भाजपा का गढ़ ढहा, एग्जिट पोल में प्रशांत किशोर की जीत

बात करें बांकीपुर सीट की, तो यह पटना का एक ऐसा क्षेत्र है जिसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अटल किला माना जाता रहा है। भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन ने इस सीट से लगातार पांच बार विधायक के रूप में जीत दर्ज की थी।

पचास फीसदी वोट के साथ पीके की बांकीपुर में जीत (फाइल फोटो)

HIGHLIGHTS

  • बांकीपुर में RJD को भारी नुकसान, पीके की बंपर जीत
  • नितिन नवीन का किला ढहा, एग्जिट पोल में पीके आगे
  • बांकीपुर में पीके की रिकॉर्ड जीत, बीजेपी और RJD फेल
  • 3 अगस्त से पहले झटका, एग्जिट पोल में पीके जीत

Bihar Bankipur By-election 2026: बिहार की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चित नाम प्रशांत किशोर का है, जो अब एक राजनीतिक रणनीतिकार से निकलकर सीधे मैदान में उतर चुके हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए मतदान के बाद जारी किए गए एग्जिट पोल (Exit Poll) के आंकड़े कुछ ऐसा ही संकेत दे रहे हैं जो पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से ध्वस्त कर सकते हैं। अलग-अलग सर्वे एजेंसियों के नतीजे एक जैसे हैं, जिनमें जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत का दावा किया गया है।

बांकीपुर सीट और इस चुनाव का महत्व

बात करें बांकीपुर सीट की, तो यह पटना का एक ऐसा क्षेत्र है जिसे भाजपा का अटल किला माना जाता रहा है। भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन ने इस सीट से लगातार पांच बार विधायक के रूप में जीत दर्ज की थी। राष्ट्रीय जिम्मेदारी संभालने के कारण उनके इस्तीफे से यह सीट खाली हुई और उपचुनाव की नौबत आई। इसलिए इस चुनाव को न सिर्फ एक सीट की जीत-हार, बल्कि भाजपा की प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा था।

मतदान का आंकड़ा और मैदान में उतरे दिग्गज

गुरुवार (30 जुलाई) को इस उपचुनाव के लिए मतदान हुआ, जिसमें करीब 34 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अगर हम इसे 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के मुकाबले देखें, तो यह आंकड़ा लगभग 5 प्रतिशत कम है। कम मतदान प्रतिशत को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में अलग-अलग राय है, हालांकि इसे शहरी उदासीनता के रूप में भी देखा जा रहा है। मैदान में कुल 25 उम्मीदवारों की भरमार थी, लेकिन मुख्य मुकाबला तीन नामों तक सिमटकर रह गया—भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज के प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की रेखा गुप्ता।

एग्जिट पोल के आंकड़ों में कैसे दिख रहा है प्रशांत किशोर का दबदबा?

मतदान समाप्त होते ही कई पोलिटिकल रिसर्च एजेंसियों ने अपने सर्वे के नतीजे सामने रखे हैं। तीन प्रमुख एग्जिट पोल की मानें तो भाजपा नितिन नवीन के इस किले को बचाने में नाकाम साबित होती दिख रही है। आइए इन एजेंसियों के आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं:

  1. जनमत पोल्स (Janmat Polls): इस एजेंसी के सर्वे में प्रशांत किशोर को सबसे बड़ी जीत का दावा किया गया है। अनुमान के मुताबिक, जन सुराज पार्टी को 49 से 52 प्रतिशत के बीच वोटशेयर मिल सकता है। वहीं, भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा दूसरे स्थान पर बने हुए हैं, जिन्हें 34 से 36 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद जताई गई है। RJD की रेखा गुप्ता के लिए यह सर्वे निराशाजनक रहा है, जिन्हें महज 9 से 10 प्रतिशत वोट ही जाने का अनुमान है। बाकी के 3 से 4 प्रतिशत वोट निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में जा सकते हैं।
  2. डीवी रिसर्च (DV Research): इस सर्वे एजेंसी ने अपने आंकड़ों को थोड़ा अलग तरीके से पेश किया है, लेकिन नतीजे का फैसला पीके के पक्ष में ही है। डीवी रिसर्च ने 1580 मतदाताओं से सीधी बातचीत के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। इसके अनुसार, प्रशांत किशोर को 43 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है। हालांकि, भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा उनके पीछे महज 4 प्रतिशत की दूरी पर हैं और उन्हें 39 प्रतिशत वोटशेयर मिल सकता है। इस सर्वे में RJD को थोड़ी राहत दिखती है, जहां रेखा गुप्ता को 15 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।
  3. पोल पंडित (Poll Pundit): इस रिसर्च एजेंसी के नतीजे प्रशांत किशोर के लिए सबसे अधिक राहत भरे हैं। पोल पंडित के अनुसार, बांकीपुर में पीके निर्णायक और रिकॉर्ड बढ़त से जीत दर्ज कर सकते हैं। सर्वे में दावा किया गया है कि जन सुराज पार्टी आधे से अधिक यानी 50% से ऊपर का वोट लेकर आ सकती है। इसके विपरीत, भाजपा के वोट प्रतिशत में भारी गिरावट आएगी और नीरज सिन्हा 38 से 42 प्रतिशत के बीच सिमटकर रह जाएंगे। पोल पंडित के अनुसार तेजस्वी यादव की पार्टी RJD को सबसे बड़ा नुकसान होगा और उनकी प्रत्याशी को महज 5 प्रतिशत वोट ही मिल पाएगा।

तेजस्वी यादव की RJD के लिए क्यों खतरे की घंटी?

इन तीनों एग्जिट पोल में एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आई है और वह है राष्ट्रीय जनता दल का बुरा प्रदर्शन। बांकीपुर जैसी शहरी सीट पर महागठबंधन की प्रमुख पार्टी का सिमटकर 5 से 15 प्रतिशत (अलग-अलग एजेंसियों के अनुसार) तक रह जाना यह दर्शाता है कि यहां उनका पारंपरिक वोटबैंक या तो प्रशांत किशोर की ओर खिसक गया है या फिर मतदान से वंचित रह गया है। यह आंकड़ा आरजेडी के लिए चिंता का विषय जरूर है।

3 अगस्त को आएगा असली नतीजा

हालांकि, एग्जिट पोल के ये आंकड़े कितने सटीक हैं, इसका जवाब 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही मिल पाएगा। एग्जिट पोल कैसे काम करते हैं? दरअसल, ये एजेंसियां मतदान के बाद मतदाताओं से फेस-टू-फेस बातचीत करती हैं और उनसे उनके मतदान का राज जानने की कोशिश करती हैं। फिर उस नमूने के आधार पर पूरी सीट के रिजल्ट का अनुमान लगाया जाता है।

बिहार समेत पूरे देश के चुनावी इतिहास में कई बार देखा गया है कि एग्जिट पोल के अनुमान और असली चुनावी नतीजों (Election Results) के बीच धरती आसमान का अंतर होता है। कभी-कभी मतदाता सर्वे में सच नहीं बताते, तो कभी नमूना (Sample Size) इतना छोटा होता है कि वह पूरे इलाके का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर पाता।

फिलहाल, तीनों बड़े एग्जिट पोल बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत की ओर इशारा कर रहे हैं। अगर 3 अगस्त को ये आंकड़े वास्तविकता में बदलते हैं, तो यह साबित होगा कि बिहार की राजनीति में एक नई ताकत का उदय हो चुका है और भाजपा का पुराना किला भी अब अभेद्य नहीं रहा। लेकिन अभी के लिए सभी नजरें मतगणना कक्षों पर टिकी हुई हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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