बारिश में तेजी से फैलता है फंगल इंफेक्शन, जानें बचाव

जब त्वचा लंबे समय तक नम रहती है, तो फंगस (कवक) के बीजाणु (Spores) उसमें तेजी से पनपने लगते हैं। यही कारण है कि इस दौरान दाद, खाज और असहनीय खुजली जैसी समस्याएं काफी आम हो जाती हैं।

बरसात में त्वचा की ये समस्याएं हो सकती हैं खतरनाक

HIGHLIGHTS

  • दाद और खाज से पाएं छुटकारा, अपनाएं ये जरूरी उपाय
  • बारिश में नहीं पहनें गीले जूते, नहीं तो होगा नुकसान
  • ऑयली स्किन वालों को बारिश में फंगल इंफेक्शन का खतरा
  • इन गलतियों से बारिश में तेजी से फैलता है फंगस

Know the risks of fungal infections and preventive measures:बारिश का मौसम हमेशा से चाय और पकौड़ों की फुर्सत, भीगी मिट्टी की सुगंध और प्रकृति के हरे-भरे नजारों के लिए पसंद किया जाता है। लेकिन, इस मौसम के अपने कुछ खास दुष्प्रभाव भी होते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है त्वचा से जुड़ी परेशानियां। मानसून के दौरान वातावरण में नमी (Humidity) का स्तर आकाश को छूने लगता है। यह अत्यधिक नमी और बदलता तापमान हमारी त्वचा के लिए एक चुनौती बन जाता है। खासकर उन लोगों के लिए जिनकी स्किन प्राकृतिक रूप से ऑयली (तैलीय) होती है, बारिश का मौसम फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection) को न्योता देने वाला साबित होता है।

जब त्वचा लंबे समय तक नम रहती है, तो फंगस (कवक) के बीजाणु (Spores) उसमें तेजी से पनपने लगते हैं। यही कारण है कि इस दौरान दाद, खाज और असहनीय खुजली जैसी समस्याएं काफी आम हो जाती हैं। आइए, विस्तार से समझते हैं कि बारिश में कौन-कौन से फंगल संक्रमण शरीर को प्रभावित करते हैं और उनसे बचने के लिए क्या उपाय अपनाए जाने चाहिए।

बरसात के मौसम में होने वाले प्रमुख फंगल संक्रमण

फंगल इन्फेक्शन किसी एक रूप में नहीं आते, बल्कि ये शरीर के अलग-अलग हिस्सों को अपना निशाना बनाते हैं। यहां प्रमुख प्रकारों का वर्णन है:

1. दाद (Ringworm Infection)

यह बरसात में होने वाला सबसे कॉमन इन्फेक्शन है। अक्सर लोगों के मन में भ्रम होता है कि ‘दाद’ किसी कीड़े के काटने से होता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह एक तेजी से फैलने वाला फंगल संक्रमण है, जो एक विशेष प्रकार के परजीवी फफूंद के कारण होता है। यह त्वचा की सबसे बाहरी परत (Epidermis) पर अटैक करता है।

इसके लक्षणों में त्वचा पर गोल या अंडाकार पपड़ीदार धब्बे बनना शामिल है। इन धब्बों के किनारे लाल रंग के होते हैं और बीच का हिस्सा सामान्य दिखता है, जिससे यह एक ‘रिंग’ जैसा आकार बनाता है। इसमें लगातार और तेज खुजली होती है, जिसे खुजलाने से छाले जैसे दर्दनाक घाव बन जाते हैं।

2. इंटरट्रिगो (Intertrigo)

यह एक जटिल प्रकार की सूजन वाली त्वचा समस्या है। यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों में होती है जहां त्वचा की दो परतें एक-दूसरे से टकराती हैं, जैसे अंडरआर्म्स (बगल), जांघों के बीच, स्तनों के नीचे या पेट के निचले हिस्से में।

गर्मी, भारी नमी और लगातार त्वचा के रगड़ने (Friction) के कारण यह समस्या बहुत तेजी से बढ़ती है। इंटरट्रिगो के शिकार व्यक्ति को तेज जलन, चुभने वाला दर्द और लगातार खुजली होती है। अगर इसे समय पर न रोका जाए, तो वहां दुर्गंध आने लगती है, सूजन हो जाती है और त्वचा छिलके की तरह उखड़ने लगती है।

3. फफूंद जन्य बीमारी या टिनिया कैपिटिस (Tinea Capitis)

जब यह फंगस सिर की खोपड़ी (Scalp) पर हमला करता है, तो इसे टिनिया कैपिटिस कहा जाता है। यह ‘डर्माटोफाइट’ नामक कवक प्रजातियों—जैसे माइक्रोस्पोरम और ट्राइकोफाइटन के कारण होता है।
इसके लक्षण बेहद चिंताजनक होते हैं। इससे सिर पर पैचीदार और गंजे धब्बे पड़ जाते हैं। बाल रूखे (फ्रिजी) होकर टूटने लगते हैं। खोपड़ी के आसपास की त्वचा में सूजन आ जाती है और कई बार मवाद (Pus) से भरे, खुजलीदार व दर्दनाक घाव बन जाते हैं। अगर इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह खोपड़ी के बालों को स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है।

