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20 गुना सुरक्षित! जानिए हाथियों की कैंसर-रोधी शक्ति का राज

धरती पर हाथी सबसे बड़े स्थलीय जीव हैं। विज्ञान की दृष्टि से देखें, तो जितना बड़ा शरीर होगा, उतनी अधिक कोशिकाएं होंगी और कोशिकाओं के विभाजन के दौरान गलतियां होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है, जो कैंसर का मुख्य कारण है। लेकिन हाथियों में कैंसर का खतरा इंसानों की तुलना में 20 गुना कम है।

कैंसर के खिलाफ प्रकृति का सबसे बड़ा हथियार है हाथी

HIGHLIGHTS

  • कैंसर को मात देने वाला जीव
  • हाथी के जीन का बड़ा खुलासा
  • हाथी कैसे रहता है कैंसर से दूर
  • इतने बड़े शरीर में भी नहीं होता कैंसर
  • हाथी के जीनोम का रहस्य

The Amazing Mystery of the Elephant News: क्या आप जानते हैं? पृथ्वी पर एक ऐसा जीव मौजूद है जिसका शरीर इंसानों से कई गुना बड़ा है, जिसकी कोशिकाओं की संख्या अरबों में है, फिर भी उसे ‘कैंसर’ नामक भयावह बीमारी कभी नहीं घेरती। आज के दौर में, जब कैंसर इंसान को कम उम्र में ही अपनी चपेट में ले रहा है और हर साल लाखों लोग इसकी वजह से जीवन युद्ध लड़ रहे हैं, तब प्रकृति का यह रहस्य हमारे लिए न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि एक नई उम्मीद भी भरता है।

यह जीव है हाथी

धरती पर हाथी सबसे बड़े स्थलीय जीव हैं। विज्ञान की दृष्टि से देखें, तो जितना बड़ा शरीर होगा, उतनी अधिक कोशिकाएं होंगी और कोशिकाओं के विभाजन के दौरान गलतियां होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है, जो कैंसर का मुख्य कारण है। लेकिन हाथियों में कैंसर का खतरा इंसानों की तुलना में 20 गुना कम है। आखिर वो कौन सी शक्ति है जो इन विशालकाय जीवों को कैंसर से बचाती है?

वैज्ञानिकों ने इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए एक ऐसे ‘चमत्कारिक जीन’ का पता लगाया है, जो कैंसर को जड़ से खत्म करने की ताकत रखता है। आइए, इस अद्भुत खोज के बारे में विस्तार से जानते हैं।

TP53 जीन का चमत्कार: जीनोम का रक्षक

इस पूरे रहस्य का नायक है TP53 नाम का एक जीन। जीव विज्ञान की भाषा में इसे ‘गार्जियन ऑफ जीनोम’ यानी जीनोम का रक्षक भी कहा जाता है। इंसानों सहित अधिकतर स्तनधारी जीवों के शरीर में यह जीन मौजूद होता है। इसका काम शरीर में कैंसर कोशिकाओं को पहचानना और उन्हें या तो मारना या उनकी मरम्मत करना है। जब भी किसी कोशिका में डीएनए क्षतिग्रस्त होता है या कैंसर बनने का खतरा होता है, तो TP53 सक्रिय होकर उस कोशिका को ‘आत्महत्या’ के लिए मजबूर कर देता है, ताकि वह कैंसर का रूप न ले सके।

इंसान बनाम हाथी: संख्या का खेल

  • इंसानों में: TP53 जीन की सिर्फ दो कॉपीज मौजूद होती हैं (एक मां से, एक पिता से)।
  • हाथियों में:आश्चर्यजनक रूप से हाथियों की बॉडी में TP53 जीन की 20 से अधिक कॉपीज पाई गई हैं!

इसका मतलब यह है कि हाथियों के पास कैंसर से लड़ने के लिए एक पूरी ‘सेना’ है, जबकि इंसानों के पास सिर्फ दो जवान हैं। जैसे ही हाथी के किसी सेल में कैंसर होने की शुरुआत होती है, ये अतिरिक्त जीन तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और उस संक्रमित कोशिका को खुद-ब-खुद नष्ट कर देते हैं। यही वजह है कि इतने विशाल शरीर वाले हाथी भी कैंसर से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

शोध की कहानी: कैसे खुला यह राज?

यह रहस्य कई सालों तक वैज्ञानिकों को हैरान करता रहा। आखिरकार, साल 2015 में यूटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इसका सफलतापूर्वक पता लगा लिया।

इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने हाथियों सहित विभिन्न जानवरों के जीनोम (Genome) का गहन अध्ययन किया। परिणामों ने सबको चौंका दिया। उन्हें पता चला कि हाथियों में ना सिर्फ TP53 जीन की संख्या अधिक है, बल्कि उनके डीएनए (DNA) में अन्य कई ऐसे बदलाव हैं जो उनकी कैंसर प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं।

यह अध्ययन दुनिया के प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका ‘JAMA’ में प्रकाशित हुआ और पूरी दुनिया में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। इस खोज ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नई दिशा का संकेत दिया।

क्यों जरूरी है यह खोज? इंसानों के लिए क्या है उम्मीद?

आप सोच रहे होंगे कि हाथियों के जीन की खोज से हमें क्या फायदा होगा? तो बता दें कि यह खोज कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी साबित हो सकती है।

  1. नई दवाओं का विकास: अगर वैज्ञानिक हाथियों वाले TP53 जीन की कार्यप्रणाली को पूरी तरह समझ जाते हैं, तो वे ऐसी दवाएं बना सकते हैं जो इंसानों के शरीर में इसी तरह काम करें।
  2. जीन थेरेपी : भविष्य में, इंसानों में इस जीन की कॉपीज को बढ़ाकर या सुधारकर कैंसर को रोका जा सकता है। इससे कैंसर का इलाज आसान और प्रभावी हो सकता है।
  3. रोकथाम: यह खोज हमें यह समझने में मदद करेगी कि कैसे हम अपनी जीवनशैली और चिकित्सा के जरिए कैंसर को शुरू होने से पहले ही रोक सकते हैं।

दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित रिसर्च संस्थान इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। हाथियों के इम्यून सिस्टम को समझकर वैज्ञानिक ऐसा टीका विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं जो कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें नष्ट कर सके।

हाथी: केवल एक जानवर नहीं, चिकित्सा विज्ञान का खजाना

हाथी सिर्फ कैंसर से ही नहीं, कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बहुत कम प्रभावित होते हैं। उनका प्रतिरक्षा प्रणाली बेहद मजबूत होता है। यही वजह है कि वे 60-70 साल तक लंबी उम्र जीते हैं, जो इतने बड़े जानवरों के हिसाब से एक अच्छी और स्वस्थ उम्र मानी जाती है।

संरक्षण की जरूरत

भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में हाथियों का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। लेकिन दुर्भाग्यवश, आज हाथियों का अस्तित्व खतरे में है। वनों की अंधाधुंध कटाई, मानव-हाथी संघर्ष और अवैध शिकार के कारण इनकी संख्या लगातार घट रही है।

इस खोज के बाद वैज्ञानिकों का कहना है कि हाथियों को बचाना सिर्फ पर्यावरण की संतुलन बनाए रखने के लिए ही ज़रूरी नहीं है, बल्कि मानव जाति के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए भी यह अति आवश्यक है। हाथी अब सिर्फ जंगल के राजा नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के लिए भी एक जीवित प्रयोगशाला की तरह हैं, जो हमें एक भयावह बीमारी से मुक्ति दिला सकते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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