बेगूसराय रेप केस को लेकर शिवसेना नेता शायना एनसी ने बिहार में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बेगूसराय के एक होटल में युवती के साथ हुई कथित दरिंदगी और उसका वीडियो वायरल किए जाने को बेहद गंभीर अपराध बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। शायना ने कहा कि यह केवल यौन हिंसा का मामला नहीं, बल्कि पीड़िता की गरिमा और निजता पर डिजिटल हमला भी है।
उन्होंने जमुई, समस्तीपुर और बांका में महिलाओं के खिलाफ सामने आई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक चिंता के तौर पर देखा जाना चाहिए। शायना के मुताबिक, महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज और प्रशासन—दोनों को आवाज उठानी होगी।

‘यह सिर्फ रेप नहीं, डिजिटल मर्डर है’
शायना एनसी ने बेगूसराय की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कथित अपराध के बाद पीड़िता का वीडियो फोन से प्रसारित किया जाना और भी गंभीर है। उन्होंने कहा, “रेप के बाद उसका वीडियो फोन से वायरल किया, यह सिर्फ रेप नहीं है, एक डिजिटल मर्डर है। आईटी एक्ट लागू करना ही चाहिए। सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मौत की सजा मिलनी चाहिए।”
उनकी इस टिप्पणी ने यौन हिंसा के साथ-साथ पीड़िता की पहचान और निजता की सुरक्षा पर भी ध्यान खींचा है। किसी भी यौन अपराध पीड़िता की पहचान उजागर करना या उससे जुड़ा वीडियो साझा करना उसकी गरिमा और सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मामलों में वीडियो को आगे भेजने के बजाय पुलिस या संबंधित मंच को सूचना देना जरूरी है।
शायना ने बिहार में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
शायना एनसी ने अपने बयान में कहा कि जमुई में छात्रा, समस्तीपुर में नाबालिग और बांका में दलित युवती से जुड़ी घटनाओं के बाद अब बेगूसराय का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा, “यह एक अलग-थलग घटना नहीं है, एक पैटर्न है। हम सबको आवाज उठानी होगी।”
शायना एनसी ने बेगूसराय की पीड़िता को जीविका दीदी बताते हुए कहा कि वह गांव-गांव जाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम करती हैं। उनके अनुसार, ऐसी महिला के साथ कथित तौर पर दिनदहाड़े होटल में हुई घटना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा, “बिहार की एक बेटी का वीडियो वायरल करना—इससे नीच हरकत हो ही नहीं सकती है।”
बेगूसराय मामले में क्या हुआ?
पुलिस के अनुसार, घटना 27 सितंबर की है। पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में हथियार के बल पर कथित दुष्कर्म और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। मामले में नामजद दोनों आरोपियों—रोहित सहनी और विक्रम सहनी—को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विक्रम सहनी को बेगूसराय से गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य आरोपी बताए जा रहे रोहित सहनी को समस्तीपुर से पकड़ा गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान घटना से जुड़े साक्ष्य, आरोपियों की भूमिका और वीडियो प्रसारित किए जाने के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी।
वीडियो वायरल पर भी हो सकती है कार्रवाई
बेगूसराय रेप केस ने यह सवाल भी उठाया है कि यौन हिंसा से जुड़े वीडियो या तस्वीरें साझा करने वालों पर किस तरह की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री को पोस्ट करना, भेजना या दोबारा साझा करना उसे और मानसिक आघात पहुंचा सकता है। ऐसा कंटेंट दिखने पर उसे डाउनलोड या फॉरवर्ड न करें। संबंधित सोशल मीडिया मंच पर रिपोर्ट करें और पुलिस को जानकारी दें।
शायना एनसी ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। हालांकि किन धाराओं में मामला दर्ज होगा, यह जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस तथा कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। पीड़िता की पहचान से जुड़ी किसी भी जानकारी को प्रकाशित या प्रसारित करने से बचना भी जरूरी है।
महिला सुरक्षा और जवाबदेही पर बहस
इस घटना के बाद बिहार में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक चर्चा तेज हुई है। शायना एनसी ने कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके बयान का मुख्य संदेश यह है कि यौन हिंसा को केवल एक अपराध तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता—पीड़िता की सुरक्षा, निजता और सम्मान की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
फिलहाल, बेगूसराय पुलिस दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी। इस बीच, पीड़िता की पहचान या कथित वीडियो साझा न करना और अपुष्ट दावों से बचना बेहद महत्वपूर्ण है।