4. यीस्ट इंफेक्शन (Yeast Infection / Candidiasis)

यीस्ट इंफेक्शन को चिकित्सा भाषा में ‘कैंडिडा’ (Candida) के नाम से जाना जाता है। हमारी त्वचा पर प्राकृतिक रूप से कुछ यीस्ट मौजूद होते हैं, लेकिन जब बारिश के कारण नम और हवादार (Poor ventilation) वाले क्षेत्रों में त्वचा लंबे समय तक गीली रहती है, तो इनकी संख्या असंतुलित होकर बढ़ जाती है।

यह संक्रमण अधिकतर शरीर के उन हिस्सों को नुकसान पहुंचाता है जहां सूरज की रोशनी या हवा नहीं पहुंच पाती, जैसे कूल्हों की परतों पर, नाभि के आसपास या स्तनों के नीचे। इसके लक्षणों में त्वचा पर तेज लाल रंग के दाने निकलना, भयंकर खुजली और उन दानों के चारों ओर छोटे-छोटे मुंहासे (Satellite Lesions) बनना शामिल है।

फंगल इंफेक्शन से बचाव के जरूरी और प्रभावी उपाय

बारिश के मौसम में फंगस को शरीर पर पनपने का मौका न देने के लिए अपनी दिनचर्या में कुछ आदतों को शामिल करना बहुत जरूरी है। यहां कुछ ऐसे कारगर उपाय दिए गए हैं, जो आपको इन संक्रमणों से दूर रखेंगे:

1. गीलेपन से रखें सख्त दूरी

सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम है कि बरसात में कभी भी ज्यादा देर तक गीले न रहें। अगर आप बारिश में भीग गए हैं, तो घर आते ही तुरंत अपने कपड़े बदल लें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले कपड़े पहनकर लंबे समय तक न बैठें, क्योंकि नम कपड़ा फंगस के लिए एक कुशन का काम करता है।

2. जूते और मोजे का विशेष ध्यान

कभी भी गीले या भीगे हुए जूते न पहनें। अगर जूते भीग गए हैं, तो उन्हें अखबार या नारियल के छिलके भरकर सूखी हवा और धूप में रखें। साथ ही, केवल कॉटन (Cotton) जैसे ब्रीदेबल (सांस लेने वाले) फैब्रिक वाले मोजे ही पहनें, ताकि पैरों से पसीना बाहर निकल सके। मोजों को हर रोज बदलना अनिवार्य है।

3. व्यक्तिगत सामान कभी शेयर न करें

फंगल इन्फेक्शन बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। इसलिए अपने हेयरब्रश, कंब, मोजे, जूते, तौलिया या बाथरोब को किसी के साथ शेयर करने की गलती कभी न करें। यहां तक कि परिवार के सदस्यों के साथ भी इन चीजों को शेयर नहीं करना चाहिए।

4. ढीले और हल्के कपड़े पहनें

बारिश में बहुत ज्यादा टाइट (Skin-fit) कपड़े पहनने से बचें। टाइट कपड़े त्वचा से चिपककर रगड़ पैदा करते हैं और पसीने को सूखने नहीं देते। हमेशा ढीले, कॉटन या लिनेन के कपड़े पहनें जिससे कि आपकी त्वचा को सांस लेने का पूरा मौका मिल सके।

5. बालों की सफाई और सुखाने पर दें ध्यान

बारिश के मौसम में बालों में भी नमी बनी रहती है। अपने बालों को हल्के और माइल्ड शैम्पू से अच्छे से धोएं। धोने के बाद बालों को तौलिये से जोर से न रगड़ें, बल्कि धीरे-धीरे पोंछें। सबसे जरूरी बात यह है कि गीले बालों के साथ सोने या बाहर जाने से पहले उन्हें पूरी तरह सूखा लें।

6. नाखूनों और क्यूटिकल्स की देखभाल

नहाते समय अपने नाखूनों को अच्छी तरह साफ करें, खासकर नाखूनों के नीचे के हिस्से में जमा गंदगी को निकालें, क्योंकि वहां फंगस छुपकर बढ़ता है। साथ ही, अपने नाखूनों की क्यूटिकल्स (नाखून की नरम त्वचा) को कभी न काटें। क्यूटिकल्स काटने से बैक्टीरिया और फंगस के प्रवेश का रास्ता खुल जाता है।

7. पैरों को भी दें भरपूर ध्यान

अक्सर लोग चेहरे और शरीर का ध्यान तो करते हैं, लेकिन पैरों की अनदेखी कर देते हैं। नहाने के बाद पैरों की उंगलियों के बीच का हिस्सा अच्छे से सूखा लें। आपको केवल हाथों की ही नहीं, बल्कि पैरों की मसाज और सफाई का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए।

Sandhya Samay News

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