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नोएडा में स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता अभियान आयोजित

Noida News: डॉ. महिपाल सिंह ने अपनी बातचीत की शुरुआत 'रिपीटेटिव स्ट्रेन इंजरी' (RSI) यानि दोहराव वाले तनाव वाली चोट से की। उन्होंने समझाया कि आज कल ज्यादातर लोग लैपटॉप, मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करते हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य जागरूकता की जरूरत

HIGHLIGHTS

  • डॉ. महिपाल सिंह ने बताए सही पोस्चर के महत्व
  • आरएसआई: लगातार गलत मुद्रा से बढ़ती गंभीर समस्या
  • गलत पोस्चर कैसे बन रहा है युवाओं की परेशानी
  • मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध
  • तनाव और दर्द का पारिवारिक रिश्तों पर असर

Noida News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां तकनीक हमें सुविधाजनक बना रही है, वहीं शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर किए जाने वाले काम और बिगड़ती दिनचर्या ने आज हमारे समाज में कई ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है जो पहले शायद ही इतनी आम थीं। इन समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने के उद्देश्य से, रविवार को नोएडा के सेक्टर 73 स्थित महादेव अपार्टमेंट में एक महत्वपूर्ण जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।

यह अभियान ‘आईकेयर नोएडा’ (iCare Noida) की पहल के तहत आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना था। इस कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण बिंदु फर्स्ट रिहैब फाउंडेशन के निदेशक, वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट और एर्गोनोमिस्ट डॉ. महिपाल सिंह की उपस्थिति और उनकी व्याख्यान रही। डॉ. महिपाल सिंह ने अपने विस्तृत अनुभव और ज्ञान को साझा करते हुए लोगों को उन बिंदुओं पर गौर कराया, जिन पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते, लेकिन जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

आरएसआई और पोस्चर: आधुनिक युग की चुनौती

डॉ. महिपाल सिंह ने अपनी बातचीत की शुरुआत ‘रिपीटेटिव स्ट्रेन इंजरी’ (RSI) यानि दोहराव वाले तनाव वाली चोट से की। उन्होंने समझाया कि आज कल ज्यादातर लोग लैपटॉप, मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करते हैं। घंटों तक गलत मुद्रा (Posture) में बैठने और एक ही काम को बार-बार करने से मांसपेशियों और नसों में खिंचाव पैदा हो जाता है, जिसे ही आरएसआई कहते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में यह केवल हल्का दर्द या थकान लगता है, लेकिन समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह गंभीर रूप ले सकता है।

उन्होंने ‘पोस्चरल करेक्शन’ पर विस्तार से चर्चा करते हुए लोगों को सही तरीके से बैठने, उठने और काम करने के तरीके सिखाए। उन्होंने कहा, “हमारा शरीर एक मशीन है, और अगर हम इसे सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करेंगे, तो यह जल्दी खराब हो जाएगी। गलत पोस्चर से सिर्फ गर्दन और कमर दर्द नहीं होता, बल्कि इसका असर हमारे पूरे सिस्टम पर पड़ता है।”

मन और शरीर का अटूट संबंध: भावनाओं का शारीरिक प्रभाव

डॉ. सिंह की व्याख्यान का सबसे खास पहलू यह था जब उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य को मानसिक स्वास्थ्य से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि हमारा बोलने का तरीका और हमारा व्यवहार हमारी सेहत का प्रतिबिंब होता है। अक्सर हम देखते हैं कि जब शरीर में कहीं हल्का दर्द होता है या कोई शारीरिक बदलाव आता है, तो हम स्वाभाविक रूप से चिड़चिड़े हो जाते हैं। यह चिड़चिड़ापन सिर्फ एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है।

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप किसी कारणवश तनाव में हैं या शरीर में दर्द है, तो आपका व्यवहार अपने आप बदल जाता है। आप परिवार के सदस्यों पर बेवजह गुस्सा करने लगते हैं। इससे घर का माहौल बिगड़ जाता है और परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत में तनाव पैदा हो जाता है।” यह एक अहम संदेश था, जिससे लोगों को अहसास हुआ कि उनका स्वास्थ्य सिर्फ उनका व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि उनके परिवार की खुशियों से जुड़ा हुआ है।

मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अलगाव

डॉ. महिपाल सिंह ने मानसिक स्थिति के उतार-चढ़ाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब मन सही स्थिति में नहीं होता, तो व्यक्ति अक्सर अकेला महसूस करता है और अकेले रहना चाहने लगता है। यह सामाजिक अलगाव (Social Isolation) बड़ी समस्या है। शरीर, दिमाग और मन तीनों साथ मिलकर काम करते हैं। अगर मन खुश है, तो शरीर के रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है, और अगर मन बीमार है, तो शारीरिक उपचार भी धीरे-धीरे असर दिखाते हैं।

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि दिमागी तौर पर स्वस्थ रहेंगे, तो अन्य काम भी आसान हो जाएंगे। आज की दैनिक दिनचर्या हमारे दिमाग और शरीर पर कैसे भारी पड़ रही है, इसे समझना जरूरी है। उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे गलत पोस्चर और आरएसआई से बचने के लिए सही तरीके से व्यायाम और काम करने की आदत डालें।

गर्मी से बचाव और स्वच्छता

इस दौरान, डॉ. सिंह ने आत्मकथा के बढ़ते तापमान और ‘हीट वेव’ (लू) से बचाव के उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए और धूप से बचकर रहना जरूरी है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए।

इस जागरूकता अभियान में फर्स्ट रिहैब फाउंडेशन की ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट एवं प्रबंध निदेशक डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव भी मौजूद रहीं। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी सार्थक बनाया।

समाज की भागीदारी और पर्यावरण से जुड़ाव

केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कार्यों के जरिए भी इस कार्यक्रम को सफल बनाया गया। महादेव अपार्टमेंट सोसाइटी के निवासियों ने भी इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने सोसाइटी परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पौधारोपण किया। पेड़-पौधे लगाने का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना था, बल्कि लोगों को यह संदेश देना भी था कि स्वच्छ और हरा-भरा माहौल हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।

कार्यक्रम का एक खास पहलू यह भी रहा कि फर्स्ट रिहैब फाउंडेशन के बच्चों द्वारा बनाए गए उत्पादों का वितरण किया गया। इनमें हैंडवॉश, सैनिटाइज़र और साबुन शामिल थे। यह देखकर लोगों को बहुत खुशी हुई कि ये बच्चे न केवल स्वावलंबी बन रहे हैं, बल्कि स्वच्छता के प्रति भी जागरूक हैं। इन उत्पादों का इस्तेमाल करके लोग स्वच्छता बनाए रख सकते हैं, जो बीमारियों से बचाव का पहला कदम है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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