अरविंद केजरीवाल का मोदी पर गंभीर आरोप

मेटा ने अपने एक बयान में स्वीकार किया कि वीडियो गलती से हटाया गया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री को लेकर उसकी जिम्मेदारी सीमित है। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक वीडियो, और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों पर माफी मांगी है।

मोदी पर केजरीवाल का बड़ा आरोप: सरकार नागरिकों से लड़ रही है

HIGHLIGHTS

  • मेटा विवाद पर मोदी का वीडियो गलती से हटाने का मामला
  • सरकार-मेटा टकराव: फेसबुक वीडियो हटाने का विवाद तेज हो गया
  • मोदी का फेसबुक वीडियो हटाने पर मेटा ने माफी मांगी
  • केजरीवाल का आरोप: मोदी सरकार खुद नागरिकों से लड़ रही है

देश की राजनीति में इन दिनों एक नई हलचल देखने को मिल रही है, जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि सरकार अपने ही नागरिकों से लड़ रही है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा (Meta) से जुड़ी वर्तमान विवाद के बीच मोदी सरकार नागरिकों से खुद को बचाने के लिए नए कानून बना रही है।

केजरीवाल का ताजा बयान और उसकी पृष्ठभूमि

शुक्रवार को अपने एक पोस्ट में, केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पेपर लीक, ई20 ईंधन जैसे मुद्दों पर जनता का भरोसा तोड़ने का काम कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन विवादों के कारण मोदी के पुराने समर्थक भी अब उनके खिलाफ हो रहे हैं। केजरीवाल का यह बयान उस समय आया है जब मीडिया और सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है, खासकर मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग द्वारा प्रधानमंत्री मोदी का फेसबुक वीडियो गलती से हटाए जाने के बाद।

मेटा विवाद का पूरा घटनाक्रम

कुछ दिनों पहले, सूत्रों ने बताया कि फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो गलती से प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। इस विषय में मेटा ने सरकार से माफी भी मांगी है। यह वीडियो हटाए जाने का मामला राजनीतिक और तकनीकी दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बन गया है।

मेटा ने अपने एक बयान में स्वीकार किया कि वीडियो गलती से हटाया गया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री को लेकर उसकी जिम्मेदारी सीमित है। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक वीडियो, और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों पर माफी मांगी है। खास बात यह है कि मेटा ने यह भी माना कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट के वितरण के लिए खुद जिम्मेदार हैं, और उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ‘इंटरमीडियरी’ की परिभाषा में नहीं आते हैं।

मेटा की कानूनी स्थिति और सरकार का रुख

मेटा ने यह भी बताया कि वह अपने कंटेंट का चयन खुद करता है और यह तय करता है कि किसे कौन सा कंटेंट दिखेगा। इसलिए, भारत में लागू आईटी एक्ट के तहत, प्लेटफॉर्म को ‘सेफ हार्बर’ का दर्जा प्राप्त नहीं है। इस स्थिति में, सरकार की ओर से उन पर कड़े नियम और निगरानी की जा सकती है।

हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने मेटा के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस 45 मिनट की बैठक में मेटा के ग्लोबल अफेयर्स के प्रमुख जोएल कपलान ने प्रधानमंत्री का वीडियो गलती से हटाए जाने की जानकारी दी। यह बैठक उस समय हुई जब भारत की संसद की स्थायी समिति ने फेसबुक से बिना शर्त माफी की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उन्होंने सख्ती नहीं बरती तो भारत में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को मिलने वाली कानूनी छूट समाप्त की जा सकती है।

सरकार और सोशल मीडिया के बीच बढ़ रही जंग

यह विवाद केवल तकनीकी गलती का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सोशल मीडिया कंपनियों और सरकार के बीच एक बड़े टकराव का रूप ले चुका है। सरकार की चिंता है कि प्लेटफार्मों का गलत इस्तेमाल हो रहा है और इन पर बच्चों के यौन शोषण, डीपफेक वीडियो और गलत सूचनाओं के प्रचार का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए, सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है, जो उनके कंटेंट को नियंत्रित करने और अवैध सामग्री पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

आगे की राह और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

केजरीवाल जैसे नेताओं का आरोप है कि मोदी सरकार अपने ही नागरिकों को सुरक्षित नहीं रख पा रही है और सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर देश की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ, सरकार का तर्क है कि वह राष्ट्रहित में कदम उठा रही है और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए।

यह विवाद अभी भी जारी है, और इसमें राजनीतिक दलों के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञ भी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच इस जंग का समाधान निकलेगा या फिर यह विवाद लंबा खिंचता चला जाएगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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