Mini Bank Fraud :अंजनगांव सुर्जी तहसील के मुर्हा देवी गांव में ग्रामीणों की बेहतरी और बैंकिंग सुविधाओं को द्वार पर पहुंचाने के लिए शुरू किया गया मिनी बैंक (ग्राहक सेवा केंद्र) अब ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गया है। यहां सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने पूरी बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के इस ग्राहक सेवा केंद्र के संचालक पर ग्रामीण महिलाओं के भरोसे को तोड़ते हुए फर्जी रसीदों के जरिए लाखों रुपये का गबन करने का आरोप लगा है। आरोपी संचालक ने इलाके की 10 से 12 महिला बचत समूहों (SHGs) को अपना शिकार बनाकर करीब 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है।
भरोसे का फायदा उठाकर की गई ठगी
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला बचत समूह आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक माध्यम माने जाते हैं। इन समूहों की महिलाएं मेहनत करके पैसा जमा करती हैं और बैंक से कर्ज लेकर अपना व्यवसाय शुरू करती हैं। मुर्हा देवी गांव में भी कई ऐसे समूह सक्रिय थे, जो अपनी बचत और कर्ज की राशि का लेनदेन गांव में ही खुले इस मिनी बैंक से करते थे। महिलाओं को शहर जाकर बैंक के चक्कर काटने से राहत मिलती थी, लेकिन यही राहत अब उनके लिए मुसीबत बन गई है।
गबन का खुलासा तब हुआ जब मुर्हा देवी की एक महिला बचत समूह की सदस्य अपना पुराना कर्ज चुकाने के बाद नया लोन लेने के लिए सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा पहुंचीं। महिलाओं ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि उन्होंने मिनी बैंक संचालक के माध्यम से समय-समय पर किस्तें जमा कराई हैं और अब उन्हें नया कर्ज चाहिए।
बैंक में उड़े महिलाओं के होश
बैंक अधिकारियों ने जब महिलाओं के खाते का रिकॉर्ड देखा, तो उन्हें बड़ा झटका लगा। बैंक ने नया कर्ज देने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार उनका पिछला लोन अभी भी बकाया था। बैंक की बात सुनकर महिलाओं के होश उड़ गए। उन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने तो सारे पैसे जमा करा दिए हैं और उनके पास इसकी रसीदें भी मौजूद हैं।
जब महिलाओं ने बैंक अधिकारियों के सामने अपनी किस्तों की रसीदें पेश कीं, तो वहां मौजूद सभी लोग दंग रह गए। गहन जांच के बाद पता चला कि जिन रसीदों को महिलाएं सच मानकर रखे हुए थीं, वे सभी पूरी तरह से फर्जी थीं। आरोपी मिनी बैंक संचालक ने बैंक के आधिकारिक लोगो (Logos) का उपयोग करकर इतनी शातिराना तरीके से फर्जी रसीदें तैयार की थीं कि आम ग्रामीण महिलाओं के लिए उन्हें पहचानना मुश्किल था।
तिगुना हो सकता है घोटाले का आंकड़ा
अभी की प्राथमिक जांच में तीन बचत समूहों से करीब 10 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई है। हालांकि, अंजनगांव सुर्जी क्षेत्र में इस मिनी बैंक से जुड़े कई अन्य समूह भी हैं। अभी शेष बचत समूहों के खातों की जांच होना बाकी है। जांच एजेंसियों को शक है कि जैसे-जैसे अन्य खातों की स्क्रूटनी होगी, घोटाले की रकम और बढ़ सकती है। यह आंकड़ा 10 लाख से काफी आगे जा सकता है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
समझौते की कवायद और पुलिस की चुप्पी
सूत्रों के अनुसार, मामला बढ़ने के बाद आरोपी संचालक और कुछ बिचौलियों द्वारा मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। पैसा डूबने के डर से महिलाओं और बैंक पदाधिकारियों के एक वर्ग द्वारा आरोपी संचालक से चेक लेकर समझौता करने की भी चर्चा है। हालांकि, यह गैर-कानूनी व्यवस्था है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
इस पूरे प्रकरण पर सेंट्रल बैंक अंजनगांव सुर्जी के शाखा प्रबंधक राहुल वाटोलकर (Rahul Watolkar) का कहना है कि मामला बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए बताया कि जब तक यह खबर मीडिया में लिखी जा रही थी, तब तक पुलिस में इस मामले की कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। शिकायत की कमी कार्रवाई में बाधा बन रही है।
जांच जारी, बैंक ने दिए ये निर्देश
शाखा प्रबंधक राहुल वाटोलकर ने बताया कि व्यावसायिक सहायक (Business Correspondent) के पास जो राशि ग्रामीणों से जमा हुई थी, वह बैंक के खातों में कभी पहुंची ही नहीं। प्राथमिक जांच में 10 लाख रुपये के हेरफेर की आशंका को मजबूती मिली है। फिलहाल सभी रसीदों की जांच की जा रही है। बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार का संदेह होने पर या बड़ी राशि का लेनदेन करते समय वे सीधे बैंक शाखा से संपर्क करें या टोल-फ्री नंबर पर सूचना दें। उन्होंने यह भी कहा कि केवल मिनी बैंक या बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट पर भरोसा करना कई बार जोखिम भरा हो सकता है।























