- उज्बेकिस्तान — धर्मनिरपेक्ष पहचान के नाम पर पाबंदियां।
- श्रीलंका — 2019 के ईस्टर संडे हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से रोक।
- चीन — शिनजियांग प्रांत में सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध।
- किर्गिस्तान — 2024 में स्कूलों समेत सार्वजनिक क्षेत्र में पाबंदी।
- तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान — शिक्षण संस्थानों में सीमाएं।
अफ्रीकी देशों में सुरक्षा को लेकर लगे प्रतिबंध
अफ्रीका में यह फैसला ज्यादातर आतंकी हमलों के बाद लिया गया, क्योंकि हमलावर चेहरा ढककर पहचान छुपाते थे। चाड और कैमरून 2015 में बैन, जब बोको हराम के आत्मघाती हमलावरों के बुर्का का इस्तेमाल करने की खबरें आईं। कांगो गणराज्य 2015 में सार्वजनिक स्थानों पर रोक। गैबॉन 2018 में प्रतिबंध लागू।ट्यूनीशिया 2019 में सरकारी संस्थानों और दफ्तरों में नकाब पहनने पर रोक; वजह रही पहचान की पुष्टि की जरूरत।

























