Haryana News: मलेशिया में इमीग्रेशन रेड के दौरान 10वीं मंजिल से छलांग लगाने वाले हरियाणा के करनाल निवासी दलित युवक और उसकी पत्नी के शव को भारत वापस लाने का मामला सामने आया है। हर तरफ से नाउम्मीद हुए इस अत्यंत गरीब परिवार के लिए वरिष्ठ पत्रकार विकास सुखीजा के अथक प्रयास और हरियाणा सरकार की त्वरित कार्रवाई किसी वरदान से कम नहीं रही। पत्रकार की मदद से न सिर्फ पत्नी का शव 5 दिन में, बल्कि कोमा में पड़े युवक को मात्र 15 दिनों के भीतर स्वदेश लाया जा सका।
मलेशिया में दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, करनाल के गांव सिंघड़ा निवासी कपिल लगभग ढाई साल पहले अपनी पत्नी के साथ टूरिस्ट वीजा पर मलेशिया गया था। वीजा खत्म होने के बाद दोनों वहां अवैध रूप से रहकर कमाई कर रहे थे। हाल ही में जब मलेशिया की इमीग्रेशन टीम और पुलिस ने क्वालालंपुर स्थित उस बिल्डिंग में छापामारी की, जहां यह दंपति रह रहा था, तो गिरफ्तारी के डर से दोनों 10वीं मंजिल से नीचे कूद गए। इस दर्दनाक हादसे में मौके पर ही कपिल की पत्नी की मौत हो गई, जबकि कपिल गंभीर चोटों के कारण कोमा में चला गया।
फंसे परिवार ने उठाई एनजीओ की ठगी की भिंटी
इस हादसे की जानकारी जब कपिल के परिवार को हुई तो उनके होश उड़ गए। ना पासपोर्ट और ना पैसों के अभाव में परिवार बेहद बुरी तरह से सहायता के लिए संघर्ष करने लगा। इसी बीच मलेशिया की एक एनजीओ ने परिवार को फोन कर इलाज का भरोसा दिलाया और 2 लाख रुपये की मांग की। बेसहारा परिवार ने कर्जा लेकर 1.80 लाख रुपये ऑनलाइन भेज दिए, लेकिन एनजीओ ने इसमें से मात्र 70 हजार रुपये ही अस्पताल में जमा कराए और बाकी पैसे हड़प लिए। स्थानीय नेताओं से गुहार लगाने पर भी परिवार को कोई सहयोग नहीं मिला।
पत्रकार ने उठाई पहल, सरकार ने दिखाई तेजी
सब के बंद दरवाजे देखकर कपिल का भाई दीपक और जीजा मुकेश वरिष्ठ पत्रकार विकास सुखीजा के पास पहुंचे। विकास सुखीजा ने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखा।
इसके तुरंत बाद उन्हें मुख्यमंत्री निवास से चंडीगढ़ बुलावा आया। पत्रकार विकास सुखीजा के नेतृत्व में पीड़ित परिवार और गांव के सरपंच लखविंदर सिंह ने सीएम नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। सीएम ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद विकास सुखीजा ने करनाल प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से मिलकर पूरे मामले से अवगत कराया।
15 दिन में दोनों को मिली स्वदेश वापसी
सरकारी तंत्र के सक्रिय होते ही कमाल हो गया। मात्र 5 दिन के भीतर कपिल की पत्नी का शव भारत मंगवा लिया गया और 15 दिन के भीतर ही कोमा में पड़े कपिल को भी सफलतापूर्वक भारत लाया जा सका। वर्तमान में कपिल को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहां उसकी कई सर्जरी हुई हैं।
‘पत्रकार ने भगवान का रूप धारण किया’
कपिल की मां ने भावुकता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें कोई उम्मीद नहीं थी। विकास सुखीजा जी हमारे लिए भगवान बनकर आए। उनकी वजह से हमारा बेटा जिंदा वापस आया और उसका इलाज हो रहा है।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार विकास सुखीजा और पीड़ित परिवार ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट के समय इस तरह के संवेदनशील और त्वरित निर्णय लेने वाले नेताओं से ही गरीबों को राहत मिलती है। इस पूरे प्रकरण ने मानवता की सेवा और पत्रकारिता की जिम्मेदारी को एक नई मिसाल कायम की है।

























