महाराष्ट्र में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध अब साझा मंच पर दिखाई देने लगा है। रविवार को शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के नेतृत्व में मुंबई में रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। रैली की खास बात यह रही कि इसमें किसी पार्टी का झंडा या चुनाव चिह्न नहीं था। कार्यकर्ताओं से केवल तिरंगा लेकर आने को कहा गया था।
रैली सुबह बायकुला स्थित रिचर्डसन एंड क्रूड्स से शुरू हुई और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के पास BMC मुख्यालय की ओर बढ़ी। आयोजकों ने इसे किसी एक पार्टी का कार्यक्रम बताने के बजाय चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाने वाला साझा विरोध बताया। राष्ट्रध्वज को केंद्र में रखने का फैसला भी इसी संदेश का हिस्सा था।
SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष की आपत्ति
चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई थी। इसके बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की बात सामने आई। कई मतदाताओं को नोटिस भेजकर सूची में बने रहने के लिए दस्तावेज जमा करने को कहा गया है।
विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। कांग्रेस समेत कई दल इसे “वोट चोरी” का मुद्दा बता रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके उद्देश्यों पर बहस जारी है। इस विवाद ने मतदाता सूची की शुद्धता, दस्तावेजों की मांग और आम नागरिकों की चुनावी भागीदारी जैसे सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
राज ठाकरे ने रैली से पहले कहा था कि इसमें किसी पार्टी का झंडा नहीं होगा और केवल तिरंगा रहेगा। उनके मुताबिक, कार्यक्रम का एजेंडा चुनाव आयोग और उसके कामकाज पर चर्चा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि मुद्दे से सहमत कोई भी व्यक्ति—भाजपा समेत किसी भी दल का समर्थक—रैली में शामिल हो सकता है। इस बयान को कार्यक्रम को पार्टीगत दायरे से बाहर रखने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
अभिजीत दीपके का प्रदर्शन
ठाकरे ब्रदर्स की रैली का तरीका अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से मिलता-जुलता था। दीपके ने शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के लिए लोगों से तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। उद्धव ठाकरे ने भी उस पहल को समर्थन दिया था। दोनों कार्यक्रमों में साझा संदेश यह था कि विरोध का केंद्र किसी पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े सवाल हों।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अलग-अलग लोग अपने तरीके से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन उनका एजेंडा एक ही है। इस बीच, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने भी संयुक्त रैली को समर्थन दिया। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी पार्टी शिवसेना (UBT) और MNS के प्रदर्शन के साथ है। इससे रैली को विपक्षी समर्थन का व्यापक स्वरूप मिला।
उद्धव ठाकरे और चुनाव आयोग विवाद
विपक्षी एकजुटता का नया संकेत?
बिना पार्टी झंडों के आयोजित ठाकरे ब्रदर्स की रैली ने प्रतीकात्मक राजनीति और विपक्षी एकजुटता—दोनों पर ध्यान खींचा। तिरंगे को साझा पहचान बनाकर आयोजकों ने यह दिखाने की कोशिश की कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल किसी एक दल तक सीमित नहीं हैं। शरद पवार की पार्टी का समर्थन भी इसी व्यापक राजनीतिक संदेश को मजबूत करता है।
हालांकि, रैली का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि मतदाता सूची और SIR को लेकर उठाए गए सवालों पर आगे क्या चर्चा होती है। फिलहाल मुंबई का यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता अधिकारों और विपक्षी दलों के साझा विरोध को लेकर नई बहस का केंद्र बन गया है।
























