भारत की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे की रीढ़ कही जाने वाली श्रमिक शक्ति लंबे समय से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है। इसी क्रम में भारतीय मजदूर संघ (BMS) के प्रांतीय आह्वान पर जिला बलौदा बाजार में ‘मांग दिवस’ का आयोजन किया गया। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष श्रमिकों एवं परिवहन कर्मचारियों से जुड़ी उन लंबित मांगों को उठाना था, जिनके निराकरण होने में सरकारें लगातार असफल साबित हो रही हैं।
गीता सोनी के नेतृत्व में दिखा जनशक्ति का दमखम
इस एक दिवसीय आंदोलन को सफल बनाने की जिम्मेदारी भारतीय मजदूर संघ प्रदेश द्वारा एक प्रखर श्रमिक नेत्री गीता सोनी को दी गई थी। प्रदेश कार्य समिति सदस्य एवं भारतीय प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गीता सोनी के कुशल मार्गदर्शन में कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई। वहीं, भारतीय मजदूर संघ जिला बलौदा बाजार के कोषाध्यक्ष अशोक कुमार साहू के नेतृत्व में मैदानी स्तर पर कार्यकर्ताओं की टोली ने पूरे जिले भर से श्रमिकों को एक मंच पर लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
श्रमिकों का वो मेनिफेस्टो जिसे सरकारों ने नजरअंदाज किया
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपना था। यह ज्ञापन कोई सामान्य याचिका नहीं थी, बल्कि श्रमिक वर्ग की जीवनशैली को बेहतर बनाने वाली 13 सूत्रीय मांगों का एक गठबंधन था। इन मांगों को विस्तार से समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि ये आज के दौर में अत्यंत प्रासंगिक हैं:
- परिवहन कर्मचारियों का कल्याण बोर्ड: ऑटो और निजी परिवहन में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी सबसे अधिक जोखिम भरी मानी जाती है। सड़क दुर्घटनाओं और अस्थायीता के बीच एक कल्याण बोर्ड की मांग उनके लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है।
- सड़क सुरक्षा समिति में यूनियन को शामिल करना: जमीनी स्तर पर चलने वाले वाहन चालकों की समस्याएं सिर्फ वे ही जानते हैं। सड़क सुरक्षा समिति में यूनियन प्रतिनिधियों की भागीदारी से नीतिगत निर्णय अधिक प्रभावी बनेंगे।
- 30,000 रुपये न्यूनतम वेतन: महंगाई के इस दौर में 30 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन एक जरूरी कदम है, ताकि कोई भी श्रमिक अपने परिवार का पेट भरने के लिए अमर्यादित कर्ज न लेना पड़े।
- ESIC और EPF की सीमा वृद्धि: वर्तमान में ईएसआईसी और ईपीएफ की वेतन सीमा इतनी कम है कि बड़ी तादाद में आने वाले कर्मचारी इसके दायरे से बाहर रह जाते हैं। इस सीमा को बढ़ाकर अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा कवच में लाने की मांग रखी गई।
- 7,500 रुपये मासिक EPS पेंशन: सेवानिवृत्ति के बाद आज भी लाखों कर्मचारियों को महज 1000-1500 रुपये पेंशन मिलती है, जो दो वक्त की रोटी भी नहीं सुनिश्चित करा पाती। न्यूनतम 7,500 रुपये पेंशन और बेहतर चिकित्सा सुविधा उनके अधिकार में शामिल है।
- बोनस गणना सीमा में वृद्धि: त्योहारों पर मिलने वाला बोनस भी महंगाई के आगे बौना साबित हो रहा है, इसलिए बोनस की गणना सीमा को तार्किक रूप से बढ़ाने की बात कही गई।
- आंगनबाड़ी, आशा और NHM कर्मचारियों का मानदेय: ये कर्मचारी स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की अनसुनी कहानियां लिखते हैं, लेकिन खुद का वेतन ‘मानदेय’ के नाम पर तुच्छ है। इन्हें नियमित और सम्मानजनक वेतन दिए जाने की मांग रखी गई।
- समान कार्य के लिए समान वेतन: अनुबंधित और नियमित कर्मचारियों के बीच जो वेतन का अंतर है, उसे खत्म करने की बात की गई।
- श्रम कानूनों में संशोधन: श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए पुराने श्रम कानूनों में जमाने के हिसाब से बदलाव करने की आवश्यकता बताई गई।
- बैंकिंग क्षेत्र में 5 दिन का काम: बैंक कर्मचारियों की मानसिक और शारीरिक सेहत को ध्यान में रखते हुए पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की पुरषाना मांग को भी इस ज्ञापन में शामिल किया गया।
भाटापारा परिवहन संघ ने भी दिखाई ताकत
इस मजबूत आंदोलन में भाटापारा परिवहन चालक-परिचालक संघ की भूमिका काफी प्रशंसनीय रही। संघ के तत्वावधान में प्रधानमंत्री के नाम अलग से एक ज्ञापन तैयार किया गया, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से भेजा गया। इस दौरान संघ के संरक्षक शिवकुमार साहू, अध्यक्ष विनोद जेंडरे, उपाध्यक्ष बल्लू पाल, महासचिव गोविंद मनहरे, कोषाध्यक्ष योगेश साहू, सह-सचिव मनीष, सलाहकार राजकुमार बघेल और मीडिया प्रभारी राहुल डहरिया सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
गीता सोनी ने सरकार को दी चेतावनी भरी अपील
मांग दिवस के मंच पर संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गीता सोनी ने कड़ी बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा, “श्रमिक महज कोई मजदूर नहीं हैं, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था और विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। अगर ये रुकेंगे, तो देश का पहिया रुक जाएगा।” उन्होंने सरकार से अपील की कि श्रमिकों की जायज मांगों का समयबद्ध निराकरण किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत ढांचा मिल सके।

























