पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किसी विशेष उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में यह पहला मौका था जब सम्राट चौधरी ने परेड की सलामी ली और तिरंगा झंडा फहराया। इस गौरवशाली अवसर पर उन्होंने बिहार समेत पूरे देश की जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सीएम ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता सेनानियों के अमूल्य त्याग और बलिदान को नमन किया और कहा कि उनकी ही कुर्बानियों के कारण हम आज स्वतंत्र वायु में सांस ले रहे हैं।
इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण को सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि राज्य के भविष्य के लिए एक व्यापक ‘रोडमैप’ पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक विकास, सामाजिक सुरक्षा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से रोजगार सृजन को लेकर पूरी तरह से संकल्पित है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बदलाव की नींव
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में आए परिवर्तनों को गिनाते हुए सीएम ने बताया कि बिहार में नए विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के साथ-साथ प्रखंड स्तर पर डिग्री कॉलेज खोले गए हैं, ताकि ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की भटकना न पड़े। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करते हुए हर जिले में मॉडल अस्पताल का निर्माण किया गया है। उन्होंने बताया कि इन अस्पतालों के बनने से मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करने यानी ‘रेफर’ होने की प्रवृत्ति में काफी कमी आई है।
5 लाख करोड़ के निवेश और ‘एक परिवार-एक नौकरी’ का सपना
आर्थिक रूप से मजबूत बिहार बनाने के लिए सरकार ने कृषि आधारित उद्योगों पर विशेष फोकस किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनमें अधिकतम स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। किसानों की उपज को उद्योगों से जोड़ने की योजना पर काम जारी है। उन्होंने एक बड़े लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि नवंबर माह तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का टारगेट रखा गया है।
इसके अलावा, सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना यह है कि प्रत्येक परिवार से कम से कम एक व्यक्ति को सरकारी या गैर-सरकारी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जाए। चीनी उद्योग को बढ़ावा देते हुए राज्य में 25 चीनी मिलों को चालू या नई स्थापित करने की तैयारी चल रही है। समाजिक सुरक्षा के तहत इस दिन 30 हजार भूमिहीन परिवारों को आवास निर्माण के लिए जमीन वितरित की गई।
बिजली क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ और सोलर रिवोल्यूशन
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों और समाधानों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि बिहार की जनता को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिस पर सरकार को सालाना लगभग 23 हजार करोड़ रुपये का भार उठाना पड़ रहा है। इस वित्तीय बोझ को कम करने और बिहार को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सस्ती बिजली पर जोर दिया जा रहा है।
इसके लिए राज्य भर में ‘रूफ टॉप सोलर प्लांट’ लगाने का विशाल अभियान चलाया जा रहा है, ताकि बिजली के लोड को कम किया जा सके। कृषि क्षेत्र के लिए भी बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिसके तहत किसानों से मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिल वसूला जा रहा है। वर्तमान में 60 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकार से जोड़ा गया है।
बारिश की चुनौती और गांधी मैदान में अभूतपूर्व व्यवस्था
इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह की चुनौती मौसम था। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली थी। दर्शक दीर्घा को बारिश से बचाने के लिए लगभग 80,000 वर्गफीट के विशाल क्षेत्र में शेड का निर्माण कराया गया, जिससे कार्यक्रम बारिश के बावजूद बिना किसी व्यवधान के संपन्न हो सका।
ड्रोन और सीसीटीवी से चप्पे-चप्पे पर नजर
सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर इस बार गांधी मैदान को चार अलग-अलग सेक्टरों और सब-सेक्टरों में बांटा गया। प्रवेश द्वारों को भी अत्यंत व्यवस्थित तरीके से तय किया गया। वीआईपी और विशिष्ट अतिथियों के लिए गेट नंबर 10, पीला कार्ड धारक मीडिया प्रतिनिधियों के लिए गेट नंबर 9, महिलाओं के लिए गेट 12 और 13, विद्यार्थियों के लिए गेट 2, 3 और 4 तथा आमजन के लिए गेट नंबर 6 और 7 का इस्तेमाल किया गया।
विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांधी मैदान और आसपास के क्षेत्रों में 62 स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिस बल तैनात किया गया था। निगरानी के लिए हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ गांधी मैदान में ड्रोन कैमरों से भी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी गई। पुलिस मुख्यालय स्थित ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ से इस पूरे आयोजन की लाइव मॉनिटरिंग की गई। जिला नियंत्रण कक्ष को तीन पालियों में चलाया गया, जहां अधिकारियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की गई थी।

























