अमेरिका के टेक्सास में स्थित भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची मूर्ति एक बार फिर चर्चाओं में आ गई है। यह मूर्ति, जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ द यूनियन’ नाम से जाना जाता है, स्थानीय श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित है और अगस्त 2024 में इसकी प्रतिष्ठा हुई थी।
यह मूर्ति शक्ति, भक्ति, सेवा और एकता का प्रतीक मानी जाती है, और पंचधातु से बनी यह मूर्ति अमेरिका में सबसे ऊंची हिंदू मूर्तियों में से एक है। इस विवाद के केंद्र में सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी है, जिसने धार्मिक और राजनीतिक बहस को फिर से भड़का दिया है।
मूर्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद
मूर्ति के स्थापित होने के बाद से ही विभिन्न धार्मिक समूहों और समुदायों के बीच विरोध शुरू हो गया था। कुछ ईसाई कंजर्वेटिव समूहों ने इसे ‘गैर-ईसाई’ और ‘झूठे देवताओं’ की मूर्ति करार दिया। एक चर्च ग्रुप ने मंदिर के पास प्रार्थना भी की, जिसे मंदिर प्रबंधन ने पुलिस बुलाकर नियंत्रित किया।
वहीं, 2025 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन ने इस मूर्ति को ‘झूठे हिंदू भगवान की मूर्ति’ कहा, जिसे लेकर हिंदू समुदाय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। हिंदू-अमेरिकी फाउंडेशन जैसे संगठनों ने इस बयान का विरोध किया और अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन किया।
मीडिया में जोड़ी गई राजनीति
हाल ही में, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने नई बहस को जन्म दिया है। टेक्सास में रहने वाले कंजर्वेटिव यूट्यूबर और MAGA समर्थक जेसी ह्यूजेस ने लिखा, “जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे।” इस पोस्ट ने विवाद को और तेज कर दिया। ह्यूजेस का यह बयान स्पष्ट नहीं था कि उनके ‘हम’ और ‘जीत’ का मतलब क्या है, लेकिन यह बयान धार्मिक और राजनीतिक रंगत में आ गया।
इस टिप्पणी पर हिंदू समुदाय, पूर्व सैनिक और भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने तीखा विरोध जताया है। पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने कहा कि उन्होंने वर्दी और देश के लिए लड़ाई इसीलिए नहीं लड़ी थी कि किसी नेता की जीत के बाद उनके धर्म या मंदिरों को नुकसान पहुंचे।
हिंदू समुदाय का जवाब
रुचिर बख्शी और कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) ने इस तरह की धार्मिक नफरत और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया है। बख्शी ने कहा कि उन्होंने अपने देश के लिए सेवा की, और किसी भी धर्म के खिलाफ बदले की भावना ठीक नहीं है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू मंदिरों में पूजा करने वाले लोग टैक्स देते हैं, व्यापार करते हैं और अपने बच्चों को सेना में भेजते हैं। किसी भी समुदाय का धार्मिक स्थल सिर्फ आस्था का प्रतीक है, जिसे तोड़ने की बात राष्ट्रीय खतरा है। हिंदू समुदाय का मानना है कि अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता सबके लिए है और इसे किसी भी तरह से खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए।
धार्मिक और राजनीतिक बहस का परिदृश्य
टेक्सास में पांच लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं, और यह क्षेत्र भारतीय समुदाय का बड़ा केंद्र बन चुका है। भारतीय समुदाय और हिंदू संगठनों का जोर है कि मूर्ति का स्थान और निर्माण पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया से हुआ है। यह मंदिर निजी जमीन पर है और इसकी परमिट भी कानूनी नियमों के अनुसार मिली है।
इस विवाद का राजनीतिक आयाम भी इसमें जोड़ दिया गया है, जहां चुनावी माहौल में इमिग्रेशन, पहचान और सांस्कृतिक मुद्दे उठ रहे हैं। विरोध करने वालों का तर्क है कि यह मूर्ति अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक है और इसे राजनीतिक रूप से भड़काने का प्रयास किया जा रहा है।


























