बिहार में बाढ़ का कहर जरूर थमा है, लेकिन कई जिलों की हालत अब भी दयनीय बनी हुई है। पानी उतरने के बावजूद हजारों परिवार टूटे घर, बर्बाद हुई फसल और रोजमर्रा की मुश्किलों से दो-दो हाथ कर रहे हैं। ऐसे ही असहज समय में बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर और ‘मैसेंजर ऑफ होप’ के नाम से मशहूर सोनू सूद आज बाढ़ प्रभावित बेगूसराय पहुंच गए। पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले तबाह हुए इलाकों का जायजा लिया और इसके बाद पीड़ित परिवारों से सीधे बातचीत कर उनका हाल-चाल पूछा।
बाढ़ पीड़ितों से मिले सोनू सूद
बेगूसराय दौरे के दौरान सोनू सूद ने बाढ़ पीड़ितों के बीच राशन, दवाइयों और दैनिक जरूरत की सामग्री का वितरण किया। गांव-गांव जाकर उन्होंने लोगों से उनकी परेशानियों के बारे में खुद जानकारी ली। पीड़ितों से मिलने के बाद एक्टर ने कहा कि बिहार के कई जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। जी हां, जलस्तर में गिरावट आई है, लेकिन बाढ़ का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई इलाकों में लोगों की दिक्कतें वैसी की वैसी बनी हुई हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इस वक्त सबसे जरूरी है कि लोग एक-दूसरे का हौसला बढ़ाएं और अपनी क्षमता के मुताबिक पीड़ितों की मदद तक पहुंचें।
‘बिहार मेरे खून में बसा है’
बेगूसराय में बाढ़ पीड़ितों से बातचीत के दौरान सोनू सूद ने भावुक अंदाज में कहा कि बिहार उनके रग-रग में बसा है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग देश के कोने-कोने में जाकर मेहनत-मजदूरी करते हैं और हर क्षेत्र में अपना योगदान देते हैं। अपनी कड़ी मेहनत से वे अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी की मदद करना सिर्फ किसी एक इंसान की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का फर्ज है। हर व्यक्ति को आपदा के इस घड़ी में आगे आना चाहिए। सोनू सूद ने बिहारवासियों को भरोसा दिलाया कि जब भी राज्य में आपदा की स्थिति पैदा होगी, वे पीड़ितों के साथ खड़े मिलेंगे। उनके मुताबिक राहत पहुंचाना और लोगों के सुख-दुख में शरीक होना — दोनों जरूरी हैं।
इस साल बिहार में किस तरह भयानक रही बाढ़ की स्थिति?
बता दें कि इस साल बिहार में बाढ़ ने कई जिलों में खतरनाक रूप धारण कर लिया था। लगातार हो रही तेज बारिश और नदियों के उफान पर आने से आधे राज्य की हालत बदतर हो गई। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक और बागमती जैसी बड़ी नदियों के तांडव ने निचले इलाकों में जिंदगी ठप कर दी।
बता दें कि बड़ी संख्या में गांव पानी-पानी हो गए और लाखों लोग प्रभावित हुए। कई जगहों पर सड़कें और संपर्क मार्ग डूब गए। गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ा। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ।
प्रशासन की राहत पहल
प्रशासन ने बचाव और राहत के लिए तैयारी जरूर की। राहत शिविर लगाए गए, सामुदायिक रसोई चलाई गईं और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई। इसके साथ ही एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें डूबे इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी रहीं।
लेकिन इन सबके बावजूद बाढ़ का असर पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। पानी उतरने के बाद लोगों की जिंदगी में नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं — घरों की सफाई, काम-रोजगार का संकट, पशुओं के लिए चारे की कमी और फसल के नुकसान की भरपाई जैसी चुनौतियां अब सामने खड़ी हैं।
सोनू सूद ने बिहार सरकार से मांगा बाढ़ का स्थायी समाधान
बेगूसराय में सोनू सूद ने बिहार सरकार से भी एक बड़ी अपील की। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ से जूझ रहे बिहार के लिए अब स्थायी समाधान निकालने की दिशा में कारगर कदम उठाने की जरूरत है। उनके मुताबिक सरकार प्रयास जरूर कर रही है, लेकिन ऐसे ठोस इंतजाम चाहिए, जिनसे हर साल आने वाली बाढ़ से आम लोगों को छुटकारा मिल सके।
सोनू सूद ने कहा कि बिहार के लोगों से उनका जुड़ाव लगातार गहरा हो रहा है और ऐसे में बिहार के प्रति उनकी एक जिम्मेदारी भी बनती है, जिसे वे हर हाल में निभाएंगे।


























