Chhattisgarh Political News: छत्तीसगढ़ की राजनीतिक राजधानी रायपुर में एक बार फिर सियासी तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। प्रधानमंत्री आवास घेराव के मुद्दे को लेकर भाजपा द्वारा निकाले गए विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस मुख्यालय (राजीव भवन) के बाहर जमकर उपद्रव हुआ। इस हिंसक झड़प में पुलिस बल को निशाना बनाया गया, जिसके चलते करीब एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए 12 नामजद कांग्रेस नेताओं और कई अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ नवीन भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया है।
प्रधानमंत्री आवास घेराव का था मुद्दा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास का घेराव किए जाने के विरोध में भाजपा ने रायपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय का घेराव करने की रणनीति बनाई थी। इस प्रदर्शन में भाजपा के कई वरिष्ठ मंत्री और पदाधिकारी सड़कों पर उतरे हुए थे। जैसे ही भाजपा का प्रदर्शनकारी जत्था राजीव भवन पहुंचा, स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं के घेराव के दौरान राजीव भवन की तरफ से भी कांग्रेस कार्यकर्ता जमकर नारेबाजी करते हुए बाहर निकल आए। दोनों गुटों के बीच जब आमने-सामने की स्थिति बन गई, तो मौजूदा पुलिस बल ने बीच-बचाव करने और बैरिकेडिंग खींचकर दोनों पक्षों को अलग करने का प्रयास किया। हालांकि, भीड़ में उत्तेजना इतनी अधिक थी कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बात नहीं मानी और बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश शुरू कर दी।
पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस दौरान भीड़ ने अचानक हिंसा का रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस बल पर काच की बोतलें, ईंट-पत्थर, लकड़ी के डंडे और जूते-चप्पल जैसी तीखी वस्तुएं फेंकी गईं। जब पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने लगे, तो उनके साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। भीड़ के बीच फंसकर कई जवान बेहद घुटने लगे। अंततः भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करने पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
16 जवानों को आई चोटें, अस्पताल में भर्ती
इस अशांति में सबसे ज्यादा नुकसान पुलिस बल को हुआ। करीब 16 पुलिसकर्मी इस उग्रता के शिकार बने। सब-इंस्पेक्टर (पीएसआई) देवराज सिंह पर कथित तौर पर बोतल से हमला किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। इसी तरह महिला आरक्षक सीमा बंजारे के हाथ में गंभीर चोट लगी। एक अन्य घायल जवान कलेश्वर वर्मा ने बताया कि भीड़ के बीच दबकर उन्हें सांस लेने में भारी दिक्कत हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। कई अन्य जवानों के सिर, हाथ और पैरों में चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
पुलिस कमिश्नर ने किया अस्पताल का दौरा
घटना की गंभीरता को देखते हुए रायपुर के पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला बुधवार देर रात्रि सीधे रामकृष्णा केयर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भर्ती सभी घायल पुलिसकर्मियों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना और चिकित्सकों से उपचार की पूरी जानकारी ली। उन्होंने घायल जवानों को बेहतरीन और त्वरित इलाज मुहैया कराने के सख्त निर्देश अस्पताल प्रशासन को दिए। इस दौरान डीसीपी (मध्य) तारकेश्वर पटेल, एसीपी नीलेश द्विवेदी और टीआई राजेश मरई जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे।
खम्हारडीह थाने में दर्ज हुआ केस
घटना के बाद खम्हारडीह थाने के प्रभारी निरीक्षक (टीआई) भावेश कुमार गौतम की ओर से एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने कांग्रेस के 12 प्रमुख नेताओं को नामजद आरोपी बनाया है। इन नेताओं में सुनील कुकरेजा, विनोद तिवारी, सकलेन कामदार, आकाश तिवारी, अजीत कुकरेजा, हनी बग्गा, शांतनु झा, गावेश साहू, खुबी डहरिया, सागर दुल्हानी, अजीज भिंसरा और अमित तिवारी के नाम शामिल हैं।
इन सभी पर नई आपराधिक प्रणाली यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सख्त धाराओं के तहत सरकारी काम में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, बल का प्रयोग करने और जानबूझकर कानून-व्यवस्था को चरमराने का आरोप लगाया गया है।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह मामला सिर्फ नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगा। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वीडियो ग्राफ्स को अभी खंगाला जा रहा है। पुलिस क्राइम ब्रांच और स्थानीय थाना प्रबंधन मिलकर उन लोगों की पहचान कर रहा है जो भीड़ में छिपकर पथराव कर रहे थे। जांच में जैसे-जैसे नए साक्ष्य सामने आएंगे, विवेचना के दौरान अन्य उपद्रवियों के नाम भी इस मामले में जोड़े जाने की पूरी संभावना है।
इस पूरे घटनाक्रम ने रायपुर में सियासी माहौल को काफी गर्मा दिया है। एक तरफ जहां भाजपा इसे कांग्रेस की फेल कार्यप्रणाली और गुंडागर्दी करार दे रही है, वहीं कांग्रेस प्रशासन पर भाजपा कार्यकर्ताओं को उकसाने और एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगा रही है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


























